PGT टेस्ट क्या है: जेनेटिक जांच हिंदी में – कानपुर
हिंदी गाइड · 10 मिनट

PGT टेस्ट क्या है: जेनेटिक जांच हिंदी में – कानपुर

Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026

PGT से IVF में बने भ्रूण की कुछ जेनेटिक स्थितियों की जानकारी मिल सकती है, लेकिन यह हर दंपती के लिए जरूरी नहीं है। जानिए इसके प्रकार, जांच की प्रक्रिया और रिपोर्ट आने के बाद के विकल्प।

PGT टेस्ट क्या है: जेनेटिक जांच हिंदी में – कानपुर का जवाब खोजते समय अक्सर एक निजी चिंता सामने होती है: क्या हमारे बच्चे में परिवार की कोई बीमारी आ सकती है, या पिछले गर्भपात की वजह भ्रूण के गुणसूत्रों में थी? IVF के दौरान PGT कुछ ऐसे सवालों पर जानकारी दे सकता है। लेकिन यह हर बीमारी की जांच नहीं है और हर दंपती को इसकी जरूरत भी नहीं होती। PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur में परामर्श लेते समय यह समझना जरूरी है कि जांच आपके मामले में किस सवाल का जवाब देगी और उससे इलाज का निर्णय कैसे बदलेगा।

1. PGT क्या है और इससे क्या पता चलता है?

PGT का पूरा नाम Preimplantation Genetic Testing है। इसमें IVF से बने भ्रूण को गर्भाशय में रखने से पहले उसकी कुछ कोशिकाओं की जेनेटिक जांच की जाती है। इसका उद्देश्य जांच के प्रकार के अनुसार गुणसूत्रों की संख्या, उनकी बनावट से जुड़ा असंतुलन या किसी खास वंशानुगत बीमारी का पता लगाना होता है।

हमारी कोशिकाओं में गुणसूत्र होते हैं, जिनमें जीन मौजूद रहते हैं। जीन शरीर के बनने और काम करने के निर्देश जैसे हैं। कभी किसी गुणसूत्र की अतिरिक्त या कम कॉपी होती है, तो कभी किसी खास जीन में बदलाव बीमारी का कारण बनता है। ये दोनों अलग स्थितियां हैं और इनके लिए जांच भी अलग हो सकती है।

“क्या मेरी खून की जांच से ही भ्रूण की रिपोर्ट मिल जाएगी?” नहीं। माता-पिता के खून या अन्य नमूने से उनकी जेनेटिक जानकारी मिल सकती है, जो PGT की योजना बनाने में मदद करती है। भ्रूण की PGT रिपोर्ट उसके लिए लिए गए कोशिका नमूने से बनती है। भ्रूण की अच्छी दिखने वाली तस्वीर या उसकी ग्रेडिंग भी जेनेटिक रिपोर्ट का विकल्प नहीं है।

2. PGT-A, PGT-M और PGT-SR में फर्क

PGT-A: गुणसूत्रों की संख्या की जांच

PGT-A में देखा जाता है कि जांचे गए नमूने में गुणसूत्रों की संख्या अपेक्षित है या नहीं। इसे पहले अक्सर PGS कहा जाता था। यह किसी खास पारिवारिक बीमारी की जांच नहीं है। बढ़ती उम्र, कुछ पिछले IVF अनुभवों या प्रजनन इतिहास के संदर्भ में इस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन इसे सभी IVF मरीजों के लिए जरूरी नहीं माना जाता।

PGT-M: किसी खास जीन से जुड़ी बीमारी

परिवार में थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग या किसी अन्य पहचानी गई single-gene बीमारी का जोखिम हो, तो PGT-M उपयोगी हो सकता है। पहले बीमारी से जुड़े बदलाव की पुष्टि जरूरी होती है। कई मामलों में परिवार के दूसरे सदस्यों की रिपोर्ट या नमूने भी चाहिए होते हैं। इसलिए इसके लिए IVF शुरू होने से पहले तैयारी करना बेहतर रहता है।

PGT-SR: गुणसूत्रों की बनावट से जुड़ा असंतुलन

किसी साथी में balanced translocation जैसी स्थिति होने पर व्यक्ति खुद स्वस्थ हो सकता है, लेकिन कुछ भ्रूणों में जेनेटिक सामग्री कम या ज्यादा हो सकती है। PGT-SR ऐसे असंतुलन की पहचान के लिए किया जाता है। कुछ जांच विधियां पूरी तरह सामान्य भ्रूण और balanced carrier भ्रूण में अंतर नहीं कर पातीं; यह सीमा पहले समझ लें।

पुराने और नए नामों को समझने के लिए हमारी PGS और भ्रूण जांच संबंधी जानकारी देखें। अंग्रेजी में पढ़ने के लिए related English guide भी उपलब्ध है। सही जांच का नाम जानना जरूरी है, क्योंकि एक प्रकार की PGT दूसरे प्रकार की जांच का काम नहीं करती।

3. किन परिस्थितियों में PGT पर विचार किया जा सकता है?

PGT का निर्णय उम्र या किसी एक रिपोर्ट के आधार पर नहीं होना चाहिए। परिवार की बीमारी, पिछली गर्भावस्थाओं, उपलब्ध भ्रूणों और दंपती की प्राथमिकताओं को साथ देखकर फैसला लिया जाता है। इन स्थितियों में विशेषज्ञ से चर्चा उपयोगी हो सकती है:

  • दोनों साथियों में ऐसी carrier स्थिति हो जिससे बच्चे में किसी खास बीमारी का जोखिम बनता हो।
  • पहले बच्चे या गर्भ में कोई पहचानी गई वंशानुगत बीमारी मिली हो।
  • किसी साथी की karyotype रिपोर्ट में गुणसूत्रों की बनावट से जुड़ा बदलाव हो।
  • बार-बार गर्भपात हुआ हो और जांच में जेनेटिक कारण की आशंका हो।
  • उम्र और IVF इतिहास के संदर्भ में भ्रूणों की गुणसूत्र संख्या जानने से चयन में मदद मिलने की संभावना हो।

“मेरे दो IVF प्रयास सफल नहीं हुए, क्या अब PGT जरूरी है?” जरूरी नहीं। भ्रूण के अलावा गर्भाशय, हार्मोन, ट्रांसफर की परिस्थितियां और अन्य कारक भी देखे जाते हैं। सभी मरीजों में PGT-A से कुल मिलाकर बच्चा होने की संभावना बढ़ती है, ऐसा मानना सही नहीं है। कुछ मरीजों में यह चयन में मदद कर सकता है; कुछ में अतिरिक्त जांच का लाभ सीमित रह सकता है।

कम AMH होने का अर्थ भी अपने-आप PGT की जरूरत नहीं है। AMH मुख्यतः अंडाशय के भंडार का संकेत देता है, भ्रूण के जीन की रिपोर्ट नहीं। बहुत कम भ्रूण उपलब्ध हों, तो जांच से मिलने वाली जानकारी और बिना जांच ट्रांसफर के विकल्प पर विशेष चर्चा जरूरी है।

4. IVF के साथ PGT की प्रक्रिया कैसे होती है?

PGT के लिए प्रयोगशाला में भ्रूण बनाना पड़ता है। इसलिए यह प्राकृतिक गर्भधारण की कोशिश या IUI के साथ सीधे नहीं किया जाता। कानपुर में IVF की प्रक्रिया समझने के बाद इसके अतिरिक्त चरण जानना आसान होता है।

  • शुरुआती परामर्श: मेडिकल इतिहास, जेनेटिक रिपोर्ट और जरूरत पड़ने पर genetic counselling की समीक्षा होती है। PGT-M के लिए जांच की उपयुक्तता और तैयारी पहले तय की जाती है।
  • अंडे और शुक्राणु से भ्रूण बनाना: दवाओं, निगरानी और अंडे निकालने के बाद प्रयोगशाला में fertilisation किया जाता है। ICSI की जरूरत मामले के अनुसार तय होती है।
  • भ्रूण की निगरानी: आमतौर पर पांचवें से सातवें दिन के आसपास blastocyst अवस्था में पहुंचे उपयुक्त भ्रूणों पर biopsy की जाती है। हर भ्रूण इस अवस्था तक नहीं पहुंचता।
  • कोशिकाओं का नमूना: प्रशिक्षित embryologist बाहरी परत की कुछ कोशिकाएं लेते हैं, जो आगे मुख्यतः प्लेसेंटा बनाने में योगदान देती हैं। अंदर की कोशिकाओं का पूरा समूह नहीं निकाला जाता।
  • जांच और आगे की योजना: भ्रूण सामान्यतः फ्रीज किए जाते हैं। रिपोर्ट, गर्भाशय की तैयारी और परामर्श के आधार पर बाद में ट्रांसफर तय होता है।

Biopsy और freezing में जोखिम कम हो सकता है, पर शून्य नहीं। नमूना पर्याप्त न मिलना या भ्रूण का आगे इस्तेमाल योग्य न रहना संभव है। भ्रूण फ्रीजिंग और संरक्षण की शर्तें, सहमति और storage की व्यवस्था पहले समझें। रिपोर्ट आने का समय लैब और जांच पर निर्भर करता है; तय ट्रांसफर तारीख मानकर यात्रा न बुक करें।

5. रिपोर्ट आने के बाद कौन-से फैसले सामने आते हैं?

रिपोर्ट को केवल “पास” या “फेल” मानना ठीक नहीं है। PGT-A में euploid का मतलब जांचे गए नमूने में अपेक्षित गुणसूत्र संख्या मिलना है। Aneuploid में संख्या का असंतुलन दिखता है। Mosaic परिणाम में नमूने के भीतर अलग-अलग गुणसूत्र पैटर्न के संकेत मिल सकते हैं। कभी रिपोर्ट अनिश्चित या no result भी आती है।

“रिपोर्ट सामान्य है, तो बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होगा?” ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती। परिणाम कुछ कोशिकाओं पर आधारित होता है, पूरे भ्रूण की हर कोशिका पर नहीं। तकनीकी सीमाएं, mosaicism और जांच के दायरे से बाहर की बीमारियां बनी रहती हैं। इसलिए PGT को संपूर्ण स्वास्थ्य प्रमाणपत्र न समझें।

Mosaic रिपोर्ट में निर्णय खास सावधानी मांगता है। संबंधित गुणसूत्र, रिपोर्ट की व्याख्या, दूसरे भ्रूणों की उपलब्धता और गर्भावस्था में संभावित जोखिम पर genetic counsellor से चर्चा जरूरी है। केवल रिपोर्ट का एक शब्द देखकर भ्रूण के इस्तेमाल या उसे हटाने का निर्णय न लें। PGT-M और PGT-SR की रिपोर्ट का अर्थ भी उनकी जांच विधि के अनुसार समझना होता है।

कभी ट्रांसफर के लिए उपयुक्त भ्रूण नहीं मिलता। तब अगले चक्र, अतिरिक्त परामर्श या अन्य विकल्पों पर बिना जल्दबाजी बात की जाती है। दोबारा biopsy हर मामले का आसान समाधान नहीं है। उसकी उपयोगिता और अतिरिक्त जोखिम अलग से समझने चाहिए।

6. PGT की सीमाएं, गर्भावस्था की जांच और कानूनी बात

PGT कुछ स्थितियों का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन गर्भ ठहरने, गर्भपात न होने या स्वस्थ शिशु जन्म की गारंटी नहीं देता। अच्छी सफलता दर की चर्चा करते समय यह पूछें कि बात किस परिणाम की हो रही है और क्या वह आपके जैसे मरीजों पर लागू है। केवल एक embryo transfer का परिणाम पूरे उपचार का परिणाम नहीं होता।

PGT के बाद गर्भ ठहरने पर भी नियमित antenatal care और सुझाई गई screening जरूरी रहती है। Genetic counselling के आधार पर CVS या amniocentesis जैसी पुष्टि करने वाली जांच पर चर्चा हो सकती है। NIPT एक screening test है; वह हर स्थिति में पुष्टि करने वाली जांच का विकल्प नहीं है। किस जांच की जरूरत होगी, यह प्रसूति विशेषज्ञ तय करने में मदद करेंगे।

भारत में गैर-चिकित्सीय लिंग चयन प्रतिबंधित है। PGT को लड़का या लड़की चुनने की सेवा नहीं समझना चाहिए। कानूनी जानकारी के लिए India Code पर संबंधित भारतीय कानून देखे जा सकते हैं। IVF की सामान्य प्रक्रिया और जोखिमों पर NHS की मरीजों के लिए जानकारी भी उपयोगी है। व्यक्तिगत फैसला इन सामान्य स्रोतों के बजाय अपनी मेडिकल रिपोर्ट के साथ करें।

7. कानपुर में परामर्श की तैयारी और डॉक्टर कब दिखाएं

परिवार में जेनेटिक बीमारी हो तो गर्भधारण या IVF शुरू करने से पहले डॉक्टर दिखाएं। बार-बार गर्भपात, पहले प्रभावित बच्चे या असामान्य chromosome report की स्थिति में भी देर न करें। पहले से गर्भवती हैं तो PGT उस गर्भ की जांच नहीं है; समय पर प्रसूति विशेषज्ञ और genetic counsellor से prenatal testing पर सलाह लें।

कानपुर और आसपास से आने वाले दंपती पहली मुलाकात में ये दस्तावेज साथ रखें:

  • पिछले IVF चक्रों की embryology और transfer reports।
  • गर्भपात या पहले प्रभावित बच्चे की उपलब्ध जांचें।
  • दोनों साथियों की carrier screening या karyotype reports, यदि हुई हों।
  • दवाओं की सूची और परिवार में बीमारी का संक्षिप्त विवरण।

Swaroop Nagar या Shardha Nagar आते समय पहले पुष्टि करें कि उस दिन परामर्श या निर्धारित जांच किस शाखा में है। नौकरी, बच्चों की देखभाल और बाहर से आने-जाने की योजना में निगरानी वाली मुलाकातों का समय रखें। फोन पर पूछें कि क्या दोनों साथियों का आना जरूरी है और पुरानी रिपोर्ट पहले साझा की जा सकती हैं।

खर्च जांच के प्रकार, भ्रूणों की संख्या, विशेष लैब तैयारी, biopsy, freezing और storage जैसे कारकों पर निर्भर करता है। परामर्श के बाद अनुमान लें और पूछें कि किन सेवाओं का खर्च अलग है। यह भी स्पष्ट करें कि नमूने कहां जांचे जाएंगे और अनिश्चित परिणाम आने पर अगला कदम क्या होगा।

8. PRAVI IVF में अगली बातचीत किस बारे में हो?

PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur की टीम में Medical Director Dr. Monica Sachdeva, 18 वर्षों के अनुभव के साथ, Dr. Rit Shukla, 10 वर्षों के अनुभव के साथ, Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, 6+ वर्षों के अनुभव के साथ शामिल हैं। उपलब्ध परामर्श के लिए फर्टिलिटी विशेषज्ञों की जानकारी देखें।

क्लिनिक की साझा जानकारी में “दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी” का उल्लेख है; इसे किसी व्यक्ति के परिणाम की गारंटी नहीं समझना चाहिए। आपके लिए जरूरी सवाल है: क्या PGT से ऐसी जानकारी मिलेगी जो इलाज के फैसले को वास्तव में बदल सके?

अपनी रिपोर्ट के साथ परामर्श का समय बुक करें। मुलाकात में PGT कराने और न कराने, दोनों विकल्पों के फायदे, सीमाएं और अगले कदम समझें। सही निर्णय वही है जो आपकी मेडिकल जरूरत, परिवार की प्राथमिकताओं और उपलब्ध विकल्पों को साथ लेकर लिया जाए।

Frequently asked questions

क्या PGT कराने के लिए माता-पिता की जेनेटिक जांच पहले जरूरी है?

यह PGT के प्रकार पर निर्भर करता है। PGT-M में परिवार की बीमारी से जुड़े जीन बदलाव की पुष्टि आमतौर पर जरूरी होती है, जबकि PGT-SR की योजना में माता-पिता की chromosome reports महत्वपूर्ण होती हैं। PGT-A से पहले हर व्यक्ति को एक जैसी जेनेटिक जांचों की जरूरत नहीं होती।

क्या पहले से फ्रीज किए हुए भ्रूणों की PGT हो सकती है?

कुछ मामलों में भ्रूण को thaw करके biopsy और फिर दोबारा freezing की जा सकती है। यह उसकी अवस्था, गुणवत्ता और लैब की व्यवस्था पर निर्भर करता है। अतिरिक्त handling के जोखिम और संभावित लाभ समझकर ही फैसला करें।

PGT-M में carrier भ्रूण और बीमारी से प्रभावित भ्रूण अलग होते हैं?

कई recessive बीमारियों में carrier भ्रूण के पास बीमारी से जुड़ी एक बदली हुई जीन कॉपी होती है, लेकिन उसे वह बीमारी होने की अपेक्षा नहीं होती। प्रभावित भ्रूण का अर्थ अलग है और यह बीमारी के inheritance pattern पर निर्भर करता है। रिपोर्ट की व्याख्या genetic counsellor से करवाएं।

क्या PGT के बाद प्राकृतिक गर्भधारण की कोशिश बंद करनी पड़ती है?

PGT कराने का निर्णय अपने-आप भविष्य में प्राकृतिक गर्भधारण को नहीं रोकता। हालांकि परिवार में वंशानुगत बीमारी का जोखिम हो तो वह प्राकृतिक गर्भधारण में भी बना रह सकता है। ऐसे में पहले से counselling और गर्भावस्था में उपयुक्त जांच की योजना जरूरी है।

अगर केवल एक भ्रूण बना है तो क्या उसकी PGT करानी चाहिए?

केवल भ्रूणों की संख्या से इसका फैसला नहीं होता। किसी गंभीर पारिवारिक बीमारी के लिए PGT-M का उद्देश्य, वैकल्पिक PGT-A से अलग हो सकता है। जांच की जरूरत, biopsy के जोखिम और परिणाम के बाद आपके विकल्पों पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

क्या PGT से ऑटिज्म या भविष्य की हर बीमारी का पता चल जाता है?

नहीं, PGT भविष्य की सभी बीमारियों, विकास संबंधी स्थितियों या क्षमताओं का अनुमान नहीं देता। कुछ स्थितियों में कई जीन और पर्यावरण दोनों की भूमिका होती है। अपनी जांच में कौन-सी खास स्थिति देखी जा रही है, यह लिखित रूप में स्पष्ट कर लें।

क्या PGT की रिपोर्ट दूसरे IVF सेंटर में दिखाई जा सकती है?

हां, दूसरी राय के लिए रिपोर्ट साझा की जा सकती है। पूरी लैब रिपोर्ट, जांच की विधि और भ्रूण की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड साथ रखें। यदि भ्रूण दूसरे केंद्र ले जाने हों तो दोनों केंद्रों की सहमति, दस्तावेज और सुरक्षित परिवहन की अलग व्यवस्था चाहिए होती है।

क्या PGT के लिए दंपती की लिखित सहमति ली जाती है?

जांच से पहले सूचित लिखित सहमति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें जांच का दायरा, सीमाएं, नमूने और भ्रूणों का प्रबंधन तथा संभावित परिणाम समझाए जाने चाहिए। जेनेटिक जानकारी की गोपनीयता और रिपोर्ट किसके साथ साझा होगी, यह भी पूछें।

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