IVF के दौरान क्या खाएं: शाकाहारी डाइट प्लान – कानपुर
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
IVF के दौरान महंगे फल या खास पाउडर से ज्यादा जरूरी है नियमित, संतुलित और सुरक्षित खाना। जानें कानपुर के घरों में आसानी से बनने वाला शाकाहारी डाइट प्लान और कब डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
IVF शुरू होते ही खाने को लेकर सलाहों की भीड़ लग जाती है—कोई अनार रोज खाने को कहता है, कोई दही बंद करवा देता है, तो कोई सिर्फ दूध और मेवे बढ़ाने की सलाह देता है। ऐसे में सवाल स्वाभाविक है: IVF के दौरान क्या खाएं: शाकाहारी डाइट प्लान – कानपुर में अपने रोजमर्रा के खाने को कैसे ढालें? अच्छी बात यह है कि सही पोषण के लिए महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं हैं। दाल, रोटी, मौसमी सब्जी, दही और फल से उपयोगी डाइट बन सकती है। भोजन शरीर की जरूरतें पूरी करने में मदद करता है, लेकिन कोई खाना IVF की सफलता या भ्रूण के इम्प्लांटेशन की गारंटी नहीं देता।
1. IVF में डाइट का असली काम क्या है?
इलाज के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल चाहिए। इंजेक्शन के दिनों में पेट भारी लगना, मितली या कब्ज हो सकती है। संतुलित भोजन और नियमित खाने का समय इन परेशानियों को संभालने में मदद कर सकते हैं। इसका मतलब दो लोगों जितना खाना या अचानक बहुत ज्यादा प्रोटीन लेना नहीं है।
अंडों और शुक्राणुओं की गुणवत्ता, उम्र, बीमारी का इतिहास और उपचार की परिस्थितियां भी परिणाम को प्रभावित करती हैं। इसलिए किसी फल से AMH बढ़ने या किसी जूस से एग क्वालिटी निश्चित रूप से सुधरने का दावा सही नहीं है। कानपुर में IVF उपचार की योजना बनाते समय अपनी सामान्य डाइट और पहले से चल रही दवाओं की जानकारी डॉक्टर को दें।
PCOS, डायबिटीज, थायरॉइड की समस्या, खून की कमी या किडनी की बीमारी हो तो इंटरनेट का सामान्य चार्ट पर्याप्त नहीं है। वजन घटाने की क्रैश डाइट, लंबे उपवास या अचानक बहुत कम कार्बोहाइड्रेट लेना खुद से शुरू न करें। WHO की संतुलित आहार संबंधी जानकारी भी विविध भोजन, फल-सब्जियों और साबुत अनाज पर जोर देती है।
2. शाकाहारी थाली में किन चीजों को जगह दें?
हर मुख्य भोजन में प्रोटीन का एक स्रोत
सिर्फ रोटी-सब्जी खाने पर प्रोटीन पीछे छूट सकता है। दाल, चना, राजमा, लोबिया, सोया, टोफू, पनीर या बिना ज्यादा चीनी वाला दही भोजन में शामिल करें। दाल से गैस होती है तो छोटी मात्रा से शुरुआत करें; भिगोकर अच्छी तरह पकाई मूंग की दाल कुछ लोगों को आसानी से पचती है।
- आयरन: दालें, चना और हरी पत्तेदार सब्जियां लें। साथ में नींबू, अमरूद या कोई अन्य विटामिन C वाला खाद्य पदार्थ आयरन के अवशोषण में मदद कर सकता है।
- कैल्शियम: दूध, दही, पनीर या कैल्शियम से फोर्टिफाइड विकल्प उपयोगी हैं। दूध न पचता हो तो उसे जबरदस्ती पीना जरूरी नहीं है।
- अच्छे फैट: थोड़े अखरोट, मूंगफली, तिल या पिसी अलसी शामिल कर सकती हैं। मेवे पौष्टिक हैं, लेकिन असीमित मात्रा में नहीं।
- फाइबर: गेहूं की रोटी, दलिया, ओट्स, फल और सब्जियां कब्ज कम करने में मदद कर सकती हैं। मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
“क्या सोया खाने से हार्मोन बिगड़ेंगे?” सामान्य भोजन की मात्रा में टोफू या सोया आम तौर पर लिया जा सकता है। इसे हाई-डोज सोया सप्लीमेंट के बराबर न समझें। एलर्जी या किसी चिकित्सकीय रोक की स्थिति में व्यक्तिगत सलाह लें।
3. कानपुर के घर के खाने से एक दिन का डाइट प्लान
यह नमूना है, तय कैलोरी वाला प्रिस्क्रिप्शन नहीं। रोटी, चावल और अन्य चीजों की मात्रा आपकी भूख, गतिविधि, वजन तथा ब्लड शुगर के अनुसार बदलेगी। किसी एक विकल्प को रोज दोहराना भी जरूरी नहीं है।
- सुबह उठकर: सामान्य पानी पिएं। मितली हो तो सादा टोस्ट या हल्का सूखा नाश्ता लेकर थोड़ी देर बाद पूरा नाश्ता करें। डिटॉक्स ड्रिंक जरूरी नहीं है।
- नाश्ता: मूंग या बेसन का चीला और दही; या सब्जियों वाला दलिया तथा दूध। पोहा पसंद हो तो उसमें मटर और मूंगफली डाल सकती हैं।
- मध्य सुबह: धुला हुआ अमरूद, संतरा, सेब या मौसमी फल। पूरे फल को जूस पर प्राथमिकता दें।
- दोपहर: रोटी या चावल, एक कटोरी दाल/राजमा/चना, पकी सब्जी और दही। सलाद तभी लें जब अच्छी तरह धुला और ताजा कटा हो।
- शाम: भुना चना, थोड़ी मूंगफली या बिना ज्यादा नमक की घर की छाछ। केवल चाय-बिस्कुट पर शाम न निकालें।
- रात: सब्जी वाली मूंग-दाल खिचड़ी और दही; या रोटी के साथ टोफू/पनीर और सब्जी। बहुत देर से भारी भोजन करने से बचें।
- सोने से पहले: भूख हो और दूध पचता हो तो थोड़ा दूध ले सकती हैं। पेट भरा हो तो अतिरिक्त खाना जरूरी नहीं है।
बजट सीमित हो तो कीवी, एवोकाडो या महंगे बीज खरीदना आवश्यक नहीं। मौसमी फल, स्थानीय सब्जियां, दाल और भुना चना व्यावहारिक विकल्प हैं।
4. इंजेक्शन, एग पिकअप और ट्रांसफर के आसपास क्या बदलें?
ओवरी स्टिमुलेशन के दिनों में
पेट फूल रहा हो तो एक बार में बहुत खाना खाने के बजाय छोटे भोजन लें। खूब तला खाना, बहुत बड़ी कटोरी राजमा या गैस वाले पेय परेशानी बढ़ाएं तो फिलहाल कम करें। पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेते रहें; हर व्यक्ति के लिए जबरन एक जैसी लीटर की मात्रा सही नहीं होती।
एग पिकअप वाले दिन
बेहोशी या सेडेशन के कारण खाने-पीने पर विशेष रोक हो सकती है। क्लिनिक के दिए फास्टिंग निर्देश ही मानें—यह सामान्य डाइट चार्ट उस समय लागू नहीं है। पानी, चाय और नियमित दवाओं के बारे में भी टीम से स्पष्ट निर्देश लें। प्रक्रिया के बाद अनुमति मिलने पर हल्के भोजन से शुरुआत करें।
एंब्रियो ट्रांसफर के बाद
“क्या अब सिर्फ खिचड़ी खाऊं?” नहीं, यदि डॉक्टर ने अलग निर्देश नहीं दिए हैं तो सामान्य संतुलित घर का खाना जारी रख सकती हैं। खास फल, केसर वाला दूध या लगातार नारियल पानी लेने से इम्प्लांटेशन सुनिश्चित नहीं होता। खाना बंद करने या केवल तरल चीजों पर रहने की भी जरूरत नहीं है।
बहुत ज्यादा प्रोटीन या नमक खाकर OHSS रोकने की कोशिश न करें। यह उपचार से जुड़ी ऐसी समस्या है जिसमें चिकित्सकीय निगरानी जरूरी हो सकती है।
5. चाय, पानी और बाहर के खाने को कैसे संभालें?
कानपुर की गर्मी में अपॉइंटमेंट और जांच के बीच पानी छूट जाना आसान है। साफ पानी की बोतल साथ रखें। प्यास और हल्का पीला पेशाब सामान्य संकेत हैं, लेकिन किडनी या दिल की बीमारी में तरल की मात्रा डॉक्टर तय करें। नारियल पानी एक विकल्प है, IVF की जरूरी दवा नहीं।
गर्भावस्था संभव होने के कारण कुल कैफीन प्रतिदिन 200 मिलीग्राम से अधिक न रखना समझदारी है, जब तक डॉक्टर अलग सलाह न दें। इसमें चाय, कॉफी, कोला और चॉकलेट की कैफीन भी शामिल है। कप का आकार और चाय की मजबूती अलग होती है, इसलिए सिर्फ कप गिनना हमेशा पर्याप्त नहीं। आयरन की गोली या आयरन वाले भोजन के साथ चाय-कॉफी न लें।
चाट या गोलगप्पे की इच्छा होना सामान्य है, लेकिन संदिग्ध पानी, खुले में रखी चटनी, कटा फल और देर तक बाहर रखा दही संक्रमण का जोखिम बढ़ाते हैं। ताजा बना गरम खाना चुनें। घर की टिक्की या उबले चने की चाट बेहतर नियंत्रित विकल्प हैं।
कच्चे अंकुरित अनाज की जगह पकाए हुए अंकुरित अनाज लें। दूध उबला या पाश्चराइज्ड हो। शराब से बचें। NHS की गर्भावस्था में भोजन-सुरक्षा संबंधी सलाह ट्रांसफर के बाद भी उपयोगी है।
6. सप्लीमेंट और ‘फर्टिलिटी फूड’ के बारे में सच
गर्भधारण की तैयारी में आम तौर पर रोज 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड की सलाह दी जाती है। कुछ महिलाओं को अधिक खुराक की जरूरत होती है, जिसे डॉक्टर तय करते हैं। पहले से प्रीनेटल टैबलेट ले रही हों तो दूसरी गोली जोड़ने से पहले उसमें मौजूद मात्रा जांचवाएं।
शाकाहारी महिलाओं, विशेषकर पूरी तरह वीगन डाइट लेने वालों में विटामिन B12 पर ध्यान देना जरूरी है। आयरन और विटामिन D की जांच या सप्लीमेंट की जरूरत इतिहास और लक्षणों के अनुसार तय हो सकती है। प्रोटीन पाउडर हर महिला को नहीं चाहिए; भोजन पर्याप्त न हो तो सुरक्षित विकल्प पर सलाह लें।
“अनार और चुकंदर रोज खाने से खून बढ़ जाएगा?” ये भोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन स्थापित एनीमिया का इलाज अकेले इनसे नहीं होता। “अनानास का बीच वाला हिस्सा खाने से भ्रूण चिपकता है?” इसका भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। किसी खास फल को अनिवार्य न बनाएं।
हर्बल काढ़े, अनजान फर्टिलिटी पाउडर और ऊंची खुराक वाले एंटीऑक्सीडेंट डॉक्टर को बताए बिना शुरू न करें। अंग्रेजी में पढ़ने के लिए हमारा related English guide भी देख सकती हैं।
7. कामकाजी दिन, परिवार की सलाह और अलग जरूरतें
सुबह जल्दी क्लिनिक जाना हो तो रात में भुना चना और धुला फल तैयार रखें। दही, दूध या पनीर लंबे समय तक गर्म बैग में न रखें; जरूरत हो तो ठंडा रखने की व्यवस्था करें। फास्टिंग का निर्देश मिला हो तो साथ रखा नाश्ता भी टीम की अनुमति के बाद ही खाएं।
परिवार से कह सकती हैं, “मुझे अलग महंगा खाना नहीं, समय पर संतुलित खाना चाहिए।” रोज मिठाई या घी खिलाना पोषण की कमी का समाधान नहीं है। कभी पसंद का खाना खा लेने पर अपराधबोध भी न पालें; पूरे सप्ताह की आदतें ज्यादा मायने रखती हैं।
PCOS या डायबिटीज में फल पूरी तरह बंद करने के बजाय उसकी मात्रा और भोजन में वितरण समझें। महिला बांझपन की जांच और देखभाल के दौरान इन जरूरतों पर चर्चा करें। साथी का संतुलित आहार और तंबाकू से बचना भी महत्वपूर्ण है; पूरी जिम्मेदारी महिला की थाली पर नहीं है।
8. डॉक्टर कब दिखाएं?
हल्का पेट फूलना और गंभीर समस्या अलग बातें हैं। नीचे दिए लक्षणों में अगली नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें:
- तेजी से बढ़ता पेट, तेज पेट दर्द या अचानक वजन बढ़ना।
- बार-बार उल्टी, पानी भी न रुकना या पेशाब स्पष्ट रूप से कम होना।
- सांस फूलना, सीने में दर्द, बेहोशी या बहुत ज्यादा चक्कर आना।
- एग पिकअप के बाद बुखार, बढ़ता दर्द या ज्यादा रक्तस्राव।
ये OHSS या दूसरी जटिलता के संकेत हो सकते हैं। तुरंत उपचार करने वाली टीम से संपर्क करें; सांस की तकलीफ या बेहोशी में नजदीकी आपातकालीन विभाग जाएं। घरेलू पेय से इलाज करने की कोशिश न करें।
लगातार कब्ज, भोजन न खा पाना, अत्यधिक कमजोरी या असामान्य ब्लड शुगर में भी सलाह लें। डाइट की समस्या बताने के लिए गंभीर हालत होने तक रुकना जरूरी नहीं है।
9. PRAVI में अपनी जरूरत के अनुसार योजना बनाएं
PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur की सेवाएं स्वरूप नगर और शारदा नगर, कानपुर, उत्तर प्रदेश में उपलब्ध हैं। दिल्ली केंद्र Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar में है। केंद्र द्वारा साझा उपलब्धियों में दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी का उल्लेख है; यह किसी व्यक्तिगत उपचार परिणाम की गारंटी नहीं है।
टीम में Dr. Monica Sachdeva, Medical Director का 18 वर्षों और Dr. Rit Shukla का 10 वर्षों का अनुभव शामिल है। Dr. Sakshi Tandon तथा Dr. Ankita, MRCOG, 6+ वर्षों के अनुभव के साथ, फर्टिलिटी विशेषज्ञ टीम का हिस्सा हैं।
अपनी रिपोर्ट, दवाओं की सूची और एक सामान्य दिन में क्या खाती हैं, इसका छोटा नोट साथ लाएं। इससे आपके लिए व्यावहारिक बदलाव समझना आसान होगा। IVF के दौरान भोजन, सप्लीमेंट या लक्षणों पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें। लक्ष्य परफेक्ट डाइट नहीं, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित देखभाल है।
Frequently asked questions
क्या IVF के दौरान व्रत रख सकती हूं?
लंबे समय तक भूखे रहने या पानी न पीने से कमजोरी और डिहाइड्रेशन हो सकता है। इलाज के चरण, दवाओं और ब्लड शुगर के अनुसार पहले डॉक्टर से बात करें। एग पिकअप के लिए दिया गया चिकित्सकीय फास्टिंग निर्देश धार्मिक व्रत से अलग है।
दूध पीने से गैस होती है तो प्रोटीन और कैल्शियम कैसे मिलेंगे?
दूध जबरदस्ती पीना जरूरी नहीं है; कुछ लोगों को दही या लैक्टोज-फ्री दूध बेहतर पचता है। दाल, टोफू और कैल्शियम से फोर्टिफाइड बिना चीनी वाला सोया पेय विकल्प हो सकते हैं। सभी पौधों से बने पेय में दूध जितना प्रोटीन नहीं होता, इसलिए लेबल देखें।
क्या IVF में रात का बचा हुआ खाना खा सकती हूं?
सही तरह जल्दी ठंडा करके फ्रिज में रखा भोजन अच्छी तरह गर्म करके लिया जा सकता है। रात भर कमरे के तापमान पर रखा भोजन, खासकर गर्मी में, न खाएं। केवल गंध से भोजन के सुरक्षित होने का पता नहीं चलता।
एंब्रियो ट्रांसफर के बाद दही और खट्टे फल बंद करने चाहिए?
केवल ‘ठंडी’ या ‘खट्टी’ चीज होने के कारण इन्हें बंद करने का वैज्ञानिक आधार नहीं है। ताजा, सुरक्षित दही और धुले फल सामान्य मात्रा में ले सकती हैं। एसिडिटी, एलर्जी या डॉक्टर की विशेष रोक हो तो उसी के अनुसार बदलाव करें।
क्या पैकेट वाला फ्रूट जूस IVF के लिए अच्छा है?
जूस IVF की सफलता बढ़ाने वाला पेय नहीं है और इसमें फाइबर पूरे फल से कम होता है। बिना अतिरिक्त चीनी वाले जूस में भी प्राकृतिक शर्करा रहती है। सामान्यतः पूरा फल बेहतर विकल्प है, खासकर ब्लड शुगर की समस्या में।
थायरॉइड की दवा के साथ दूध या आयरन ले सकती हूं?
लेवोथायरॉक्सिन जैसी दवा के अवशोषण पर भोजन, कैल्शियम और आयरन असर डाल सकते हैं। इसे लेने का समय और सप्लीमेंट से अंतर अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से स्पष्ट करें। IVF शुरू होने पर दवा खुद से बंद या उसकी खुराक न बदलें।
प्रोजेस्टेरोन लेने के बाद कब्ज हो तो क्या करूं?
पानी, पकी सब्जियां, फल और साबुत अनाज धीरे-धीरे बढ़ाएं; डॉक्टर की अनुमति के अनुसार हल्की गतिविधि भी मदद कर सकती है। खुद से हर्बल जुलाब या कैस्टर ऑयल न लें। तेज दर्द, उल्टी या लगातार कब्ज हो तो उपचार टीम से बात करें।
क्या शाकाहारी डाइट से IVF में पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है?
हां, दालों, फलियों, सोया, टोफू और जरूरत के अनुसार दूध-दही से पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है। इसे केवल रात के भोजन में रखने के बजाय दिन के अलग-अलग भोजन में बांटें। पूरी तरह वीगन डाइट में B12 और अन्य पोषक तत्वों की योजना भी जरूरी है।