ब्लास्टोसिस्ट क्या होता है – कानपुर IVF लैब
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
ब्लास्टोसिस्ट IVF में विकसित हो रहे भ्रूण का एक चरण है, गर्भधारण की गारंटी नहीं। समझें कि इसकी ग्रेडिंग, ट्रांसफर और फ्रीजिंग से जुड़े फैसले आपकी स्थिति के अनुसार कैसे लिए जाते हैं।
IVF की लैब से फोन आता है, “आपके भ्रूण को ब्लास्टोसिस्ट बनने तक देख रहे हैं।” यह सुनकर राहत भी मिलती है और सवाल भी उठते हैं: क्या भ्रूण ठीक बढ़ रहा है? क्या इंतजार करना जरूरी है? और अगर पांचवें दिन ब्लास्टोसिस्ट नहीं बना तो? ब्लास्टोसिस्ट क्या होता है – कानपुर IVF लैब से जुड़ी इस गाइड में इन्हीं बातों को आसान भाषा में समझेंगे। PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur में परामर्श के लिए आने वाले परिवारों के लिए जरूरी है कि वे रिपोर्ट के शब्दों के साथ इलाज के फैसलों का कारण भी समझें।
1. ब्लास्टोसिस्ट क्या है और यह कब बनता है?
अंडे और शुक्राणु के मिलने से फर्टिलाइजेशन होता है। सामान्य फर्टिलाइजेशन के बाद भ्रूण की कोशिकाएं बंटना शुरू करती हैं। शुरुआती दिनों में यह कुछ कोशिकाओं का समूह होता है। आगे बढ़ते हुए इसके भीतर तरल से भरी एक जगह बनती है और कोशिकाएं अलग-अलग भूमिकाओं के लिए व्यवस्थित होती हैं। इसी विकसित चरण को ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं।
यह चरण आमतौर पर फर्टिलाइजेशन के पांचवें या छठे दिन आता है। कुछ भ्रूणों को सातवें दिन तक समय लग सकता है; ऐसे भ्रूणों का इस्तेमाल लैब की नीति और व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर तय होता है। हर फर्टिलाइज्ड अंडा ब्लास्टोसिस्ट नहीं बनता। इसलिए अंडों की शुरुआती संख्या और अंत में उपलब्ध भ्रूणों की संख्या अलग होना असामान्य नहीं है।
इसके तीन हिस्से समझिए
- इनर सेल मास: कोशिकाओं का वह समूह जिससे आगे बच्चे का शरीर विकसित होता है।
- ट्रॉफेक्टोडर्म: बाहरी कोशिकाएं, जो मुख्य रूप से प्लेसेंटा यानी अपरा के निर्माण में योगदान देती हैं।
- ब्लास्टोसील: भीतर की तरल भरी जगह, जिसके बढ़ने से भ्रूण फैलता है।
ब्लास्टोसिस्ट बन जाना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि भ्रूण के सभी क्रोमोसोम सामान्य हैं या गर्भधारण निश्चित है। उसकी आगे की संभावना में गर्भाशय, अंडे की उम्र और दूसरी चिकित्सकीय स्थितियों की भी भूमिका होती है।
2. कानपुर IVF लैब में भ्रूण को कैसे देखा जाता है?
IVF उपचार में अंडे निकालने के बाद उन्हें शुक्राणुओं के साथ रखा जाता है या जरूरत होने पर ICSI से फर्टिलाइजेशन कराया जाता है। अगले दिन सामान्य फर्टिलाइजेशन के संकेत देखे जाते हैं। उसके बाद भ्रूण को नियंत्रित वातावरण वाले इनक्यूबेटर में बढ़ने दिया जाता है। तापमान, गैसों का संतुलन, कल्चर माध्यम और नमूनों की सही पहचान इस प्रक्रिया के जरूरी हिस्से हैं।
एम्ब्रायोलॉजिस्ट भ्रूण के विकास की गति और बनावट देखते हैं। जरूरत से ज्यादा बाहर निकालकर देखने के बजाय लैब अपने प्रोटोकॉल के अनुसार जांच करती है। कुछ लैब में टाइम-लैप्स जैसी तकनीक होती है, लेकिन किसी एक मशीन की मौजूदगी अपने आप बेहतर परिणाम का प्रमाण नहीं है। प्रशिक्षित टीम, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षित प्रक्रियाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
“कल इतने भ्रूण थे, आज संख्या कम क्यों है?”
कुछ भ्रूण आगे नहीं बढ़ पाते या उनका विकास रुक जाता है। इसके पीछे अंडे, शुक्राणु, क्रोमोसोम और लैब से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। केवल संख्या घटने से किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह आपकी गलती, चलने-फिरने या फोन पर बात करने का नतीजा नहीं है।
लैब अपडेट लेते समय पूछें: कितने अंडों में सामान्य फर्टिलाइजेशन हुआ, अभी कितने भ्रूण बढ़ रहे हैं और अगला अपडेट कब मिलेगा? हर दिन फोन न आने का मतलब जरूरी नहीं कि कोई समस्या हुई है; पहले से अपडेट की व्यवस्था समझ लेना चिंता कम करता है।
3. तीसरे दिन का भ्रूण या ब्लास्टोसिस्ट: किसका ट्रांसफर सही है?
तीसरे दिन के भ्रूण को क्लिवेज-स्टेज एम्ब्रियो कहा जाता है। ब्लास्टोसिस्ट तक कल्चर करने से टीम को कुछ और समय मिलता है कि कौन-से भ्रूण लगातार विकसित हो रहे हैं। इससे चुनिंदा परिस्थितियों में ट्रांसफर के लिए भ्रूण चुनना आसान हो सकता है। लेकिन लैब में अधिक दिन रखना अपने आप भ्रूण को बेहतर नहीं बनाता।
अगर भ्रूण बहुत कम हैं, तो सवाल अलग होता है: क्या आगे कल्चर करने से उपयोगी जानकारी मिलेगी, या ट्रांसफर के लिए कोई भ्रूण न बचने का जोखिम है? निर्णय में उम्र, पिछले चक्र, उपलब्ध भ्रूण, उनकी प्रगति और लैब के अनुभव को देखा जाता है। तीसरे दिन ट्रांसफर हमेशा कमतर नहीं है और पांचवें दिन ट्रांसफर सभी के लिए जरूरी नहीं है।
“क्या शरीर में डाल देते तो भ्रूण बढ़ जाता?”
जिस भ्रूण का विकास लैब में रुक गया, वह गर्भाशय में जरूर बढ़ जाता—यह दावा नहीं किया जा सकता। इसी तरह केवल ब्लास्टोसिस्ट न बनने से लैब की गलती साबित नहीं होती। ऐसे चक्र के बाद रिकॉर्ड देखकर समीक्षा करना उपयोगी है, न कि तुरंत खुद को या किसी एक कारण को दोष देना।
अच्छी सफलता दर की चर्चा आपकी जैसी परिस्थितियों और जीवित बच्चे के जन्म जैसे सार्थक परिणाम के संदर्भ में होनी चाहिए। अंग्रेजी में प्रक्रिया समझने के लिए यह related English guide भी पढ़ सकते हैं।
4. ब्लास्टोसिस्ट की ग्रेडिंग का क्या मतलब है?
रिपोर्ट में 4AA, 3AB या 4BB जैसे कोड देखकर अक्सर लगता है कि यह कोई अंतिम अंकतालिका है। दरअसल, कई लैब में इस्तेमाल होने वाली ग्रेडिंग भ्रूण की उस समय की दिखाई देने वाली बनावट का वर्णन करती है। अंक आमतौर पर उसके फैलाव या बाहरी खोल से निकलने की अवस्था बताता है। अक्षर इनर सेल मास और बाहरी कोशिकाओं की बनावट दर्शाते हैं।
अलग लैब की पद्धति या देखने के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए इंटरनेट की तस्वीर से अपनी रिपोर्ट का सीधा मिलान न करें। एक ही भ्रूण कुछ समय बाद अधिक फैला हुआ दिख सकता है; रिपोर्ट के साथ उसे देखने का दिन और समय भी मायने रखते हैं।
- अच्छी ग्रेड प्राथमिकता तय करने में मदद करती है, लेकिन गर्भधारण की गारंटी नहीं देती।
- कम ग्रेड वाले कुछ भ्रूणों से भी स्वस्थ बच्चे जन्म ले सकते हैं।
- ग्रेडिंग और आनुवंशिक जांच अलग चीजें हैं; एक दूसरे का विकल्प नहीं हैं।
“मेरा AA भ्रूण है, क्या अब चिंता खत्म?” इसका जवाब है: यह उत्साहजनक जानकारी हो सकती है, पर पूरी कहानी नहीं। चुनी हुई परिस्थितियों में PGT-A/PGS से जुड़ी सलाह उपयोगी हो सकती है, लेकिन यह हर दंपती के लिए जरूरी जांच नहीं है। इसकी सीमाएं, खर्च और भ्रूण की बायोप्सी से जुड़े पहलू समझना जरूरी है। सामान्य रिपोर्ट भी स्वस्थ बच्चे की गारंटी नहीं होती।
5. फ्रेश ट्रांसफर, फ्रीजिंग और एक भ्रूण का फैसला
ब्लास्टोसिस्ट बनने के बाद उसी चक्र में ट्रांसफर हो सकता है, या उसे फ्रीज करके बाद के चक्र में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह चुनाव केवल सुविधा का नहीं है। हार्मोन का स्तर, गर्भाशय की परत, ओवरी की प्रतिक्रिया, ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम यानी OHSS का जोखिम और किसी जांच की जरूरत योजना बदल सकते हैं।
भ्रूण फ्रीजिंग में आमतौर पर विट्रिफिकेशन तकनीक इस्तेमाल होती है। पिघलाने के बाद भ्रूण की स्थिति जांची जाती है; हर भ्रूण के सुरक्षित बने रहने की गारंटी नहीं होती। फ्रीजिंग हमेशा बेहतर या हमेशा खराब नहीं है। सही सवाल है: “मेरे मामले में अभी ट्रांसफर करने या इंतजार करने का चिकित्सकीय कारण क्या है?”
दो भ्रूण रखने से परिणाम निश्चित नहीं होता, जबकि जुड़वां गर्भावस्था का जोखिम बढ़ सकता है। जुड़वां गर्भ में समय से पहले प्रसव और मां-बच्चों की जटिलताएं अधिक हो सकती हैं। उपयुक्त मरीजों में एक ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर पर चर्चा इसी सुरक्षा को ध्यान में रखकर होती है।
फ्रीजिंग से पहले सहमति, स्टोरेज की अवधि, भविष्य में इस्तेमाल और संपर्क विवरण बदलने पर प्रक्रिया पूछ लें। खर्च दवाओं, कल्चर, फ्रीजिंग, स्टोरेज और अतिरिक्त जांच जैसे कारकों पर निर्भर करता है; व्यक्तिगत अनुमान परामर्श के बाद मिलता है। IVF की सामान्य प्रक्रिया और जोखिमों पर NHS की जानकारी उपयोगी है।
6. ट्रांसफर के दिन और उसके बाद क्या ध्यान रखें?
ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर आमतौर पर एक पतली कैथेटर से किया जाता है। प्रक्रिया अक्सर छोटी होती है और अधिकतर मामलों में बेहोशी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन व्यक्तिगत परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। क्लिनिक यदि भरा हुआ ब्लैडर रखने को कहे, तो उसी निर्देश का पालन करें। अपनी दवाओं की सूची साथ रखें।
कानपुर में ट्रैफिक, गर्मी और काम की छुट्टी को ध्यान में रखकर आने-जाने की योजना बनाएं। स्वरूप नगर या शारदा नगर में अपॉइंटमेंट लेते समय स्पष्ट पूछें कि परामर्श, जांच और प्रक्रिया किस स्थान पर होगी। उसी दिन बहुत सारे काम जोड़ने के बजाय आरामदायक समय रखें, खासकर अगर हाल में एग रिट्रीवल हुआ हो।
“क्या सीढ़ियां चढ़ने या टॉयलेट जाने से भ्रूण गिर जाएगा?”
नहीं। सामान्य चलने, खांसने या टॉयलेट जाने से भ्रूण बाहर नहीं गिरता। लंबे बेड रेस्ट की सामान्यतः जरूरत नहीं होती। फिर भी भारी व्यायाम, संभोग और यात्रा पर आपकी ओवरी की स्थिति के अनुसार अलग सलाह मिल सकती है।
प्रोजेस्टेरोन और दूसरी दवाएं निर्धारित तरीके से लें। हल्का दर्द, स्तनों में भारीपन या कोई लक्षण न होना—इनसे परिणाम पता नहीं चलता। तय तारीख से पहले घर का टेस्ट भ्रमित कर सकता है। कोई खास भोजन ब्लास्टोसिस्ट को चिपकाने की गारंटी नहीं देता; संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और तंबाकू से दूरी बेहतर आधार हैं।
7. डॉक्टर कब दिखाएं?
यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से कम है और एक साल नियमित असुरक्षित संबंध के बाद गर्भ नहीं ठहरा, तो मूल्यांकन कराएं। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में छह महीने बाद सलाह लेना उचित है; 40 से अधिक उम्र में जल्दी परामर्श लें। अनियमित पीरियड्स, ज्ञात ट्यूब की समस्या, एंडोमेट्रियोसिस, बार-बार गर्भपात या शुक्राणु की समस्या हो तो इंतजार न करें।
IVF के दौरान तेज या बढ़ता पेट दर्द, बहुत अधिक पेट फूलना, लगातार उल्टी, कम पेशाब, सांस फूलना, बुखार या ज्यादा रक्तस्राव होने पर उसी दिन चिकित्सा सहायता लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या बेहोशी हो तो नजदीकी इमरजेंसी जाएं। इन्हें सामान्य इम्प्लांटेशन के लक्षण मानकर नजरअंदाज न करें।
बार-बार भ्रूण का विकास रुकने या अच्छे दिखने वाले ब्लास्टोसिस्ट के बाद भी गर्भ न ठहरने पर व्यवस्थित समीक्षा जरूरी है। हर बार महंगी अतिरिक्त जांच या उपचार जोड़ना समाधान नहीं होता। पुरुष और महिला, दोनों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण है। WHO की बांझपन संबंधी जानकारी भी इसके अनेक संभावित कारणों को समझाती है।
8. PRAVI में परामर्श के लिए क्या लेकर आएं?
पुरानी एम्ब्रायोलॉजी रिपोर्ट, अंडों और फर्टिलाइजेशन का विवरण, ट्रांसफर की तारीखें, वीर्य जांच, अल्ट्रासाउंड और दवाओं की सूची साथ लाएं। केवल “भ्रूण कमजोर थे” कहना पर्याप्त जानकारी नहीं देता। लिखित रिकॉर्ड से समझ आता है कि अगली योजना में क्या बदलना जरूरी है और क्या नहीं।
PRAVI IVF & Fertility Centre के कानपुर स्थान स्वरूप नगर और शारदा नगर में हैं। टीम में Dr. Monica Sachdeva, Medical Director का 18 वर्षों का अनुभव, Dr. Rit Shukla का 10 वर्षों का अनुभव, Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, का 6+ वर्षों का अनुभव शामिल है। दिल्ली केंद्र Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar में है।
क्लिनिक द्वारा साझा “दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी” की जानकारी किसी व्यक्तिगत चक्र के परिणाम की गारंटी नहीं है। आपके लिए उपयोगी चर्चा आपकी रिपोर्ट, विकल्पों, संभावित जोखिमों और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित होगी।
ब्लास्टोसिस्ट रिपोर्ट को अकेले समझने की कोशिश में उलझने के बजाय अपने सवाल लिख लें। अपनी स्थिति के अनुसार ट्रांसफर और फ्रीजिंग के विकल्प समझने के लिए PRAVI में परामर्श बुक करें। सही फैसला वही है जिसका कारण आपको स्पष्ट हो और जिसमें आपकी सहमति शामिल हो।
Frequently asked questions
क्या छठे दिन बना ब्लास्टोसिस्ट इस्तेमाल किया जा सकता है?
हां, छठे दिन बने कई ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर या फ्रीजिंग के लिए उपयुक्त होते हैं। निर्णय उसकी ग्रेड, विकास और अन्य चिकित्सकीय जानकारी देखकर लिया जाता है। केवल दिन के आधार पर उसे बेकार नहीं माना जाता।
क्या ICSI कराने से सभी अंडे ब्लास्टोसिस्ट बन जाते हैं?
नहीं, ICSI में शुक्राणु को अंडे के भीतर पहुंचाया जाता है, लेकिन इससे सामान्य फर्टिलाइजेशन या आगे विकास की गारंटी नहीं मिलती। अंडे और शुक्राणु से जुड़े कारक तथा भ्रूण की जैविक क्षमता आगे की प्रगति को प्रभावित करते हैं।
क्या ब्लास्टोसिस्ट की ग्रेड देखकर बच्चे का लिंग पता चल सकता है?
नहीं, ग्रेडिंग भ्रूण की दिखाई देने वाली बनावट और विकास का आकलन है, लिंग की पहचान नहीं। भारत में गैर-चिकित्सकीय लिंग चयन प्रतिबंधित है। ग्रेडिंग का उद्देश्य उपचार के लिए भ्रूणों की प्राथमिकता तय करना है।
हैचिंग ब्लास्टोसिस्ट का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि ब्लास्टोसिस्ट अपने बाहरी आवरण, जिसे जोना पेल्यूसिडा कहते हैं, से निकलना शुरू कर रहा है। यह विकास का एक चरण है। हैचिंग दिखने का मतलब यह नहीं कि गर्भाशय में इम्प्लांटेशन हो चुका है।
अगर केवल एक भ्रूण है तो क्या उसे ब्लास्टोसिस्ट तक रखना चाहिए?
इसका एक जैसा जवाब सभी के लिए नहीं है। आगे कल्चर करने से विकास की जानकारी मिल सकती है, लेकिन ट्रांसफर के लिए भ्रूण न बचने का जोखिम भी समझना होगा। डॉक्टर और एम्ब्रायोलॉजिस्ट से शुरुआती ट्रांसफर तथा आगे कल्चर, दोनों विकल्पों का कारण पूछें।
क्या ब्लास्टोसिस्ट बनने पर PGT-A जरूरी है?
नहीं, सिर्फ ब्लास्टोसिस्ट बनने के कारण PGT-A जरूरी नहीं हो जाता। इसकी उपयोगिता उम्र, इतिहास और उपलब्ध भ्रूणों के संदर्भ में समझी जाती है। जांच की सीमाएं, बायोप्सी और अनिश्चित परिणाम की संभावना पर भी सलाह लें।
ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर के बाद हल्की स्पॉटिंग हो तो दवा रोक दें?
बिना डॉक्टर की सलाह प्रोजेस्टेरोन या दूसरी निर्धारित दवाएं न रोकें। हल्की स्पॉटिंग के कई कारण हो सकते हैं और इससे अकेले परिणाम तय नहीं होता। ज्यादा रक्तस्राव, तेज दर्द या चक्कर हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
क्या फ्रीज किए गए ब्लास्टोसिस्ट की उम्र स्टोरेज के साथ बढ़ती है?
फ्रीजिंग के दौरान भ्रूण का जैविक विकास रुका रहता है; वह सामान्य रूप से बढ़ता नहीं रहता। अंडा निकाले जाने के समय की उम्र उसकी संभावनाओं में महत्वपूर्ण रहती है, जबकि गर्भावस्था के जोखिमों पर ट्रांसफर के समय की मातृ उम्र भी असर डाल सकती है। स्टोरेज अवधि और सहमति की लागू शर्तें क्लिनिक से स्पष्ट कर लें।