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टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन क्या शुक्राणु बनना रोक सकते हैं?
हिंदी गाइड · 7 मिनट

टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन क्या शुक्राणु बनना रोक सकते हैं?

टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन कुछ पुरुषों में शुक्राणु बनना बहुत कम कर सकते हैं या रोक सकते हैं। बच्चा प्लान कर रहे हैं तो इलाज में बदलाव खुद करने के बजाय फर्टिलिटी विशेषज्ञ से जांच और आगे की योजना बनाएं।

हां, बाहर से दिए जाने वाले टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन शुक्राणु बनना बहुत कम कर सकते हैं और कुछ पुरुषों में वीर्य में शुक्राणु दिखना बंद हो सकता है। यह असर अक्सर सुधर सकता है, लेकिन सुधार में समय लगता है और हर व्यक्ति में पूरी रिकवरी की गारंटी नहीं होती। अगर आप अभी या आगे बच्चा चाहते हैं, तो इंजेक्शन शुरू करने या जारी रखने से पहले डॉक्टर को अपनी परिवार की योजना जरूर बताएं।

टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन और स्पर्म का संबंध क्या है?

टेस्टोस्टेरोन पुरुषों की सेक्स ड्राइव, मांसपेशियों, हड्डियों और कई शारीरिक कार्यों से जुड़ा हार्मोन है। शुक्राणु बनने में भी इसकी भूमिका है। इसलिए यह सोचना स्वाभाविक है कि इसका इंजेक्शन लेने से स्पर्म भी बढ़ेंगे। लेकिन शरीर के भीतर बनने वाले टेस्टोस्टेरोन और बाहर से दिए गए टेस्टोस्टेरोन का असर एक जैसा नहीं होता।

दिमाग की पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाले LH और FSH हार्मोन अंडकोष को काम करने का संकेत देते हैं। LH की मदद से अंडकोष के भीतर टेस्टोस्टेरोन बनता है, जहां शुक्राणु उत्पादन के लिए इसकी काफी अधिक स्थानीय मात्रा चाहिए। FSH भी इस प्रक्रिया को सहारा देता है।

जब इंजेक्शन से टेस्टोस्टेरोन मिलता है, तो दिमाग को संकेत जाता है कि शरीर में पर्याप्त हार्मोन मौजूद है। इससे LH और FSH का निकलना दब सकता है। खून में टेस्टोस्टेरोन सामान्य या अधिक दिखने के बावजूद अंडकोष के भीतर इसकी जरूरी मात्रा घट सकती है और शुक्राणु बनना प्रभावित हो सकता है।

ताकत और इच्छा बढ़ रही हो, तब भी स्पर्म घट सकते हैं?

जी हां। कुछ पुरुषों को इलाज के बाद ऊर्जा, सेक्स ड्राइव या इरेक्शन में सुधार महसूस होता है। इससे यह भरोसा बन जाता है कि प्रजनन क्षमता भी बेहतर होगी। वास्तव में यौन प्रदर्शन और शुक्राणु उत्पादन अलग बातें हैं।

वीर्य की मात्रा सामान्य दिख सकती है और स्खलन भी पहले जैसा हो सकता है, फिर भी उसमें शुक्राणु बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकते। वीर्य का अधिकांश तरल अलग ग्रंथियों से आता है; उसे देखकर स्पर्म काउंट का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

  • शुक्राणु बहुत कम होने को ओलिगोजूस्पर्मिया कहा जाता है।
  • वीर्य में शुक्राणु नहीं मिलने की स्थिति एजूस्पर्मिया कहलाती है।
  • इन स्थितियों का पता सीमेन एनालिसिस से चलता है, केवल लक्षणों से नहीं।

क्या यह जोखिम सिर्फ इंजेक्शन से होता है?

नहीं। बाहर से मिलने वाले टेस्टोस्टेरोन के दूसरे रूप, जैसे जेल या कुछ अन्य तैयारियां, भी शुक्राणु उत्पादन दबा सकती हैं। जिम में मांसपेशियां बढ़ाने के लिए लिए जाने वाले एनाबॉलिक स्टेरॉयड से भी ऐसा हो सकता है। जोखिम दवा, मात्रा, अवधि और व्यक्ति की पहले की प्रजनन स्थिति पर निर्भर करता है।

आप कोई ‘टेस्टोस्टेरोन बूस्टर’, बॉडीबिल्डिंग सप्लीमेंट या हार्मोन वाला उत्पाद ले रहे हैं? उसकी पैकिंग या तस्वीर डॉक्टर को दिखाएं। कुछ उत्पादों के लेबल अधूरे होते हैं या उनमें ऐसे घटक हो सकते हैं जिनकी जानकारी आपको न हो। इसमें शर्म की कोई बात नहीं; सही जानकारी से सुरक्षित इलाज तय करने में मदद मिलती है।

टेस्टोस्टेरोन कम हो तो क्या इंजेक्शन गलत इलाज है?

हर स्थिति में नहीं। सही जांच से पुष्टि हुए टेस्टोस्टेरोन की कमी के लिए कुछ पुरुषों को यह उपचार दिया जाता है। लेकिन केवल थकान, कमजोरी या एक रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू करना उचित नहीं। नींद की कमी, मोटापा, तनाव और दूसरी बीमारियों से भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं।

कमी की पुष्टि के लिए आमतौर पर लक्षणों के साथ अलग दिनों में सुबह लिए गए टेस्टोस्टेरोन के परिणाम देखे जाते हैं। रिपोर्ट की व्याख्या स्वास्थ्य की पूरी जानकारी के साथ होनी चाहिए।

जो पुरुष अभी या भविष्य में संतान चाहते हैं, उनमें बाहर से टेस्टोस्टेरोन देने का फैसला विशेष सावधानी मांगता है। पुरुष बांझपन के इलाज या स्पर्म बढ़ाने के लिए टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन देना सही उपाय नहीं है। इलाज लिखने वाले डॉक्टर को अपनी फर्टिलिटी की इच्छा पहले बताना बेहतर रहता है।

अगर इंजेक्शन पहले से चल रहे हैं तो क्या करें?

घबराकर खुद दवा बंद करना, मात्रा घटाना या कोई नई ‘रिकवरी दवा’ जोड़ना ठीक नहीं। डॉक्टर की देखरेख में टेस्टोस्टेरोन रोकने या उपचार बदलने की जरूरत हो सकती है। साथ ही यह देखना जरूरी है कि वह मूल समस्या क्या थी, जिसके लिए इलाज शुरू हुआ था।

कानपुर में परामर्श के लिए आते समय पुरानी रिपोर्ट, दवा की पर्ची और इंजेक्शन की तारीखें साथ ले आएं। दवा किसी जिम या ऑनलाइन सलाह से ली थी, तो यह भी साफ बताएं। डॉक्टर का काम मदद करना है, दोष देना नहीं।

  • दवा का नाम, मात्रा और कितने समय से ले रहे हैं, लिख लें।
  • पहले कभी सीमेन टेस्ट हुआ हो तो उसकी रिपोर्ट लाएं।
  • बताएं कि बच्चा अभी चाहिए या कुछ वर्षों बाद।
  • अंडकोष की चोट, ऑपरेशन, संक्रमण और अन्य दवाओं की जानकारी दें।

PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में पुरुष बांझपन से जुड़ी जांच और परामर्श के दौरान इन बातों के आधार पर आगे की दिशा समझी जा सकती है।

कौन-सी जांच काम आती हैं?

सीमेन एनालिसिस

इस जांच में शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट देखी जाती है। नमूना देने से पहले लैब के निर्देश मानें; आमतौर पर दो से सात दिन तक स्खलन से परहेज बताया जाता है। पूरा नमूना देना जरूरी है। कुछ हिस्सा छूट जाए तो लैब को बताएं, क्योंकि इससे परिणाम प्रभावित हो सकता है।

एक असामान्य रिपोर्ट हमेशा अंतिम निष्कर्ष नहीं होती। जरूरत के अनुसार जांच दोहराई जाती है। शुक्राणु न मिलने पर लैब में अतिरिक्त जांच से इसकी पुष्टि की जा सकती है। केवल रिपोर्ट देखकर यह मान लेना सही नहीं कि प्राकृतिक गर्भधारण हमेशा के लिए असंभव हो गया है।

हार्मोन और शारीरिक मूल्यांकन

डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन, LH और FSH की जांच सुझा सकते हैं। कुछ स्थितियों में अन्य जांच की जरूरत होती है। हार्मोन संबंधी जांच का चुनाव लक्षणों, दवा के इस्तेमाल और शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जाता है; हर व्यक्ति को हर टेस्ट नहीं चाहिए।

एजूस्पर्मिया की वजह केवल इंजेक्शन ही हो, यह मानना भी ठीक नहीं। पहले से मौजूद अंडकोष की समस्या, रुकावट या अन्य कारणों का मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।

दवा रोकने के बाद स्पर्म वापस कब बनते हैं?

डॉक्टर की निगरानी में बाहरी टेस्टोस्टेरोन बंद होने के बाद शरीर के हार्मोन संकेत और शुक्राणु उत्पादन धीरे-धीरे लौट सकते हैं। कई पुरुषों में इसमें कई महीने लगते हैं। कुछ में एक साल या उससे भी अधिक समय लग सकता है।

लंबे समय तक इस्तेमाल, पहले से कम स्पर्म काउंट और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं। हर व्यक्ति का समय अलग होता है। इसी वजह से अगले महीने की किसी तय तारीख तक सुधार का भरोसा देना सही नहीं होगा।

नियमित अंतराल पर सीमेन टेस्ट और जरूरत के अनुसार हार्मोन जांच से प्रगति देखी जाती है। खून में टेस्टोस्टेरोन ठीक हो जाना अपने आप यह साबित नहीं करता कि स्पर्म भी पर्याप्त बन रहे हैं।

क्या फर्टिलिटी बचाने वाले उपचार उपलब्ध हैं?

कुछ चुनिंदा स्थितियों में विशेषज्ञ ऐसी दवाएं इस्तेमाल कर सकते हैं जो शरीर के अपने हार्मोन संकेतों को सहारा दें। इनमें hCG, कुछ मामलों में FSH या अन्य हार्मोन-आधारित विकल्प शामिल हो सकते हैं। कुछ दवाओं का उपयोग स्वीकृत लेबल से अलग चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए होता है, इसलिए निगरानी जरूरी है।

ये सभी पुरुषों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हैं। इंटरनेट से ‘पोस्ट-साइकिल थेरेपी’ देखकर दवा लेना नुकसान पहुंचा सकता है। उपचार कारण, रिपोर्ट और दंपति के उपलब्ध समय के अनुसार चुना जाता है।

यदि शुक्राणु उपलब्ध हों और आगे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका हो, तो स्पर्म फ्रीजिंग पर चर्चा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर IVF या ICSI उपचार पर भी विचार होता है। लेकिन ICSI शुक्राणु बनना शुरू नहीं कराता; यह उपलब्ध शुक्राणु से अंडे के निषेचन में मदद करने की तकनीक है।

बच्चा प्लान करते समय दोनों का समय ध्यान में रखें

टेस्टोस्टेरोन इस्तेमाल का इतिहास हो तो गर्भधारण में देरी की जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार करना जरूरी नहीं। महिला साथी की उम्र, पीरियड्स और प्रजनन स्वास्थ्य का मूल्यांकन भी साथ होना चाहिए। केवल पुरुष की रिपोर्ट सुधरने की प्रतीक्षा में दूसरे जरूरी पहलू छूटने नहीं चाहिए।

एक और बात: कम स्पर्म काउंट के बावजूद गर्भधारण संभव हो सकता है। टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन भरोसेमंद गर्भनिरोधक नहीं हैं। अभी गर्भ नहीं चाहिए तो डॉक्टर से उपयुक्त गर्भनिरोधक पर सलाह लें।

टेस्टोस्टेरोन ले रहे हैं और परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं? PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर, उत्तर प्रदेश में अपनी रिपोर्ट के साथ परामर्श का समय लें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें। मिलकर आपकी स्थिति के अनुसार अगला कदम तय किया जा सकता है।

Frequently asked questions

क्या टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन लेने वाले हर पुरुष के स्पर्म बंद हो जाते हैं?

नहीं, असर हर व्यक्ति में अलग होता है। किसी में शुक्राणुओं की संख्या घटती है, जबकि किसी में वीर्य में शुक्राणु नहीं मिलते। स्थिति जानने के लिए सीमेन एनालिसिस जरूरी है।

क्या सामान्य सेक्स ड्राइव का मतलब स्पर्म काउंट भी सामान्य है?

नहीं। सेक्स ड्राइव और इरेक्शन ठीक होने के बावजूद स्पर्म काउंट कम हो सकता है। वीर्य की मात्रा या उसके दिखने से भी शुक्राणुओं की संख्या का पता नहीं चलता।

टेस्टोस्टेरोन बंद करने के बाद स्पर्म लौटने में कितना समय लगता है?

रिकवरी में कई महीने लग सकते हैं और कुछ पुरुषों में एक साल या उससे अधिक समय लगता है। पहले की फर्टिलिटी, इस्तेमाल की अवधि और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां असर डालती हैं। पूरी रिकवरी की गारंटी नहीं दी जा सकती।

क्या टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन को गर्भनिरोधक मान सकते हैं?

नहीं। यह भरोसेमंद गर्भनिरोधक नहीं है। शुक्राणु कम होने पर भी गर्भधारण हो सकता है, इसलिए गर्भ नहीं चाहिए तो उपयुक्त गर्भनिरोधक इस्तेमाल करें।

बच्चा प्लान कर रहे हैं तो क्या इंजेक्शन खुद बंद कर देना चाहिए?

खुद इलाज में बदलाव करने के बजाय दवा लिखने वाले डॉक्टर और फर्टिलिटी विशेषज्ञ से जल्द बात करें। आपकी मूल बीमारी, हार्मोन रिपोर्ट और सीमेन जांच देखकर दवा रोकने या विकल्प चुनने की योजना बनाई जा सकती है।

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