भारत में सरोगेसी के नियम (2021 कानून) – कानपुर
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
सरोगेसी के लिए केवल मेडिकल जरूरत होना पर्याप्त नहीं है; कानूनी पात्रता, जरूरी प्रमाणपत्र और सरोगेट महिला की सुरक्षा भी अहम हैं। कानपुर में प्रक्रिया समझने वाले परिवारों के लिए यह गाइड 2021 के कानून और बाद के महत्वपूर्ण बदलावों को आसान भाषा में समझाती है।
“डॉक्टर, अगर मैं खुद गर्भ नहीं रख सकती, तो क्या सरोगेसी से हमारा बच्चा हो सकता है?” इस सवाल में उम्मीद भी होती है और कई चिंताएं भी। भारत में सरोगेसी के नियम (2021 कानून) – कानपुर में इन्हें समझने के लिए मेडिकल जरूरत और कानूनी पात्रता को अलग-अलग देखना जरूरी है। Surrogacy (Regulation) Act, 2021, उसके तहत बने नियम और बाद के संशोधन तय करते हैं कि कौन इस प्रक्रिया में जा सकता है, कौन सरोगेट बन सकती है और किन मंजूरियों की जरूरत होगी। यह गाइड शुरुआती समझ देती है; व्यक्तिगत निर्णय से पहले संबंधित प्राधिकरण से वर्तमान नियमों की पुष्टि जरूरी है।
1. सरोगेसी क्या है और 2021 का कानून क्या बदलता है?
सरोगेसी में एक महिला किसी पात्र व्यक्ति या दंपती के लिए गर्भ धारण करती है और जन्म के बाद बच्चा इच्छुक माता-पिता को सौंपा जाता है। भारत में अनुमत व्यवस्था gestational surrogacy है: IVF से तैयार भ्रूण सरोगेट के गर्भाशय में रखा जाता है। सरोगेट महिला अपने अंडाणु नहीं दे सकती। इसलिए गर्भ धारण करने वाली महिला और बच्चे का आनुवंशिक संबंध जरूरी नहीं होता।
कानून का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि सरोगेट महिला और बच्चे को शोषण से बचाना भी है। व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है। सरोगेसी सेवा देने वाले संस्थान का इस काम के लिए अलग से पंजीकृत होना जरूरी है; केवल IVF सुविधा होना पर्याप्त नहीं है।
परोपकारी और व्यावसायिक सरोगेसी में अंतर
परोपकारी, यानी altruistic surrogacy में गर्भ धारण करने के बदले सरोगेट को भुगतान या आर्थिक पुरस्कार नहीं दिया जा सकता। कानून के अनुसार अनुमत मेडिकल खर्च, निर्धारित अन्य खर्च और बीमा की व्यवस्था अलग विषय हैं। किसी एजेंट को पैसे देकर महिला “तय करना” वैध प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
मूल कानून देखने के लिए India Code पर Surrogacy (Regulation) Act, 2021 खोज सकते हैं। केवल पुराने ऑनलाइन लेखों पर निर्भर न रहें; नियमों और अधिसूचनाओं को भी साथ पढ़ना जरूरी है।
2. कौन पात्र है: उम्र, वैवाहिक स्थिति और मेडिकल जरूरत
सामान्य कानूनी श्रेणी में इच्छुक दंपती भारतीय, कानूनी रूप से विवाहित पुरुष और महिला होते हैं। पात्रता प्रमाणपत्र के समय महिला की उम्र 23–50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26–55 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य कानूनी शर्तें और सरोगेसी की प्रमाणित मेडिकल जरूरत पूरी होना आवश्यक है।
- जीवित संतान: सामान्यतः दंपती की पहले से कोई जीवित संतान नहीं होनी चाहिए, चाहे जन्म से, गोद ली गई या सरोगेसी से हो।
- सीमित अपवाद: मौजूदा संतान को कानून में वर्णित गंभीर शारीरिक या मानसिक अक्षमता अथवा स्थायी उपचार न होने वाली जानलेवा बीमारी हो, तो जिला मेडिकल बोर्ड के अनुमोदन सहित अपवाद लागू हो सकता है।
- अकेली महिला की निर्धारित श्रेणी: 35–45 वर्ष की भारतीय विधवा या तलाकशुदा महिला अलग कानूनी श्रेणी में पात्र हो सकती है।
- अन्य परिस्थितियां: अविवाहित महिला, अकेले पुरुष या समान-लिंग दंपती को इस कानून में सामान्य पात्र श्रेणी नहीं माना गया है।
“हमारी शादी को पांच साल नहीं हुए, क्या पहले इंतजार करना पड़ेगा?” लागू 2021 अधिनियम में सभी दंपतियों के लिए पांच साल की शादी की सामान्य शर्त नहीं है। पुराने प्रस्तावों और मौजूदा कानून में अंतर समझना जरूरी है।
गर्भाशय का न होना, उसे ऑपरेशन में हटाया जाना या गर्भावस्था से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम जैसी स्थितियों में सरोगेसी पर विचार हो सकता है। कम AMH, उम्र बढ़ना या IVF असफल होना अपने-आप कानूनी पात्रता नहीं बनाता। विदेश में रहने, OCI स्थिति या नागरिकता संबंधी मामले में अलग कानूनी जांच कराएं।
3. सरोगेट महिला के अधिकार और सुरक्षा की शर्तें
सरोगेट महिला की सुरक्षा प्रक्रिया का केंद्र है, कोई औपचारिकता नहीं। उसे गर्भावस्था, दवाओं, प्रसव और संभावित जटिलताओं को समझकर स्वतंत्र सहमति देनी चाहिए। परिवार का दबाव या आर्थिक मजबूरी उसकी वास्तविक सहमति का स्थान नहीं ले सकती।
- प्रक्रिया के लिए निर्धारित समय पर उसकी उम्र 25–35 वर्ष होनी चाहिए।
- वह कभी विवाहित रही हो और उसका अपना बच्चा हो।
- जीवन में केवल एक बार सरोगेट बनने की अनुमति है; मेडिकल प्रयासों की सीमा भी नियमों के अधीन है।
- उसकी मेडिकल और मनोवैज्ञानिक फिटनेस का प्रमाणपत्र जरूरी है।
- वह इस प्रक्रिया में अपने अंडाणु नहीं दे सकती।
“क्या केवल हमारी सगी रिश्तेदार ही सरोगेट बन सकती है?” मौजूदा कानून में करीबी रिश्तेदार होना सार्वभौमिक अनिवार्य शर्त नहीं है। फिर भी किसी परिचित महिला की सहमति भर से प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती; उसकी पात्रता और सभी जरूरी प्रमाणपत्र जांचे जाएंगे।
भ्रूण प्रत्यारोपण से पहले सरोगेट महिला अपनी सहमति वापस ले सकती है। गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय इच्छुक माता-पिता अकेले नहीं ले सकते; इसमें महिला की लिखित सहमति, संबंधित प्राधिकरण की अनुमति और लागू गर्भसमापन कानून का पालन जरूरी है। जन्म के बाद बच्चे को बीमारी, दिव्यांगता, लिंग या एक से अधिक बच्चे होने जैसे कारणों से छोड़ा नहीं जा सकता।
4. कानपुर में प्रक्रिया: परामर्श से जरूरी मंजूरियों तक
कानपुर में शुरुआत रिपोर्टों की व्यवस्थित समीक्षा से करें, न कि किसी एजेंट की सूची से। सरोगेसी संबंधी परामर्श का पहला उद्देश्य यह समझना होना चाहिए कि गर्भ धारण करना क्यों संभव या सुरक्षित नहीं है। सलाह मिलना और प्रक्रिया के लिए कानूनी मंजूरी मिलना अलग बातें हैं।
आम तौर पर किन चरणों की जरूरत होती है?
- मेडिकल समीक्षा: पुराने ऑपरेशन, गर्भावस्था और IVF रिकॉर्ड देखकर दूसरे सुरक्षित विकल्पों का मूल्यांकन।
- जिला मेडिकल बोर्ड का प्रमाणपत्र: कानून के अनुसार सरोगेसी की मेडिकल जरूरत की पुष्टि।
- पात्रता और आवश्यकतानुसार प्रमाणपत्र: इच्छुक माता-पिता तथा सरोगेट महिला के लिए संबंधित Appropriate Authority से जरूरी प्रमाणपत्र।
- न्यायिक आदेश: प्रथम श्रेणी या उससे ऊपर के मजिस्ट्रेट से बच्चे के माता-पिता होने और अभिरक्षा संबंधी आदेश।
- बीमा और सहमति: सरोगेट के लिए नियमों के अनुरूप 36 महीने का बीमा, लिखित सहमति और अन्य अनिवार्य दस्तावेज।
- पंजीकृत केंद्र में उपचार: जरूरी मंजूरियां पूरी होने के बाद ही मेडिकल प्रक्रिया की योजना।
पहली मुलाकात पर पहचान, उम्र, नागरिकता और वैवाहिक स्थिति के दस्तावेज, पुरानी रिपोर्ट तथा मौजूदा संतान से जुड़ी प्रासंगिक जानकारी रखें। विधवा या तलाकशुदा महिला को अपनी स्थिति के संबंधित दस्तावेज भी देने पड़ेंगे। अंतिम सूची प्राधिकरण से लें।
उत्तर प्रदेश में संबंधित कार्यालय, आवेदन व्यवस्था और मेडिकल बोर्ड की वर्तमान जानकारी आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें। सभी प्रमाणपत्र एक ही क्लिनिक जारी नहीं करता। काम से छुट्टी, जांच और अलग-अलग कार्यालयों के दौरे का समय रखें; किसी निश्चित तारीख तक मंजूरी की गारंटी नहीं दी जा सकती।
5. डोनर अंडाणु या स्पर्म: 2024 का बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
डोनर संबंधी नियमों पर इंटरनेट में अलग-अलग जवाब मिलने की एक वजह नियमों में बदलाव है। फरवरी 2024 के संशोधन के अनुसार, इच्छुक दंपती में किसी एक को मेडिकल कारण से डोनर gamete की जरूरत हो, और जिला मेडिकल बोर्ड इसकी पुष्टि करे, तो निर्धारित शर्तों के साथ इसकी अनुमति हो सकती है। बच्चे के लिए कम-से-कम एक gamete इच्छुक दंपती में से किसी एक का होना जरूरी है।
सरल शब्दों में, पात्र दंपती के मामले में मेडिकल जरूरत प्रमाणित होने पर डोनर अंडाणु के साथ पति का स्पर्म, या पत्नी के अंडाणु के साथ डोनर स्पर्म संभव हो सकता है। दोनों के gametes डोनर से लेकर सरोगेसी करना इस व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
“मेरे अंडाणु इस्तेमाल नहीं हो सकते, तो क्या अब सरोगेसी संभव है?” इसका जवाब आपकी वैवाहिक श्रेणी, मेडिकल स्थिति, दूसरे साथी के gamete की उपलब्धता और बोर्ड के प्रमाणन पर निर्भर होगा। डोनर विकल्पों की जानकारी लेना उपयोगी है, लेकिन सामान्य donor IVF और सरोगेसी के नियम एक जैसे न मानें।
विधवा या तलाकशुदा इच्छुक महिला के लिए अपने अंडाणु और डोनर स्पर्म का नियम लागू है। दंपती को मिली सशर्त डोनर छूट को इस श्रेणी पर स्वतः लागू नहीं किया जा सकता। अंग्रेजी में समझने के लिए यह related English guide भी पढ़ सकते हैं।
6. क्या सरोगेसी ही सही विकल्प है? खर्च और भावनात्मक तैयारी
कई लोग लंबे इलाज के बाद थककर सरोगेसी पूछते हैं। लेकिन अंडाणु बनने में समस्या, स्पर्म की परेशानी और गर्भाशय में गर्भ न टिक पाना अलग स्थितियां हैं। सरोगेसी हर तरह की निःसंतानता का अगला कदम नहीं है। पहले यह पहचानना जरूरी है कि कठिनाई भ्रूण बनने में है या गर्भ सुरक्षित रखने में।
कुछ मामलों में IVF उपचार की समीक्षा, पहले के भ्रूणों की जानकारी या गर्भाशय की जांच से दूसरी योजना बन सकती है। हर जांच सभी को नहीं चाहिए। निःसंतानता की व्यापक जानकारी के लिए WHO की जानकारी उपयोगी है, लेकिन वह भारतीय कानूनी पात्रता तय नहीं करती।
“परोपकारी है, तो क्या इसमें खर्च नहीं होगा?” खर्च फिर भी होता है। जांच, IVF, दवाएं, अनुमत मेडिकल खर्च, बीमा, गर्भावस्था की देखभाल और दस्तावेजी जरूरतें कुल खर्च को प्रभावित करती हैं। व्यक्तिगत अनुमान परामर्श और कानूनी आवश्यकताओं की समीक्षा के बाद ही बनता है। खर्च में क्या शामिल है और क्या अलग, यह लिखित रूप में पूछें।
भावनात्मक तैयारी भी जरूरी है। दंपती और सरोगेट के बीच संपर्क, निजी जानकारी की सुरक्षा, गर्भावस्था के फैसलों और प्रसव के बाद सहयोग पर पहले बात करें। अच्छी सफलता दर की चर्चा के साथ जोखिम और सीमाएं भी समझें; कोई केंद्र गर्भावस्था या स्वस्थ बच्चे की गारंटी नहीं दे सकता।
7. डॉक्टर कब दिखाएं और पहली मुलाकात में क्या पूछें?
यदि गर्भाशय जन्म से नहीं है, ऑपरेशन में हट चुका है, या किसी विशेषज्ञ ने गर्भावस्था को गंभीर जोखिम बताया है, तो फर्टिलिटी परामर्श जल्दी लें। बार-बार गर्भपात या कई असफल भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद भी समीक्षा उपयोगी है, लेकिन इससे सीधे सरोगेसी की जरूरत सिद्ध नहीं होती।
सामान्यतः महिला की उम्र 35 वर्ष से कम हो और एक वर्ष प्रयास के बाद गर्भ न ठहरे, या 35 वर्ष और उससे अधिक हो तथा छह महीने में गर्भ न ठहरे, तो डॉक्टर से मिलें। उम्र 40 से अधिक होने, अनियमित पीरियड्स या पहले से ज्ञात प्रजनन समस्या में इंतजार न करें।
अपनी नोटबुक में ये सवाल लिख लें
- मेरे मामले में सरोगेसी की मेडिकल वजह क्या है, और दूसरे विकल्प कौन-से हैं?
- कौन-सी पुरानी रिपोर्ट काम आएगी और कौन-सी जांच दोहरानी जरूरी है?
- किस प्राधिकरण से कौन-सा प्रमाणपत्र लेना होगा?
- प्रक्रिया करने वाले केंद्र का सरोगेसी पंजीकरण कैसे सत्यापित करूं?
- बीमा, जटिलताओं की देखभाल और जन्म के बाद की जिम्मेदारी कैसे तय होगी?
अपने साथी को साथ लाना उपयोगी हो सकता है। परिवार का सहयोग लें, लेकिन मेडिकल जानकारी किसके साथ साझा करनी है, यह सोचकर तय करें। दबाव में किसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर न करें।
8. PRAVI में जानकारी के साथ अगला कदम चुनें
PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur के Swaroop Nagar और Shardha Nagar केंद्रों में फर्टिलिटी परामर्श के लिए अपनी रिपोर्ट लेकर आ सकते हैं। दिल्ली में Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar स्थित है। सरोगेसी के बारे में पूछते समय स्पष्ट करें कि आपको मेडिकल मूल्यांकन चाहिए, पात्रता की शुरुआती समझ चाहिए या संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचने की जानकारी।
टीम में Dr. Monica Sachdeva, Medical Director का 18 वर्षों का अनुभव, Dr. Rit Shukla का 10 वर्षों का अनुभव, Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, का 6+ वर्षों का अनुभव शामिल है। क्लिनिक द्वारा साझा अनुभव में दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी का उल्लेख है; यह किसी व्यक्ति के उपचार परिणाम का वादा नहीं है।
परामर्श लेने का अर्थ सरोगेसी शुरू करना नहीं है। पहले सही कारण, उपलब्ध विकल्प और कानूनी स्थिति समझना बेहतर है। व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी पुरानी रिपोर्ट साथ रखें। उपचार शुरू करने से पहले नवीनतम नियम, जरूरी मंजूरियां और सेवा देने वाले संस्थान का पंजीकरण जरूर सत्यापित करें।
Frequently asked questions
क्या कानपुर में सरोगेसी के लिए अलग कानून लागू होता है?
कानपुर में भी भारत का Surrogacy (Regulation) Act, 2021 और संबंधित नियम लागू होते हैं। उत्तर प्रदेश में आवेदन, मेडिकल बोर्ड और संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचने की प्रशासनिक व्यवस्था की वर्तमान जानकारी अलग से जांचनी होगी।
क्या कानूनी रूप से बच्चा गोद होने पर भी सरोगेसी की पात्रता मिल सकती है?
गोद ली गई जीवित संतान भी सामान्य पात्रता शर्त में गिनी जाती है। कानून में वर्णित गंभीर अक्षमता या बीमारी वाले सीमित अपवाद में जिला मेडिकल बोर्ड के अनुमोदन सहित समीक्षा संभव हो सकती है।
क्या कम AMH की रिपोर्ट सरोगेसी का प्रमाणपत्र पाने के लिए पर्याप्त है?
नहीं, कम AMH मुख्यतः अंडाशय में अंडाणुओं के भंडार का संकेत देता है; यह अपने-आप गर्भ धारण न कर सकने का प्रमाण नहीं है। सरोगेसी की मेडिकल जरूरत का अलग मूल्यांकन और निर्धारित प्रमाणन जरूरी है।
क्या अपने अंडाणु न होने पर विधवा महिला डोनर अंडाणु से सरोगेसी करा सकती है?
विधवा या तलाकशुदा इच्छुक महिला की निर्धारित श्रेणी में अपने अंडाणु और डोनर स्पर्म का नियम लागू है। दंपतियों के लिए उपलब्ध सशर्त डोनर gamete छूट इस श्रेणी पर स्वतः लागू नहीं होती। इसलिए व्यक्तिगत मेडिकल और कानूनी परामर्श जरूरी है।
क्या सरोगेट महिला भ्रूण प्रत्यारोपण से पहले मना कर सकती है?
हां, वह भ्रूण प्रत्यारोपण से पहले अपनी सहमति वापस ले सकती है। परिवार की सहमति या पहले हुई तैयारी उसके इस अधिकार को समाप्त नहीं करती।
क्या सामान्य IVF पंजीकरण वाला केंद्र सरोगेसी भी कर सकता है?
केवल IVF या ART पंजीकरण सरोगेसी सेवा देने के लिए पर्याप्त नहीं है। सरोगेसी प्रक्रिया करने वाले संस्थान का संबंधित कानून के तहत अलग पंजीकरण सत्यापित करना चाहिए।
सरोगेट के लिए 36 महीने का बीमा क्यों जरूरी है?
यह कानून के तहत आवश्यक सुरक्षा का हिस्सा है, जिससे गर्भावस्था और प्रसव के बाद की संबंधित स्वास्थ्य जरूरतों के लिए निर्धारित कवरेज उपलब्ध हो। बीमा पॉलिसी का प्रकार, कवरेज और शर्तें लागू नियमों के अनुरूप जांचनी चाहिए।
क्या एजेंट का समझौता जरूरी सरकारी मंजूरियों की जगह ले सकता है?
नहीं, निजी समझौता मेडिकल बोर्ड के प्रमाणपत्र, संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी या आवश्यक न्यायिक आदेश का विकल्प नहीं है। भुगतान लेकर सरोगेट उपलब्ध कराने के प्रस्ताव में व्यावसायिक सरोगेसी और शोषण का जोखिम हो सकता है। किसी भी व्यवस्था से पहले स्वतंत्र कानूनी सलाह लें।