एक अंडकोष होने पर क्या पिता बन सकते हैं?
एक स्वस्थ अंडकोष भी पिता बनने के लिए पर्याप्त शुक्राणु बना सकता है। जानिए कब प्राकृतिक गर्भधारण संभव है, कौन-सी जांच जरूरी है और किन स्थितियों में इलाज मदद कर सकता है।
हाँ, एक अंडकोष से बच्चा हो सकता है, यदि बचा हुआ अंडकोष स्वस्थ है और पर्याप्त संख्या में अच्छी गुणवत्ता वाले शुक्राणु बना रहा है। कई पुरुष एक अंडकोष के साथ प्राकृतिक रूप से पिता बन सकते हैं; केवल अंडकोष की संख्या देखकर प्रजनन क्षमता का फैसला नहीं किया जा सकता। सही जानकारी के लिए जरूरत पड़ने पर वीर्य की जांच, यानी semen analysis, कराई जाती है।
एक अंडकोष होने की बात मन में कई सवाल ला सकती है: क्या शादीशुदा जीवन सामान्य रहेगा, क्या बच्चा होने में परेशानी आएगी, क्या IVF जरूरी होगा? ऐसी चिंता स्वाभाविक है। लेकिन किसी रिश्तेदार की राय या इंटरनेट की अधूरी जानकारी को अपना भविष्य न मानें। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है।
एक स्वस्थ अंडकोष कैसे पर्याप्त हो सकता है?
अंडकोष के दो मुख्य काम हैं: शुक्राणु बनाना और testosterone हार्मोन का उत्पादन करना। Testosterone यौन इच्छा, मांसपेशियों और शरीर के कई दूसरे कामों से जुड़ा है। यदि एक अंडकोष नहीं है या काम नहीं करता, तो दूसरा स्वस्थ अंडकोष अक्सर शरीर की जरूरत के अनुसार काम कर सकता है।
इसलिए एक अंडकोष होने का मतलब न तो अनिवार्य रूप से कम testosterone है, न ही बांझपन। सेक्स की इच्छा, इरेक्शन और स्खलन भी सामान्य रह सकते हैं। हालांकि, सामान्य इरेक्शन या दिखने में सामान्य वीर्य यह साबित नहीं करता कि शुक्राणुओं की संख्या और गति भी ठीक है। इसका आकलन जांच से होता है।
एक अंडकोष होने की वजह क्यों जानना जरूरी है?
डॉक्टर केवल यह नहीं पूछेंगे कि कितने अंडकोष हैं। वे यह भी समझेंगे कि एक अंडकोष क्यों नहीं है और दूसरे की सेहत कैसी है। कारण के अनुसार जांच और आगे की सलाह बदल सकती है।
- जन्म से एक अंडकोष न होना: दूसरे स्वस्थ अंडकोष से शुक्राणु बन सकते हैं।
- अंडकोष का नीचे न उतरना: कभी अंडकोष पेट या जांघ की जड़ के पास रहता है। यह स्थिति केवल एक अंडकोष होने से अलग है और यूरोलॉजिस्ट की जांच मांगती है।
- चोट या मरोड़ के कारण ऑपरेशन: अंडकोष में मरोड़, यानी testicular torsion, या गंभीर चोट के बाद उसे हटाना पड़ सकता है।
- कैंसर या अन्य बीमारी का इलाज: ऑपरेशन के अलावा chemotherapy या radiotherapy भी शुक्राणु बनने पर असर डाल सकती है।
यदि अंडकोष की थैली में केवल एक अंडकोष महसूस होता है और पहले जांच नहीं हुई है, तो खुद यह निष्कर्ष न निकालें कि दूसरा जन्म से ही नहीं है। शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार imaging से स्थिति स्पष्ट की जाती है।
पिता बनने की संभावना किन बातों पर निर्भर करती है?
सबसे अहम है कि शुक्राणु कितने बन रहे हैं, उनकी गति कैसी है और उनका आकार कैसा है। शुक्राणुओं को बाहर लाने वाली नलियां तथा स्खलन की प्रक्रिया भी ठीक होनी चाहिए। केवल एक रिपोर्ट का कोई एक आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं बताता।
गर्भधारण में दोनों साथियों की भूमिका होती है। महिला साथी की उम्र, अंडे बनना, फैलोपियन ट्यूब की स्थिति और कोशिश की अवधि भी मायने रखती है। इसलिए सारी जिम्मेदारी एक अंडकोष होने पर डाल देना उचित नहीं है। जरूरत होने पर दोनों की जांच साथ चलनी चाहिए।
कौन-सी जांच से सही जानकारी मिलती है?
सबसे पहले semen analysis
वीर्य की जांच आम तौर पर शुरुआती जांच होती है। इसमें वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की संख्या, गति और आकार सहित कई पहलू देखे जाते हैं। नमूना देने से पहले लैब के निर्देश मानें; आम तौर पर दो से सात दिन तक स्खलन से परहेज बताया जाता है। पूरा नमूना जमा करना भी जरूरी है।
एक बार रिपोर्ट खराब आने से स्थायी बांझपन का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। हाल का तेज बुखार, बीमारी, नमूना देने में दिक्कत और दूसरी परिस्थितियां परिणाम बदल सकती हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच सुझा सकते हैं। सामान्य सीमा वाली रिपोर्ट भी गर्भधारण की गारंटी नहीं है।
हार्मोन और दूसरी जांच कब होती हैं?
यदि शुक्राणु बहुत कम हों, वीर्य में न दिखें, यौन इच्छा कम हो या जांच में अन्य संकेत मिलें, तो FSH और testosterone जैसे हार्मोन की जांच की जा सकती है। Ultrasound हर व्यक्ति को जरूरी नहीं होता; इसकी जरूरत लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर तय होती है। कुछ मामलों में genetic testing भी सुझाई जाती है।
अपनी पुरानी ऑपरेशन रिपोर्ट, दवाओं की सूची और पहले की वीर्य जांच साथ लाएं। PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में पुरुष प्रजनन संबंधी परामर्श के दौरान ये जानकारी समस्या समझने और अगला कदम तय करने में मदद कर सकती है।
प्राकृतिक गर्भधारण के लिए क्या कर सकते हैं?
यदि बचा हुआ अंडकोष ठीक काम कर रहा है और दोनों साथियों में कोई दूसरी बाधा नहीं है, तो प्राकृतिक गर्भधारण संभव है। केवल एक अंडकोष होने के कारण सीधे IVF कराना जरूरी नहीं होता। पूरे महीने हर दो से तीन दिन में संबंध बनाना एक व्यावहारिक तरीका है।
यदि अंडा निकलने का समय पता हो, तो उस समय के आसपास हर एक से दो दिन में संबंध रख सकते हैं। रोज कैलेंडर देखकर तनाव लेना जरूरी नहीं। काम की शिफ्ट, यात्रा और थकान के बीच ऐसा तरीका चुनें जो दोनों के लिए सहज हो।
- तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान छोड़ें; नशीले पदार्थों से बचें।
- नियमित नींद, संतुलित भोजन और मध्यम व्यायाम अपनाएं।
- अत्यधिक शराब और अंडकोष पर बार-बार तेज गर्मी के संपर्क से बचें।
- खेलते समय चोट का जोखिम हो तो उपयुक्त protective guard पहनें।
- बिना सलाह के ताकत बढ़ाने वाले हार्मोन या fertility supplements न लें।
खास सावधानी testosterone injection, gel और जिम में इस्तेमाल होने वाले anabolic steroids को लेकर है। ये बाहर से लेने पर शुक्राणु बनना दबा सकते हैं। पिता बनने की योजना है तो डॉक्टर को जरूर बताएं। पहले से लिखी दवा अपने आप बंद न करें।
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
महिला साथी की उम्र 35 साल से कम हो तो नियमित, बिना गर्भनिरोधक संबंध के एक साल बाद भी गर्भ न ठहरने पर जांच कराएं। उम्र 35 साल या अधिक हो तो छह महीने बाद सलाह लें। उम्र 40 साल से अधिक हो या पहले से कोई प्रजनन संबंधी समस्या हो तो और जल्दी मूल्यांकन उचित है।
एक अंडकोष के साथ यदि पुराने ऑपरेशन, नीचे न उतरे अंडकोष, कैंसर के इलाज, छोटे अंडकोष या पहले असामान्य semen analysis का इतिहास है, तो इतना इंतजार जरूरी नहीं। बच्चा प्लान करते समय ही सलाह ले सकते हैं।
अचानक तेज अंडकोष दर्द, सूजन या दर्द के साथ उल्टी हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। यह मरोड़ जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकता है। नई गांठ या लगातार बदलाव को भी बिना जांच के न छोड़ें।
प्राकृतिक गर्भधारण न हो तो इलाज के क्या विकल्प हैं?
इलाज रिपोर्ट और समस्या के कारण पर निर्भर करता है। हार्मोन संबंधी कुछ समस्याओं, चुनिंदा varicocele मामलों या नली की रुकावट में कारण के अनुसार उपचार मदद कर सकता है। हर व्यक्ति को ऑपरेशन या एक जैसी दवा की जरूरत नहीं होती।
IUI, IVF और ICSI
जब पर्याप्त गतिशील शुक्राणु उपलब्ध हों और महिला साथी की जांच अनुकूल हो, तो कुछ स्थितियों में IUI पर विचार किया जाता है। शुक्राणुओं की गंभीर कमी या अन्य कारणों में IVF के साथ ICSI उपचार सुझाया जा सकता है। ICSI में एक शुक्राणु को सीधे अंडे में डाला जाता है, लेकिन इससे गर्भधारण या स्वस्थ बच्चे की गारंटी नहीं मिलती।
वीर्य में शुक्राणु न मिलने पर
इसे azoospermia कहते हैं। कारण नली में रुकावट भी हो सकता है और शुक्राणु बनने में कमी भी। विस्तृत मूल्यांकन के बाद कुछ पुरुषों में अंडकोष या उससे जुड़ी नली से शुक्राणु प्राप्त करने की प्रक्रिया संभव होती है। TESA और PESA जैसे विकल्प हर मामले में उपयुक्त नहीं होते; सही प्रक्रिया कारण के आधार पर चुनी जाती है।
भविष्य के लिए शुक्राणु सुरक्षित रखना
यदि chemotherapy, radiotherapy या बचे हुए अंडकोष की ऐसी सर्जरी प्रस्तावित हो जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है, तो इलाज शुरू होने से पहले sperm freezing पर चर्चा करें। समय और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार यह विकल्प उपलब्ध हो सकता है। केवल एक अंडकोष होने के कारण हर व्यक्ति को शुक्राणु फ्रीज कराने की जरूरत नहीं है।
एक अंडकोष आपकी मर्दानगी या रिश्ते की गुणवत्ता का पैमाना नहीं है। साथी से खुलकर बात करें और अनुमान के बजाय जांच के आधार पर योजना बनाएं।
अपनी स्थिति समझने के लिए PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर, उत्तर प्रदेश में अपॉइंटमेंट लें। परामर्श की जानकारी के लिए WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क कर सकते हैं।
Frequently asked questions
क्या एक अंडकोष होने पर प्राकृतिक रूप से बच्चा हो सकता है?
हाँ। यदि बचा हुआ अंडकोष स्वस्थ है और पर्याप्त अच्छे शुक्राणु बनाता है, तो प्राकृतिक गर्भधारण संभव है। महिला साथी की प्रजनन सेहत भी इसमें भूमिका निभाती है।
क्या एक अंडकोष होने से सेक्स या इरेक्शन में परेशानी होती है?
जरूरी नहीं। एक स्वस्थ अंडकोष अक्सर पर्याप्त testosterone बना सकता है, जिससे यौन इच्छा और इरेक्शन सामान्य रह सकते हैं। हालांकि, सामान्य यौन क्षमता से शुक्राणुओं की स्थिति का पता नहीं चलता।
एक अंडकोष होने पर सबसे पहले कौन-सी जांच कराएं?
डॉक्टर के परामर्श से semen analysis आम तौर पर शुरुआती जांच होती है। मेडिकल इतिहास और शारीरिक जांच के आधार पर हार्मोन या अन्य जांच की जरूरत तय की जाती है।
क्या एक अंडकोष होने पर IVF जरूरी है?
नहीं। केवल अंडकोष की संख्या के आधार पर IVF नहीं सुझाया जाता। वीर्य की रिपोर्ट, महिला साथी की जांच और गर्भधारण की कोशिश की अवधि के अनुसार विकल्प तय होते हैं।
क्या कृत्रिम अंडकोष लगवाने से शुक्राणु बनने लगते हैं?
नहीं। कृत्रिम अंडकोष, यानी testicular prosthesis, केवल बाहरी रूप और महसूस होने वाली बनावट के लिए होता है। यह शुक्राणु या testosterone नहीं बनाता।