शुक्राणु न होने पर भी पिता बनना संभव – कानपुर
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
वीर्य की रिपोर्ट में शुक्राणु न मिलना हमेशा जैविक पिता बनने की संभावना खत्म होना नहीं है। जानें एजूस्पर्मिया की सही जांच, शुक्राणु प्राप्त करने के विकल्प और कानपुर में इलाज की व्यावहारिक तैयारी।
वीर्य की रिपोर्ट में ‘शुक्राणु नहीं मिले’ पढ़कर मन में सबसे पहले यही आता है—‘क्या अब मैं कभी पिता नहीं बन पाऊंगा?’ यह चिंता स्वाभाविक है, लेकिन एक रिपोर्ट पूरी कहानी नहीं बताती। कुछ पुरुषों में शुक्राणु बनते हैं, पर बाहर आने का रास्ता बंद होता है। कुछ में उनका उत्पादन बहुत कम होता है। इसलिए ‘शुक्राणु न होने पर भी पिता बनना संभव – कानपुर’ का सही अर्थ उम्मीद के साथ कारण समझना है, न कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नतीजा मान लेना। PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur में परामर्श का उद्देश्य आपकी स्थिति के अनुसार वास्तविक विकल्प समझाना है।
1. एजूस्पर्मिया क्या है, और रिपोर्ट क्या नहीं बताती?
वीर्य की जांच में शुक्राणु नहीं मिलने की स्थिति को एजूस्पर्मिया या azoospermia कहते हैं। वीर्य वह तरल है जो स्खलन के समय निकलता है; उसका अधिकतर हिस्सा अलग-अलग ग्रंथियों से आता है। इसलिए वीर्य का सामान्य दिखना, उसकी मात्रा ठीक होना या सामान्य स्खलन होना शुक्राणु मौजूद होने का प्रमाण नहीं है।
‘मेरी यौन इच्छा और संबंध बनाने की क्षमता सामान्य है, फिर ऐसा कैसे?’ यह बहुत आम सवाल है। यौन क्षमता और शुक्राणु बनना अलग प्रक्रियाएं हैं। एजूस्पर्मिया किसी की मर्दानगी, व्यक्तित्व या रिश्ते की योग्यता का पैमाना नहीं है। इसे दोष की तरह नहीं, एक चिकित्सकीय स्थिति की तरह देखना जरूरी है।
एक रिपोर्ट से अंतिम निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। डॉक्टर आमतौर पर उचित अंतराल पर जांच दोहराने और जरूरत पड़ने पर नमूने को केंद्रित करके बने तलछट, यानी pellet, में शुक्राणु खोजने की सलाह देते हैं। कभी बहुत कम शुक्राणु मिलते हैं; ऐसे में स्थिति पूरी तरह शुक्राणु न मिलने से अलग हो सकती है। नमूना पूरा इकट्ठा हुआ था या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण है।
2. रास्ते में रुकावट है या शुक्राणु कम बन रहे हैं?
रुकावट वाला एजूस्पर्मिया
Obstructive azoospermia में अंडकोष में शुक्राणु बन सकते हैं, लेकिन उन्हें बाहर लाने वाली नलियों में रुकावट होती है। पुराने संक्रमण, किसी ऑपरेशन, नसबंदी या जन्म से नली मौजूद न होने के कारण ऐसा हो सकता है। कुछ मामलों में रुकावट सुधारने की सर्जरी पर विचार होता है; अन्य में शुक्राणु निकालकर ICSI का विकल्प देखा जाता है।
उत्पादन से जुड़ा एजूस्पर्मिया
Non-obstructive azoospermia में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। कारण हार्मोन की गड़बड़ी, आनुवंशिक समस्या, बचपन में अंडकोष नीचे न उतरना, कीमोथेरेपी या अंडकोष को नुकसान पहुंचना हो सकता है। कई बार स्पष्ट कारण नहीं मिलता। फिर भी कुछ पुरुषों के अंडकोष के छोटे हिस्सों में शुक्राणु बन रहे होते हैं।
कम मामलों में स्खलन की समस्या या वीर्य का मूत्राशय की तरफ जाना भी जांच का हिस्सा बनता है, खासकर जब वीर्य की मात्रा बहुत कम हो। केवल इंटरनेट पर लक्षण मिलाकर इन स्थितियों में फर्क नहीं किया जा सकता। पुरुष बांझपन की जांच और उपचार का पहला उद्देश्य यही अंतर समझना है।
3. सही जांच कैसे होती है: केवल एक हार्मोन रिपोर्ट काफी नहीं
पहली मुलाकात में डॉक्टर पुराने ऑपरेशन, संक्रमण, बुखार, दवाओं, जिम में लिए गए हार्मोन और पहले हुए गर्भधारण के बारे में पूछ सकते हैं। शारीरिक जांच में अंडकोष का आकार और नलियों की स्थिति देखी जाती है। इन सवालों के जवाब निजी होते हैं; झिझक के बजाय सही जानकारी देना इलाज को अधिक सुरक्षित बनाता है।
- दोबारा वीर्य जांच: लैब के बताए संयम-अंतराल और नमूना देने के निर्देशों का पालन करें। नमूने का कोई हिस्सा गिर जाए तो जरूर बताएं।
- हार्मोन जांच: FSH और testosterone सहित अन्य जांचें जरूरत के अनुसार की जाती हैं। सभी मरीजों को एक जैसा पैनल जरूरी नहीं होता।
- आनुवंशिक जांच: कुछ स्थितियों में karyotype, Y-chromosome microdeletion या CFTR जांच और genetic counselling की जरूरत पड़ सकती है।
- अल्ट्रासाउंड: जांच और लक्षणों के आधार पर उपयोगी होता है; यह अकेले शुक्राणु होने या न होने का अंतिम प्रमाण नहीं है।
‘मेरा FSH बढ़ा हुआ है, क्या सारी उम्मीद खत्म है?’ नहीं, लेकिन इसका अर्थ नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। किसी एक संख्या से शुक्राणु मिलने की भविष्यवाणी नहीं की जाती। कुछ आनुवंशिक निष्कर्षों में संभावना बेहद सीमित हो सकती है, इसलिए प्रक्रिया से पहले परामर्श जरूरी है। प्रयोगशाला जांच के मानकीकरण का महत्व WHO की वीर्य जांच संबंधी मार्गदर्शिका में भी बताया गया है।
4. दवा, सर्जरी, TESA और micro-TESE: किसे क्या जरूरत?
हर एजूस्पर्मिया का इलाज IVF से शुरू नहीं होता। कुछ खास हार्मोन की कमी में विशेषज्ञ की निगरानी में दवाएं या इंजेक्शन शुक्राणु उत्पादन सुधार सकते हैं। इसमें समय और निगरानी लगती है। दूसरी ओर, बिना जांच ‘स्पर्म बढ़ाने’ के सप्लीमेंट लेते रहना असली कारण पहचानने में देरी कर सकता है।
बाहर से लिया गया testosterone, चाहे इंजेक्शन हो या जिम का anabolic steroid, शुक्राणु बनना दबा सकता है। ‘टेस्टोस्टेरोन बढ़ेगा तो प्रजनन क्षमता भी बढ़ेगी’ हमेशा सही नहीं है। कोई निर्धारित दवा खुद बंद न करें, लेकिन डॉक्टर को सभी दवाओं और सप्लीमेंट की सूची जरूर दें।
शुक्राणु प्राप्त करने की प्रक्रियाएं
TESA प्रक्रिया में सुई की मदद से अंडकोष से नमूना लिया जाता है। TESE में छोटे ऊतक नमूने लिए जाते हैं। कुछ रुकावट वाले मामलों में epididymis, यानी शुक्राणु जमा होने वाली नली, से नमूना लिया जा सकता है। तरीका कारण, जांच और विशेषज्ञ की सलाह से चुना जाता है।
Non-obstructive azoospermia के चुनिंदा मामलों में micro-TESE पर विचार होता है। इसमें ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप से उन हिस्सों की तलाश की जाती है जहां शुक्राणु मिलने की संभावना हो। यह हर मरीज के लिए जरूरी नहीं और इसमें भी शुक्राणु मिलना निश्चित नहीं है। संबंधित विशेषज्ञ तथा सुविधा की उपलब्धता पहले स्पष्ट कर लें।
दर्द, सूजन, खून जमा होना, संक्रमण और कभी testosterone स्तर प्रभावित होने जैसे जोखिम समझना जरूरी है। प्रक्रिया से पहले पूछें: ‘मेरे मामले में यही तरीका क्यों? शुक्राणु न मिले तो अगला कदम क्या होगा?’ इन जवाबों को साथी के साथ समझना सहमति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
5. शुक्राणु मिलने के बाद ICSI और दूसरे विकल्प
अंडकोष से निकाले गए सीमित शुक्राणुओं का इस्तेमाल आमतौर पर ICSI में किया जाता है। यह IVF का एक हिस्सा है, जिसमें भ्रूण विशेषज्ञ एक जीवित, उपयोग योग्य शुक्राणु को अंडे में डालता है। ICSI उपचार में महिला साथी के अंडे तैयार करने, उन्हें निकालने और बने भ्रूण के स्थानांतरण की योजना भी शामिल होती है।
शुक्राणु मिलना, अंडे का निषेचन होना, भ्रूण बनना और बच्चे का जन्म—ये अलग चरण हैं। एक चरण पूरा होने से अगला निश्चित नहीं हो जाता। ‘अच्छी सफलता दर’ सुनते समय पूछें कि बात किस चरण और किस तरह के मरीजों की हो रही है। महिला साथी की उम्र, अंडों की उपलब्धता और दोनों का स्वास्थ्य भी मायने रखते हैं।
उपयोग योग्य शुक्राणु मिलने पर शुक्राणु फ्रीज करने की संभावना पूछी जा सकती है। बहुत कम शुक्राणु होने पर फ्रीजिंग और बाद में उपयोग की सीमाएं हो सकती हैं। पहले शुक्राणु प्राप्त किए जाएं या अंडे निकालने के आसपास प्रक्रिया हो, यह संयुक्त योजना से तय होता है। पुष्टि किए गए एजूस्पर्मिया में अपने वीर्य से IUI उपयोगी विकल्प नहीं होता।
अगर अपने शुक्राणु न मिलें, तो नियमों के अनुसार donor sperm एक विकल्प हो सकता है। इसमें बच्चे का आनुवंशिक संबंध पुरुष साथी से नहीं होगा; इसलिए दोनों की सूचित सहमति और भावनात्मक तैयारी जरूरी है। दत्तक ग्रहण या उपचार रोकने का निर्णय भी सम्मान योग्य है। अंग्रेजी में जानकारी के लिए related English guide पढ़ सकते हैं।
6. डॉक्टर कब दिखाएं?
रिपोर्ट में शुक्राणु नहीं मिले हों तो गर्भधारण की कोशिश का एक साल पूरा होने का इंतजार न करें। विशेषज्ञ से समय लेकर रिपोर्ट की पुष्टि और कारण की जांच कराएं। सामान्य तौर पर एक साल कोशिश के बाद गर्भ न ठहरे तो दोनों साथियों का मूल्यांकन होना चाहिए; महिला साथी की उम्र 35 वर्ष या अधिक हो तो छह महीने बाद सलाह लेना उचित है।
- अंडकोष का ऑपरेशन, चोट, बचपन में अंडकोष नीचे न उतरने या कैंसर उपचार का इतिहास हो।
- वीर्य बहुत कम आए, स्खलन न हो या स्खलन में दर्द हो।
- testosterone या bodybuilding steroids का इस्तेमाल किया हो।
- कीमोथेरेपी या ऐसा उपचार शुरू होने वाला हो जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अचानक तेज अंडकोष दर्द, तेजी से बढ़ती सूजन या बुखार होने पर नियमित fertility appointment का इंतजार न करें; तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। सामान्य लक्षणों और कारणों की जानकारी Mayo Clinic के पुरुष बांझपन संबंधी पृष्ठ पर भी मिलती है।
7. कानपुर में इलाज की व्यावहारिक तैयारी
कानपुर में नौकरी, दुकान, फैक्ट्री की शिफ्ट या आसपास से आने-जाने के बीच बार-बार छुट्टी लेना आसान नहीं होता। पहली मुलाकात से पहले पूछ लें कि केवल परामर्श होगा या उसी दिन नमूना भी देना है। घर से नमूना लाने की अनुमति, समय और परिवहन के निर्देश लैब से लें; अपनी सुविधा के अनुसार अनुमान न लगाएं।
पुरानी वीर्य रिपोर्ट, जांचें, ऑपरेशन के कागज और दवाओं की सूची साथ रखें। संभव हो तो दोनों साथी आएं। पुरुष की जांच पूरी होने तक महिला की जांच रोकना जरूरी नहीं; दोनों का मूल्यांकन साथ चलने से समय बच सकता है। हर रिपोर्ट परिवार या कार्यस्थल पर साझा करना भी आपकी मजबूरी नहीं है।
‘कुल खर्च कितना होगा?’ इसका उत्तर जांच, चुनी गई प्रक्रिया, दवाओं, एनेस्थीसिया, IVF-ICSI और फ्रीजिंग की जरूरत पर निर्भर करता है। व्यक्तिगत अनुमान परामर्श के बाद लें। लिखित योजना में पूछें कि कौन-सी सेवाएं शामिल हैं, स्टोरेज की शर्तें क्या हैं और शुक्राणु न मिलने पर क्या बदलाव होगा।
तंबाकू छोड़ना, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन स्वास्थ्य के लिए अच्छे कदम हैं, लेकिन इनसे हर रुकावट या आनुवंशिक कारण ठीक नहीं होता। खुद को दोष देना या अनजाने नुस्खों पर महीनों लगाना मददगार नहीं है।
8. PRAVI में सवालों के साथ आएं, दबाव के साथ नहीं
PRAVI IVF & Fertility Centre के कानपुर केंद्र Swaroop Nagar और Shardha Nagar, Kanpur, UP में हैं। दिल्ली में Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar है। यात्रा से पहले चुने गए केंद्र पर संबंधित परामर्श, जांच या प्रक्रिया की उपलब्धता और समय की पुष्टि करें।
क्लिनिक की टीम में Medical Director Dr. Monica Sachdeva, जिनका अनुभव 18 वर्ष है; Dr. Rit Shukla, जिनका अनुभव 10 वर्ष है; Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, जिनका अनुभव 6+ वर्ष है, शामिल हैं। केंद्र के साझा परिचय में ‘दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी’ का उल्लेख है; यह किसी व्यक्ति के परिणाम की गारंटी नहीं है।
पहली मुलाकात का लक्ष्य तुरंत प्रक्रिया तय करना नहीं, बल्कि तीन बातें स्पष्ट करना है: रिपोर्ट की पुष्टि हुई है या नहीं, संभावित कारण क्या है और अगला उचित कदम कौन-सा है। अपनी रिपोर्ट लेकर अपॉइंटमेंट बुक करें। पिता बनने की राह पर उम्मीद जरूरी है—और उतनी ही जरूरी है स्पष्ट, व्यक्तिगत तथा बिना गारंटी वाली चिकित्सकीय सलाह।
Frequently asked questions
क्या घर पर किए जाने वाले स्पर्म टेस्ट से एजूस्पर्मिया की पुष्टि हो सकती है?
घरेलू टेस्ट की क्षमता सीमित होती है और वे बहुत कम संख्या में मौजूद शुक्राणुओं को पहचान नहीं सकते। एजूस्पर्मिया की पुष्टि के लिए मानक लैब में वीर्य जांच और जरूरत के अनुसार दोबारा जांच जरूरी है।
हाल में तेज बुखार आया हो तो क्या डॉक्टर को बताना चाहिए?
हां, तेज बुखार शुक्राणु उत्पादन को कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकता है। डॉक्टर को बुखार का समय और ली गई दवाएं बताएं, ताकि दोबारा जांच का उचित समय तय हो सके। हर शून्य शुक्राणु रिपोर्ट को केवल बुखार का असर मानना सही नहीं है।
क्या नसबंदी के बाद अपने शुक्राणुओं से बच्चा संभव है?
कुछ पुरुषों में नसबंदी को वापस जोड़ने की सर्जरी या शुक्राणु निकालकर ICSI के विकल्प होते हैं। चुनाव नसबंदी को बीते समय, महिला साथी की प्रजनन स्थिति और अन्य जांचों पर निर्भर करता है। किसी भी विकल्प से गर्भधारण निश्चित नहीं होता।
क्या एजूस्पर्मिया का आनुवंशिक कारण बच्चे में जा सकता है?
कुछ आनुवंशिक कारण अगली पीढ़ी तक जा सकते हैं, लेकिन सभी एजूस्पर्मिया आनुवंशिक नहीं होते। उदाहरण के लिए कुछ Y-chromosome संबंधी बदलाव बेटे तक पहुंच सकते हैं। जांच में ऐसा संकेत मिले तो ICSI से पहले genetic counselling उपयोगी है।
क्या TESA के बाद उसी दिन काम पर लौट सकते हैं?
यह प्रक्रिया, एनेस्थीसिया और आपके काम के प्रकार पर निर्भर करता है। आराम, वाहन चलाने, वजन उठाने और संबंध बनाने के बारे में उपचार करने वाली टीम के निर्देश लें। बढ़ते दर्द, बुखार या असामान्य सूजन पर डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर पहली बार शुक्राणु नहीं मिले तो क्या दोबारा प्रक्रिया कराना जरूरी है?
दोबारा प्रक्रिया हर व्यक्ति के लिए जरूरी या उपयोगी नहीं होती। पहले इस्तेमाल किए गए तरीके, जांचों, आनुवंशिक निष्कर्षों और विशेषज्ञ की समीक्षा के बाद फैसला होता है। पहले की रिपोर्ट और प्रक्रिया का विवरण लेकर दूसरी राय लेना भी उचित है।
क्या महिला साथी का AMH पुरुष में शुक्राणु मिलने की संभावना बताता है?
नहीं, AMH महिला के अंडाशय में अंडों की उपलब्धता का अनुमान लगाने वाली जांचों में से एक है। यह पुरुष के अंडकोष में शुक्राणु होने का संकेत नहीं देता। हालांकि IVF की समय-योजना बनाते समय महिला की उम्र और AMH सहित अन्य निष्कर्ष देखे जाते हैं।
क्या पहली मुलाकात में ही donor sperm के लिए सहमति देनी होगी?
नहीं, यह सोच-समझकर और बिना दबाव लिया जाने वाला निर्णय है। अपने शुक्राणुओं की जांच के निष्कर्ष, उपलब्ध विकल्प और donor sperm से जुड़े भावनात्मक तथा कानूनी पहलू पहले समझें। लागू नियमों के अनुसार आवश्यक सूचित सहमति के बिना इसका उपयोग नहीं होना चाहिए।