प्रेगनेंट न होने के 10 आम कारण – कानपुर डॉक्टर बताते हैं
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
गर्भ न ठहरने की वजह सिर्फ महिला की सेहत नहीं होती; सही समय, शुक्राणु और कई दूसरे पहलू भी मायने रखते हैं। जानिए 10 आम कारण, जरूरी जांच और डॉक्टर से मिलने का सही समय।
हर महीने पीरियड आने पर मायूसी होना, कैलेंडर में तारीखें गिनना और आसपास से लगातार सवाल सुनना—गर्भधारण का इंतजार भावनात्मक रूप से थका सकता है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है: “हम कोशिश तो कर रहे हैं, फिर प्रेगनेंट क्यों नहीं हो पा रहे?” इसका जवाब किसी एक जांच, घरेलू नुस्खे या सिर्फ महिला की रिपोर्ट से नहीं मिलता। इस लेख में प्रेगनेंट न होने के 10 आम कारण – कानपुर डॉक्टर बताते हैं विषय को सरल भाषा में समझेंगे: किन बातों पर ध्यान देना है, कौन-सी जांच उपयोगी हो सकती है और कब सलाह लेना बेहतर है।
कानपुर में नौकरी की शिफ्ट, दुकान की जिम्मेदारी, संयुक्त परिवार और आने-जाने की व्यस्तता के बीच गर्भधारण की योजना के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। फिर भी कारण समझकर आगे बढ़ना, हर महीने अंदाजा लगाने से बेहतर है। यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन है; आपकी उम्र, इतिहास और जांच के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।
पहले समझें: हर महीने गर्भ ठहरना जरूरी नहीं
गर्भधारण के लिए अंडा निकलना, पर्याप्त सक्षम शुक्राणुओं का मौजूद होना, खुली फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय के भीतर अनुकूल स्थिति जरूरी हैं। सही समय पर संबंध होने के बावजूद हर चक्र में गर्भ नहीं ठहरता। कुछ महीनों की देरी अपने आप में किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है।
WHO की जानकारी के अनुसार, नियमित असुरक्षित संबंध के बावजूद 12 महीने तक गर्भ न ठहरना infertility की परिभाषा में आता है। लेकिन उम्र या पहले से मौजूद समस्या के कारण जांच इससे पहले भी जरूरी हो सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात: यह “किसकी गलती है” वाला सवाल नहीं है। कारण महिला, पुरुष, दोनों में हो सकते हैं या सामान्य जांच में स्पष्ट नहीं मिलते। इसलिए शुरुआती बातचीत और जांच में दोनों साथियों का शामिल होना उपयोगी है।
कारण 1–2: सही समय चूकना और अंडा नियमित न निकलना
1. फर्टाइल दिनों में संबंध न बन पाना
“हम महीने में दो-तीन बार मिलते हैं, क्या इतना काफी है?” अगर वे दिन अंडा निकलने के आसपास नहीं हैं, तो अवसर छूट सकता है। फर्टाइल समय आम तौर पर ovulation से पहले के पांच दिन और ovulation का दिन होता है। अंडा हर महिला में पीरियड के चौदहवें दिन नहीं निकलता; चक्र की लंबाई और नियमितता मायने रखती है।
व्यावहारिक तरीका है पूरे महीने हर दो से तीन दिन संबंध रखना, यदि दोनों सहज हों। इससे तारीख का दबाव घट सकता है। ऐप केवल अनुमान देते हैं। अनियमित पीरियड में डॉक्टर जरूरत के अनुसार follicular monitoring से अंडे की बढ़त और निकलने का समय देख सकते हैं। यह जांच हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है।
2. Ovulation की समस्या, जिसमें PCOS भी शामिल है
बहुत लंबे अंतराल पर पीरियड आना, महीनों पीरियड न होना या चक्र बार-बार बदलना अनियमित ovulation का संकेत हो सकता है। PCOS एक आम वजह है, लेकिन हर अनियमित पीरियड PCOS नहीं होता और PCOS होने का अर्थ गर्भधारण असंभव होना नहीं है।
डॉक्टर पीरियड का इतिहास, लक्षण और जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड तथा हार्मोन जांच देखते हैं। इलाज में खानपान, शारीरिक गतिविधि और कभी अंडा निकलवाने की दवा शामिल हो सकती है। ये दवाएं खुद से न लें; कुछ स्थितियों में निगरानी जरूरी होती है।
कारण 3–4: शुक्राणुओं की समस्या और बढ़ती उम्र
3. शुक्राणुओं की संख्या, गति या बनावट में बदलाव
“मेरे पति बिल्कुल स्वस्थ हैं, तो उनकी जांच क्यों?” सामान्य फिटनेस, यौन इच्छा और इरेक्शन से शुक्राणुओं की गुणवत्ता का पता नहीं चलता। कम संख्या, कम गतिशीलता या अन्य बदलाव गर्भधारण में बाधा बन सकते हैं। कभी शुक्राणुओं के बनने या बाहर आने के रास्ते में भी समस्या होती है।
Semen analysis शुरुआती उपयोगी जांच है। सैंपल देने से पहले लैब के निर्देश मानें और हाल का तेज बुखार, दवाएं या सैंपल का कुछ हिस्सा छूटना जरूर बताएं। एक असामान्य रिपोर्ट हमेशा अंतिम निष्कर्ष नहीं होती; दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है। आगे की सलाह पुरुष फर्टिलिटी की जांच के आधार पर तय होती है।
4. उम्र के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव
महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता प्रभावित होती है। 35 वर्ष के बाद समय को लेकर योजना अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। पुरुष की उम्र भी प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती है, हालांकि बदलाव का तरीका अलग होता है।
“AMH कम है, क्या अब गर्भ नहीं ठहरेगा?” ऐसा सीधा निष्कर्ष सही नहीं। AMH अंडाशय में बचे अंडों के भंडार और उपचार में संभावित प्रतिक्रिया का संकेत देता है; यह अंडों की गुणवत्ता या प्राकृतिक गर्भधारण का निश्चित फैसला नहीं करता। इसे उम्र, अल्ट्रासाउंड और बाकी इतिहास के साथ समझना चाहिए।
कारण 5–6: ट्यूब की रुकावट और एंडोमेट्रियोसिस
5. फैलोपियन ट्यूब बंद या क्षतिग्रस्त होना
अंडा और शुक्राणु आम तौर पर ट्यूब में मिलते हैं। दोनों ट्यूब बंद हों या उनके काम करने में बाधा हो, तो प्राकृतिक गर्भधारण मुश्किल हो सकता है। पुराने pelvic infection, कुछ ऑपरेशन या पूर्व ectopic pregnancy से ट्यूब प्रभावित हो सकती हैं। कभी कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता।
इतिहास के अनुसार HSG या दूसरी जांच से ट्यूब की स्थिति देखी जा सकती है। हर महिला को सीधे laparoscopy की जरूरत नहीं होती। जननांगों की टीबी भी कुछ मामलों में विचार योग्य है, लेकिन केवल गर्भ न ठहरने के आधार पर टीबी की दवा शुरू करना उचित नहीं है।
6. एंडोमेट्रियोसिस
बहुत दर्दनाक पीरियड, संबंध के दौरान गहरा दर्द या लंबे समय से निचले पेट में दर्द एंडोमेट्रियोसिस की ओर इशारा कर सकते हैं। इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसे ऊतक बाहर मौजूद होते हैं। इससे सूजन, चिपकाव और अंडाशय या ट्यूब के काम पर असर पड़ सकता है।
दर्द कम होने पर भी यह समस्या संभव है, और सामान्य अल्ट्रासाउंड इसे पूरी तरह खारिज नहीं करता। दवा, ऑपरेशन या fertility treatment में से चुनाव दर्द, उम्र और गर्भधारण की योजना देखकर होता है। हर ovarian cyst का ऑपरेशन कराना जरूरी नहीं; कुछ ऑपरेशन अंडों के भंडार को प्रभावित कर सकते हैं।
कारण 7–8: गर्भाशय के भीतर बदलाव और हार्मोन की गड़बड़ी
7. कुछ फाइब्रॉइड, पॉलिप या गर्भाशय में चिपकाव
गर्भाशय में फाइब्रॉइड दिखने का मतलब यह नहीं कि वही गर्भ न ठहरने का कारण है। उसकी जगह और गर्भाशय की अंदरूनी गुहा पर असर अधिक महत्वपूर्ण हैं। कुछ पॉलिप, भीतर के चिपकाव या बनावट में बदलाव भ्रूण के ठहरने को प्रभावित कर सकते हैं।
बहुत ज्यादा रक्तस्राव, पीरियड के बीच खून आना या गर्भाशय की पिछली प्रक्रिया के बाद पीरियड अचानक बहुत कम होना डॉक्टर को बताएं। जरूरत पर अल्ट्रासाउंड और hysteroscopy जैसी जांच की सलाह मिल सकती है। महिला फर्टिलिटी मूल्यांकन में पहले यह समझा जाता है कि दिख रहा बदलाव वास्तव में उपचार मांगता भी है या नहीं।
8. थायरॉइड, प्रोलैक्टिन या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं
थायरॉइड की गड़बड़ी और प्रोलैक्टिन बढ़ना कुछ महिलाओं में ovulation प्रभावित कर सकते हैं। अनियंत्रित डायबिटीज जैसी स्थितियों को भी गर्भधारण से पहले संभालना जरूरी है। वजन में असामान्य बदलाव, स्तन से दूध जैसा स्राव या पीरियड गायब होना बताने योग्य लक्षण हैं।
हर व्यक्ति को लंबी हार्मोन जांच सूची की जरूरत नहीं होती। लक्षण और इतिहास के हिसाब से जांच चुनना बेहतर है। चल रही दवाएं, सप्लीमेंट और आयुर्वेदिक उत्पाद भी डॉक्टर को बताएं; कोई जरूरी दवा अपने आप बंद न करें।
कारण 9–10: जीवनशैली का असर और अस्पष्ट कारण
9. तंबाकू, बहुत कम या अधिक वजन और कुछ दवाएं
धूम्रपान, गुटखा या अन्य तंबाकू, अत्यधिक शराब तथा बहुत कम या अधिक वजन प्रजनन स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। जिम में लिए जाने वाले anabolic steroids और बिना जरूरत testosterone पुरुषों में शुक्राणु बनना दबा सकते हैं। अत्यधिक व्यायाम या बहुत कम भोजन से कुछ महिलाओं का ovulation रुक सकता है।
कानपुर की व्यस्त दिनचर्या में नियमित भोजन, नींद और चलने का समय निकालना उपयोगी शुरुआत है। काम पर तेज गर्मी या रसायनों का संपर्क हो तो सुरक्षा उपायों पर चर्चा करें। केवल तनाव को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं; “सोचना बंद करो, हो जाएगा” जैसी सलाह मदद के बजाय अपराधबोध बढ़ा सकती है।
10. सामान्य जांच के बाद भी कारण स्पष्ट न होना
कभी ovulation, ट्यूब और semen की शुरुआती जांच सामान्य होने पर भी गर्भ नहीं ठहरता। इसे unexplained infertility कहते हैं। इसका मतलब समस्या काल्पनिक होना या उपचार का रास्ता बंद होना नहीं है; उपलब्ध जांच गर्भधारण की हर सूक्ष्म प्रक्रिया नहीं मापती।
आगे की योजना उम्र, कोशिश की अवधि और पहले हुए उपचार पर निर्भर करती है। विकल्पों में कुछ समय निगरानी, चुनिंदा मामलों में IUI या IVF हो सकते हैं। इस विषय को विस्तार से समझने के लिए related English guide भी पढ़ सकते हैं।
डॉक्टर कब दिखाएं और पहली मुलाकात में क्या लेकर जाएं?
- उम्र 35 वर्ष से कम: नियमित असुरक्षित संबंध के बावजूद 12 महीने में गर्भ न ठहरे तो मूल्यांकन कराएं।
- उम्र 35–39 वर्ष: छह महीने कोशिश के बाद सलाह लें।
- उम्र 40 वर्ष या अधिक: कोशिश शुरू करते समय ही सलाह लेना बेहतर है।
- किसी भी उम्र में जल्दी मिलें: पीरियड गायब हों, बहुत अनियमित हों, तेज pelvic pain हो, पहले ट्यूब की समस्या रही हो, कैंसर का उपचार हुआ हो या पुरुष साथी में ज्ञात समस्या हो।
NHS का infertility मार्गदर्शन भी समय पर सलाह और दोनों साथियों के मूल्यांकन की अहमियत बताता है। बार-बार गर्भपात होना अलग तरह की जांच मांग सकता है; इसे केवल गर्भ न ठहरने वाली समस्या मानकर न चलें।
पहली मुलाकात में पिछली रिपोर्ट, पीरियड की तारीखें, दवाओं की सूची और गर्भधारण की कोशिश की अवधि लिखकर लाएं। सभी जांच पहले से कराने की जरूरत नहीं है। संभव हो तो दोनों साथी साथ आएं। नौकरी या दुकान के समय की बाधा बताने से जांच और दोबारा आने की योजना बनाना आसान हो सकता है।
गर्भ की जांच पॉजिटिव हो और साथ में एक तरफ तेज पेट दर्द, चक्कर या रक्तस्राव हो, तो नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें; तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
PRAVI IVF कानपुर में अगला कदम कैसे तय करें?
हर दंपती को IVF की जरूरत नहीं होती। कभी सही समय समझना, ovulation का इलाज या किसी स्वास्थ्य समस्या को नियंत्रित करना पर्याप्त रास्ता हो सकता है। ट्यूब, शुक्राणु, उम्र और पिछले उपचार के आधार पर IVF के विकल्प पर चर्चा की जाती है। अच्छी सफलता दर की उम्मीद पर बात करते समय भी व्यक्तिगत स्थिति समझना जरूरी है; किसी परिणाम की गारंटी नहीं होती।
PRAVI IVF & Fertility Centre के कानपुर केंद्र Swaroop Nagar और Shardha Nagar में हैं। टीम में Medical Director Dr. Monica Sachdeva, 18 वर्षों के अनुभव के साथ; Dr. Rit Shukla, 10 वर्षों के अनुभव के साथ; Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, 6+ वर्षों के अनुभव के साथ शामिल हैं। दिल्ली केंद्र Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar में है।
केंद्र के परिचय में “दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी” का उल्लेख है; इसे आपके व्यक्तिगत परिणाम की भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए। इलाज का खर्च जांच, दवाओं और चुनी गई प्रक्रिया सहित कई कारकों पर निर्भर करता है; व्यक्तिगत अनुमान परामर्श के बाद मिलता है।
आपको सारी रिपोर्ट समझकर या किसी निष्कर्ष पर पहुंचकर ही डॉक्टर के पास आने की जरूरत नहीं है। अपने सवाल और उपलब्ध जानकारी लेकर शुरुआत करें। कारण समझने और दोनों साथियों के लिए उचित अगला कदम तय करने के लिए PRAVI IVF में अपॉइंटमेंट लें।
Frequently asked questions
क्या नियमित पीरियड आने का मतलब फर्टिलिटी बिल्कुल सामान्य है?
नियमित पीरियड से ovulation होने की संभावना का संकेत मिलता है, लेकिन पूरी फर्टिलिटी का पता नहीं चलता। ट्यूब, गर्भाशय और शुक्राणुओं से जुड़ी समस्याएं फिर भी हो सकती हैं। तय समय तक गर्भ न ठहरे तो दोनों साथियों का मूल्यांकन उपयोगी है।
पहला बच्चा आसानी से हुआ था, अब गर्भ क्यों नहीं ठहर रहा?
पहले गर्भधारण के बाद भी उम्र, ovulation, ट्यूब या शुक्राणुओं में बदलाव हो सकते हैं। इसे secondary infertility कहा जाता है। पहले बच्चा होना वर्तमान जांच की जरूरत को खत्म नहीं करता।
क्या संबंध के बाद लेटे रहने या पैर ऊपर करने से गर्भ जल्दी ठहरता है?
इन तरीकों से गर्भधारण की संभावना बढ़ने का भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। संबंध के बाद कुछ तरल बाहर निकलना सामान्य है और इसका मतलब सारे शुक्राणु बाहर निकल जाना नहीं है। किसी खास मुद्रा से अधिक महत्वपूर्ण सही समय और दोनों साथियों का प्रजनन स्वास्थ्य है।
क्या गर्भनिरोधक गोलियां बंद करने के बाद स्थायी बांझपन हो सकता है?
गर्भनिरोधक गोलियां आम तौर पर स्थायी बांझपन का कारण नहीं बनतीं। बंद करने के बाद चक्र का सामान्य होना हर व्यक्ति में अलग समय ले सकता है। पीरियड न लौटें या पहले से अनियमित रहे हों तो डॉक्टर से सलाह लें।
क्या फोलिक एसिड लेने से गर्भ जरूर ठहर जाता है?
फोलिक एसिड गर्भ ठहराने की दवा नहीं है। गर्भधारण की तैयारी में यह बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की कुछ जन्मजात समस्याओं का जोखिम घटाने के लिए दिया जाता है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही खुराक डॉक्टर से पूछें।
क्या हर lubricant गर्भधारण की कोशिश के दौरान ठीक है?
कुछ सामान्य lubricants प्रयोगशाला में शुक्राणुओं की गति को प्रभावित कर सकते हैं, हालांकि वास्तविक गर्भधारण पर असर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जरूरत हो तो sperm-friendly विकल्प के बारे में डॉक्टर से पूछें। दर्द या लगातार सूखापन हो तो उसकी वजह भी जांचनी चाहिए।
घर की sperm test kit सामान्य आए तो क्या लैब जांच जरूरी नहीं?
घरेलू किट अक्सर शुक्राणुओं के सीमित पहलू ही जांचती हैं। पूरी semen analysis में संख्या के अलावा गति और दूसरे महत्वपूर्ण माप देखे जाते हैं। गर्भधारण में देरी हो रही हो तो घरेलू सामान्य नतीजे के आधार पर मूल्यांकन न टालें।
क्या जांच शुरू कराने का मतलब तुरंत IVF कराना होगा?
नहीं, जांच का उद्देश्य कारण समझना और उपयुक्त विकल्प चुनना है। कुछ दंपतियों में समय की सलाह, दवा या अन्य उपचार उपयोगी होते हैं; कुछ में IVF उचित होता है। निर्णय उम्र, रिपोर्ट, कोशिश की अवधि और आपकी प्राथमिकताओं पर मिलकर लिया जाता है।