गलसुआ से अंडकोष में सूजन: प्रजनन क्षमता पर क्या असर पड़ता है?
गलसुआ के बाद अंडकोष में सूजन होने से कुछ पुरुषों में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, लेकिन इसका मतलब हमेशा बांझपन नहीं होता। जानें कब तुरंत इलाज जरूरी है और प्रजनन क्षमता की जांच कैसे होती है।
गलसुआ होने पर, खासकर किशोरावस्था के बाद, कुछ पुरुषों के अंडकोष में सूजन हो सकती है और शुक्राणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। लेकिन गलसुआ या उससे हुई सूजन का मतलब यह नहीं कि आप पिता नहीं बन सकते। अचानक तेज अंडकोष दर्द हो तो प्रजनन क्षमता की चिंता से पहले तुरंत अस्पताल जाएं, क्योंकि इसकी दूसरी गंभीर वजह भी हो सकती है।
गलसुआ और पुरुष प्रजनन क्षमता का संबंध क्या है?
गलसुआ यानी मम्प्स एक वायरल संक्रमण है। इसमें आमतौर पर कान के नीचे और जबड़े के पास लार बनाने वाली ग्रंथियों में सूजन आती है। बुखार, बदन दर्द, थकान और चबाने में दर्द भी हो सकता है। यह संक्रमण लार और सांस की बूंदों से फैलता है।
कभी-कभी मम्प्स वायरस अंडकोष में भी सूजन पैदा करता है। इसे मम्प्स ऑर्काइटिस कहते हैं। अंडकोष शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाते हैं, इसलिए यहां हुई सूजन प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यह समस्या बचपन की तुलना में किशोरावस्था के बाद अधिक देखी जाती है।
घर में किसी को गलसुआ हुआ हो, तो केवल बीमारी का नाम सुनकर भविष्य की चिंता न करें। हर पुरुष में अंडकोष की सूजन नहीं होती और हर सूजन स्थायी नुकसान नहीं करती।
अंडकोष की सूजन को कैसे पहचानें?
मम्प्स ऑर्काइटिस अक्सर गाल या जबड़े की सूजन शुरू होने के कुछ दिन बाद दिखाई देता है। हालांकि कभी-कभी चेहरे की स्पष्ट सूजन के बिना भी यह हो सकता है। एक या दोनों अंडकोष प्रभावित हो सकते हैं।
- अंडकोष में दर्द, भारीपन या छूने पर तकलीफ
- अंडकोष की थैली में सूजन, गर्माहट या लालिमा
- बुखार, कमजोरी, मतली या उल्टी
- चलने, बैठने या कपड़ों के रगड़ने से दर्द बढ़ना
ऐसे लक्षणों में उसी दिन डॉक्टर से जांच करवाएं। केवल चेहरे पर गलसुआ की सूजन देखकर यह मान लेना सही नहीं कि अंडकोष का दर्द भी उसी कारण है। पेशाब का संक्रमण और अन्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं।
अचानक तेज दर्द: इंतजार न करें
अगर एक तरफ अचानक बहुत तेज दर्द हो, उल्टी आए या अंडकोष सामान्य से ऊपर दिखाई दे, तो तुरंत इमरजेंसी जाएं। यह टेस्टिकुलर टॉर्शन हो सकता है, जिसमें अंडकोष की रक्त आपूर्ति मुड़कर रुक सकती है। इसे गलसुआ समझकर घर पर रुकना नुकसान पहुंचा सकता है; इसमें घंटों की देरी भी मायने रखती है।
क्या गलसुआ के बाद बांझपन हो सकता है?
मम्प्स ऑर्काइटिस के बाद कुछ पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति या गुणवत्ता कम हो सकती है। बुखार भी अस्थायी रूप से वीर्य जांच को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में प्रभावित अंडकोष बाद में छोटा हो जाता है और शुक्राणु बनाने की क्षमता लंबे समय तक कम रह सकती है।
एक अंडकोष और दोनों अंडकोष प्रभावित होने में फर्क
अगर केवल एक अंडकोष प्रभावित है और दूसरा स्वस्थ है, तो पर्याप्त शुक्राणु और हार्मोन बनना संभव है। दोनों अंडकोष प्रभावित होने पर प्रजनन क्षमता को लेकर चिंता अधिक होती है। फिर भी केवल सूजन के इतिहास से बांझपन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
क्या बचपन में गलसुआ हुआ था और अब गर्भधारण में समय लग रहा है? दोनों बातों को तुरंत जोड़ देना ठीक नहीं। उस समय अंडकोष में दर्द या सूजन हुई थी या नहीं, मौजूदा वीर्य जांच कैसी है और साथी की प्रजनन स्थिति क्या है, ये सब देखना जरूरी है।
एक और आम भ्रम है: शुक्राणु कम होने का मतलब यौन क्षमता कम होना नहीं है। इच्छा, इरेक्शन और शुक्राणु उत्पादन अलग बातें हैं। इस विषय पर शर्म या खुद को दोष देने की जरूरत नहीं।
डॉक्टर किन जांचों की सलाह दे सकते हैं?
तेज दर्द के समय प्राथमिकता दर्द की वजह पहचानना और सही इलाज शुरू करना है। डॉक्टर लक्षणों, संक्रमण के इतिहास और शारीरिक जांच के आधार पर जरूरत तय करते हैं। हर व्यक्ति को सभी जांचें नहीं करानी होतीं।
- संक्रमण की जांच: जरूरत पड़ने पर मम्प्स की पुष्टि के लिए नमूना लिया जा सकता है।
- अल्ट्रासाउंड या डॉप्लर: अंडकोष की स्थिति और रक्त प्रवाह समझने के लिए, खासकर जब दर्द की वजह स्पष्ट न हो।
- सीमन एनालिसिस: वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट देखने के लिए।
- हार्मोन जांच: शुक्राणु बहुत कम हों, न मिलें या हार्मोन की कमी के संकेत हों तो FSH, LH और टेस्टोस्टेरोन जैसी जांचें।
हाल के बुखार या संक्रमण के तुरंत बाद वीर्य रिपोर्ट खराब आ सकती है। इसलिए एक रिपोर्ट को अंतिम फैसला न मानें। शुक्राणु बनने के चक्र को देखते हुए डॉक्टर अक्सर ठीक होने के लगभग तीन महीने बाद दोबारा जांच की सलाह दे सकते हैं। इसका मतलब शुरुआती परामर्श टालना नहीं है।
PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में पुरुष प्रजनन क्षमता का मूल्यांकन कराते समय पुरानी रिपोर्ट और बीमारी का समय साथ बताएं। जरूरत होने पर हार्मोन संबंधी जांच की योजना बनाई जा सकती है।
मम्प्स ऑर्काइटिस का इलाज कैसे होता है?
मम्प्स एक वायरल बीमारी है। सामान्य मम्प्स ऑर्काइटिस में एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करते। इलाज मुख्य रूप से दर्द और सूजन कम करने, आराम देने तथा दूसरी वजहों को पहचानने पर केंद्रित रहता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दर्द या बुखार की दवा दी जा सकती है।
- आराम करें और पर्याप्त पानी पिएं।
- आरामदायक, सहारा देने वाला अंडरवियर पहनें।
- कपड़े में लपेटकर ठंडी पट्टी लगाएं; बर्फ सीधे त्वचा पर न रखें।
- दर्द रहते भारी व्यायाम, वजन उठाने और दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचें।
अंडकोष की मालिश, गर्म तेल, बिना सलाह स्टेरॉयड या तथाकथित शुक्राणु बढ़ाने वाली दवाएं न लें। बाहर से लिया गया टेस्टोस्टेरोन भी शुक्राणु उत्पादन दबा सकता है, इसलिए संतान की योजना हो तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
दर्द या बुखार बढ़े, सूजन कम न हो या नई परेशानी आए तो दोबारा जांच कराएं। लक्षण ठीक होने के बाद भी अंडकोष के आकार में बदलाव लगे तो उसे नजरअंदाज न करें।
क्या प्राकृतिक गर्भधारण संभव है?
हां, गलसुआ के बाद भी प्राकृतिक गर्भधारण संभव हो सकता है। अगला कदम मौजूदा वीर्य रिपोर्ट, बीमारी से उबरने के समय, साथी की उम्र और अन्य प्रजनन कारकों पर निर्भर करता है। हर दंपति को IVF की जरूरत नहीं होती।
शुक्राणु की समस्या बनी रहे तो विशेषज्ञ परिस्थिति के अनुसार उपचार बताते हैं। कुछ स्थितियों में IUI और अधिक गंभीर पुरुष-कारक समस्या में IVF के साथ ICSI उपचार पर चर्चा हो सकती है। वीर्य में शुक्राणु न मिलने पर आगे की जांच जरूरी है; किसी प्रक्रिया से शुक्राणु मिलने की गारंटी नहीं होती।
आमतौर पर नियमित असुरक्षित संबंधों के बावजूद 12 महीने में गर्भधारण न हो तो जांच करानी चाहिए। महिला साथी की उम्र 35 वर्ष या अधिक हो तो छह महीने बाद सलाह लें। दोनों अंडकोष में ऑर्काइटिस, अंडकोष छोटे होने या पहले से खराब रिपोर्ट की स्थिति में इतना इंतजार करना जरूरी नहीं। दोनों साथियों का मूल्यांकन साथ होना बेहतर है।
गलसुआ से बचाव के लिए क्या करें?
मम्प्स से बचाव का प्रमुख तरीका मम्प्स-युक्त टीका, जैसे MMR, है। अपना टीकाकरण रिकॉर्ड डॉक्टर को दिखाकर पूछें कि अतिरिक्त खुराक की जरूरत है या नहीं। MR और MMR अलग टीके हैं; MR में मम्प्स का घटक नहीं होता। टीका पहले से हो चुके संक्रमण का इलाज नहीं करता।
गलसुआ होने पर लार वाली ग्रंथि की सूजन शुरू होने के बाद पांच दिनों तक दूसरों से नजदीकी संपर्क से बचें। गिलास, बोतल और चम्मच साझा न करें तथा हाथ साफ रखें। काम या कॉलेज से दूरी रखने की सलाह भी लें।
गलसुआ और पुरुष प्रजनन क्षमता को लेकर चिंता है तो अनुमान लगाने के बजाय सही समय पर जांच कराएं। PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में मार्गदर्शन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें। अचानक तेज अंडकोष दर्द में अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें, सीधे इमरजेंसी जाएं।
Frequently asked questions
क्या हर पुरुष को गलसुआ के बाद बांझपन होता है?
नहीं। हर पुरुष में अंडकोष की सूजन नहीं होती और सूजन होने पर भी स्थायी नुकसान जरूरी नहीं है। असर एक या दोनों अंडकोष के प्रभावित होने और मौजूदा शुक्राणु उत्पादन पर निर्भर करता है।
गलसुआ ठीक होने के बाद वीर्य जांच कब करानी चाहिए?
शुरुआती जांच का समय डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार तय करते हैं। हाल का बुखार रिपोर्ट को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है, इसलिए ठीक होने के लगभग तीन महीने बाद दोबारा जांच की जरूरत हो सकती है।
क्या अंडकोष की सूजन में एंटीबायोटिक लेना जरूरी है?
मम्प्स वायरस पर एंटीबायोटिक असर नहीं करते। अगर डॉक्टर को बैक्टीरिया से हुए किसी अलग संक्रमण का संदेह हो तो वे एंटीबायोटिक दे सकते हैं। खुद से दवा शुरू न करें।
एक अंडकोष प्रभावित होने पर क्या पिता बन सकते हैं?
हां, दूसरा अंडकोष स्वस्थ हो तो पर्याप्त शुक्राणु बनना संभव है। गर्भधारण की संभावना समझने के लिए वीर्य जांच और जरूरत के अनुसार दोनों साथियों का मूल्यांकन किया जाता है।
क्या गलसुआ का टीका पुरानी प्रजनन समस्या ठीक कर सकता है?
नहीं। मम्प्स-युक्त टीका संक्रमण से बचाव के लिए है, पहले से हुए अंडकोष के नुकसान को ठीक करने के लिए नहीं। पुरानी समस्या में मौजूदा प्रजनन क्षमता की जांच के आधार पर सलाह दी जाती है।