IVF फेल होने के कारण और आगे क्या करें – कानपुर
Medically reviewed by Dr. Monica Sachdeva · Updated 5 Oct 2026
IVF का नतीजा नकारात्मक आने पर हर बार एक ही वजह जिम्मेदार नहीं होती। जानिए पिछले साइकिल से क्या समझना है, कौन-सी जांच सच में जरूरी है और अगली कोशिश की तैयारी कैसे करें।
IVF की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर सबसे कठिन सवाल अक्सर यही होता है—“हमने सब ठीक किया, फिर ऐसा क्यों हुआ?” दवाएं समय पर लीं, अस्पताल के चक्कर लगाए, उम्मीद संभाली; फिर भी नतीजा मनचाहा नहीं आया। ऐसे में दुख, गुस्सा या अगली कोशिश का डर स्वाभाविक है। लेकिन एक असफल साइकिल का मतलब यह नहीं कि आगे गर्भधारण संभव नहीं है। IVF फेल होने के कारण और आगे क्या करें – कानपुर में इसका उपयोगी जवाब आपकी पिछली रिपोर्ट, उम्र, भ्रूण के विकास और गर्भाशय की स्थिति को साथ देखकर मिलता है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि असफलता किस चरण पर हुई, न कि तुरंत किसी महंगी जांच या नए इलाज की ओर बढ़ना।
1. IVF किस चरण पर रुका, पहले यह समझें
“IVF फेल” एक सामान्य शब्द है, लेकिन इसके पीछे अलग-अलग स्थितियां हो सकती हैं। कभी पर्याप्त अंडे नहीं मिलते, कभी निषेचन नहीं होता, कभी भ्रूण आगे नहीं बढ़ते। कुछ मामलों में ट्रांसफर के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव आता है; कुछ में शुरुआती गर्भधारण के बाद गर्भ रुक जाता है। इन सभी की समीक्षा एक जैसी नहीं होती।
रिपोर्ट में इन चरणों को अलग करके देखें
- अंडाशय की प्रतिक्रिया: दवाओं के बाद कितने फॉलिकल बने और कितने परिपक्व अंडे मिले?
- निषेचन: कितने अंडों से भ्रूण बने और किस तरीके से निषेचन कराया गया?
- भ्रूण का विकास: भ्रूण किस दिन तक बढ़े और उनकी स्थिति क्या थी?
- ट्रांसफर और उसके बाद: ट्रांसफर सहज था या कठिन? प्रोजेस्टेरोन और अन्य दवाओं की योजना क्या थी?
“मेरी दोस्त का पहले प्रयास में हो गया, मेरा क्यों नहीं?” इसका जवाब तुलना से नहीं मिलता। समान उम्र के दो लोगों में भी अंडों, शुक्राणुओं और बीमारी के कारण अलग हो सकते हैं। कानपुर में IVF उपचार की अगली योजना पिछले साइकिल से मिली जानकारी पर आधारित होनी चाहिए।
2. अंडे, शुक्राणु और भ्रूण से जुड़े कारण
भ्रूण बनने के बाद भी हर भ्रूण स्वस्थ गर्भावस्था में नहीं बदलता। कभी उसमें क्रोमोसोम की गड़बड़ी होती है, जिसके कारण वह गर्भाशय में टिक नहीं पाता या शुरुआती गर्भ रुक जाता है। महिला की उम्र बढ़ने के साथ ऐसी गड़बड़ियों की संभावना बढ़ती है, लेकिन किसी एक असफल प्रयास का कारण केवल उम्र मान लेना ठीक नहीं।
क्या कम AMH ही असफलता की वजह है?
AMH मुख्य रूप से अंडाशय में उपलब्ध अंडों के भंडार और दवाओं पर संभावित प्रतिक्रिया का अंदाजा देता है। यह अकेले अंडों की गुणवत्ता या गर्भधारण की अंतिम संभावना नहीं बताता। कम AMH में अंडे कम मिल सकते हैं, पर रिपोर्ट देखकर “अब कोई उम्मीद नहीं” कहना सही नहीं है।
शुक्राणुओं की संख्या, गति और बनावट भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए समीक्षा केवल महिला की जांच तक सीमित न रहे। कुछ स्थितियों में पुरुष साथी का दोबारा मूल्यांकन उपयोगी होता है। शुक्राणु DNA fragmentation जैसी जांच हर असफल साइकिल के बाद जरूरी नहीं; डॉक्टर से पूछें कि उसके नतीजे से इलाज कैसे बदलेगा।
“अच्छी ग्रेडिंग वाला भ्रूण था, फिर क्यों नहीं टिका?” ग्रेडिंग भ्रूण की दिखावट और विकास बताती है, उसके सभी क्रोमोसोम सामान्य होने की गारंटी नहीं। चुनिंदा निषेचन समस्याओं में ICSI उपचार मदद कर सकता है, लेकिन यह हर तरह की IVF असफलता का समाधान नहीं है।
3. गर्भाशय, ट्यूब और हार्मोन की क्या भूमिका है?
भ्रूण के साथ गर्भाशय की अंदरूनी जगह और हार्मोन का सही तालमेल भी जरूरी है। गर्भाशय की गुहा को प्रभावित करने वाले पॉलीप, कुछ फाइब्रॉइड या अंदर के चिपकाव की जांच जरूरत के अनुसार की जाती है। हर छोटे फाइब्रॉइड को हटाना जरूरी नहीं; उसका स्थान और गर्भाशय पर असर ज्यादा मायने रखता है।
ट्यूब में पानी भरने की स्थिति, जिसे hydrosalpinx कहते हैं, कुछ मरीजों में इम्प्लांटेशन प्रभावित कर सकती है। एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, अनियंत्रित थायरॉयड या डायबिटीज भी योजना में ध्यान देने योग्य हैं। इनका होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि असफलता इन्हीं से हुई।
क्या गर्भाशय की परत कम थी?
परत की मोटाई एक जानकारी है, पूरा निष्कर्ष नहीं। उसकी बनावट, जांच का दिन, हार्मोन और पिछला इतिहास भी देखा जाता है। फ्रोजन ट्रांसफर में प्रोजेस्टेरोन शुरू करने और भ्रूण रखने के समय का तालमेल महत्वपूर्ण हो सकता है। दवा छूटी हो तो डॉक्टर को बताएं, लेकिन एक छोटी गलती को बिना समीक्षा पूरी असफलता का कारण न मानें।
सामान्य चलना, सीढ़ियां चढ़ना या खांसना भ्रूण को “गिरा” नहीं देता। लगातार बिस्तर पर रहना भी सफलता की गारंटी नहीं है। तनाव में होने के लिए खुद को दोष न दें; मानसिक सहारा जरूरी है, मगर तनाव को अकेला कारण बताना उचित नहीं।
4. अगली कोशिश से पहले कौन-सी समीक्षा उपयोगी है?
दूसरी राय लेने का उद्देश्य केवल डॉक्टर बदलना नहीं, पिछली प्रक्रिया को समझना है। स्वारूप नगर या शारदा नगर आने से पहले सभी रिपोर्ट एक फाइल में रखें। कानपुर के आसपास से आ रहे हों तो पूछ लें कि पहली मुलाकात में दोनों साथियों की जरूरत है और कोई जांच खाली पेट करनी है या नहीं।
- स्टिमुलेशन चार्ट, दवाओं की खुराक और स्कैन की तारीखें।
- अंडे निकालने, निषेचन और भ्रूण विकास की उपलब्ध रिपोर्ट।
- ट्रांसफर नोट, फ्रोजन भ्रूणों का विवरण और इस्तेमाल की गई दवाएं।
- सीमन रिपोर्ट, पुराने ऑपरेशन, गर्भपात और अन्य बीमारियों का रिकॉर्ड।
- बीटा-hCG रिपोर्ट और उसके बाद हुए अल्ट्रासाउंड, यदि हुए हों।
डॉक्टर से तीन सीधे सवाल पूछें: “सबसे संभावित समस्या क्या दिख रही है?”, “अगली बार क्या बदलेगा?” और “इस बदलाव से मदद मिलने का क्या प्रमाण है?” कभी उचित समीक्षा के बाद भी एक निश्चित कारण नहीं मिलता। यह ईमानदार अनिश्चितता है; इसका मतलब अपने आप लापरवाही या इलाज में गलती नहीं है।
हिस्टेरोस्कोपी, जेनेटिक जांच, इम्यून पैनल या endometrial receptivity test हर मरीज को नहीं चाहिए। बार-बार भ्रूण न टिकने और बार-बार गर्भपात होने की जांच भी अलग हो सकती है। अंग्रेजी में तैयारी के लिए हमारा related English guide पढ़ सकते हैं।
5. अगला इलाज चुनते समय अतिरिक्त प्रक्रियाओं को समझें
“इस बार सब कुछ करवा लेते हैं”—असफलता के बाद यह भावना समझ आती है। लेकिन ज्यादा जांच या प्रक्रियाएं हमेशा बेहतर इलाज नहीं बनातीं। हर सुझाव पर पूछें कि यह आपके किस खास निष्कर्ष को संबोधित करता है, इसके नुकसान क्या हैं और इसे न कराने का विकल्प क्या है।
किन बदलावों पर चर्चा हो सकती है?
कम अंडे मिलने पर दवाओं की योजना या ट्रिगर के समय की समीक्षा हो सकती है। उपलब्ध फ्रोजन भ्रूण होने पर पहले उनका ट्रांसफर उचित हो सकता है, जबकि कुछ लोगों को नए अंडे निकालने की जरूरत पड़ती है। भ्रूण फ्रीजिंग भविष्य के ट्रांसफर की योजना में उपयोगी है, लेकिन केवल फ्रोजन ट्रांसफर करना हर समस्या का इलाज नहीं।
PGT-A कुछ चुनी हुई परिस्थितियों में चर्चा का विषय हो सकता है। यह सभी मरीजों में जरूरी नहीं, सभी आनुवंशिक समस्याएं नहीं पकड़ता और स्वस्थ बच्चे की गारंटी नहीं देता। इसकी सीमाएं, भ्रूणों की उपलब्धता और परिणाम आने के बाद के विकल्प पहले समझें।
स्टेरॉइड, ब्लड थिनर, इंट्रालिपिड, PRP या अन्य ऐड-ऑन अपने आप शुरू न करें। कई परिस्थितियों में इनका नियमित इस्तेमाल मजबूत प्रमाण से समर्थित नहीं है। केवल घबराहट के कारण अधिक भ्रूण रखवाना भी ठीक नहीं; जुड़वां या अधिक बच्चों की गर्भावस्था के जोखिम बढ़ सकते हैं। सामान्य जानकारी के लिए NHS की IVF जानकारी उपयोगी है।
6. दोबारा IVF कब करें और बीच के समय में क्या करें?
अगला प्रयास किसी तय कैलेंडर से नहीं, आपकी शारीरिक रिकवरी और योजना से तय होना चाहिए। अंडाशय की सूजन, सिस्ट, हार्मोन, गर्भपात के बाद की स्थिति और मानसिक तैयारी को देखा जाता है। कुछ लोग जल्दी आगे बढ़ सकते हैं, जबकि कुछ को इलाज या विश्राम के लिए समय चाहिए। बढ़ती उम्र या कम अंडाशय रिजर्व में लंबे विराम के असर पर भी बात करें।
कानपुर में नौकरी, दुकान, घर की जिम्मेदारी और अस्पताल आने-जाने के बीच दवाओं का समय संभालना मुश्किल हो सकता है। मोबाइल रिमाइंडर लगाएं, दवाओं की लिखित सूची रखें और अगले स्कैन की संभावित तारीख पूछें। दवा रखने का तापमान क्लिनिक या पैक पर दिए निर्देश के अनुसार रखें, खासकर गर्मियों में।
- तंबाकू और धूम्रपान छोड़ें; शराब से बचें।
- संतुलित भोजन, नियमित नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार गतिविधि रखें।
- फोलिक एसिड और दूसरी दवाएं निर्धारित मात्रा में लें; अनजान सप्लीमेंट न जोड़ें।
- उदासी, नींद की परेशानी या रिश्ते में तनाव बढ़े तो काउंसलिंग लें।
इलाज रोकना या कुछ समय का विराम लेना हार मानना नहीं है। WHO की इन्फर्टिलिटी संबंधी जानकारी भी इसके भावनात्मक और सामाजिक बोझ को पहचानती है। खर्च दवाओं, जांच, नए साइकिल या फ्रोजन ट्रांसफर जैसे कारकों पर निर्भर करता है; परामर्श के बाद लिखित अनुमान लें।
7. डॉक्टर कब दिखाएं?
नेगेटिव रिपोर्ट आने पर क्लिनिक से संपर्क करके समीक्षा की तारीख लें। केवल घर के यूरिन टेस्ट, हल्की ब्लीडिंग या लक्षणों के आधार पर प्रोजेस्टेरोन और दूसरी दवाएं बंद न करें। तय दिन पर बीटा-hCG कराएं और रिपोर्ट के अनुसार निर्देश लें।
इन संकेतों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें
- तेज या बढ़ता पेट दर्द, बहुत पेट फूलना या लगातार उल्टी।
- सांस लेने में कठिनाई, पेशाब कम होना या तेजी से सूजन बढ़ना।
- बहुत ज्यादा रक्तस्राव, बुखार, बेहोशी या तेज चक्कर।
- पॉजिटिव टेस्ट के साथ एक तरफ पेट दर्द, कंधे में दर्द या कमजोरी।
ये संकेत OHSS, संक्रमण, रक्तस्राव या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी समस्या के हो सकते हैं। इनके लिए सामान्य अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें; नजदीकी इमरजेंसी जाएं। IVF के बाद भी गर्भ की सही जगह की पुष्टि जरूरी होती है।
रिपोर्ट पॉजिटिव होकर बाद में गिर जाए तो फॉलो-अप पूरा करें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार बीटा-hCG दोबारा या अल्ट्रासाउंड करवा सकते हैं। मन बहुत परेशान हो या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं और आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता लें।
8. कानपुर में अगला कदम: स्पष्ट जवाब के साथ योजना बनाएं
PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur के स्वारूप नगर और शारदा नगर केंद्रों में परामर्श लेते समय अपनी पूरी फाइल और सवालों की सूची साथ लाएं। टीम में Medical Director Dr. Monica Sachdeva को 18 वर्षों का अनुभव, Dr. Rit Shukla को 10 वर्षों का अनुभव है; Dr. Sakshi Tandon और Dr. Ankita, MRCOG, 6+ वर्षों के अनुभव के साथ, भी शामिल हैं। फर्टिलिटी विशेषज्ञों के बारे में जानें और उपलब्धता पूछें।
क्लिनिक के साझा परिचय में “दुनियाभर में 6000+ IVF बेबी” का उल्लेख है। फिर भी किसी केंद्र का कुल अनुभव आपके व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं होता। अच्छी सफलता दर की चर्चा में पूछें कि आंकड़े किस आयु समूह, किस उपचार और किस परिणाम के लिए हैं।
दिल्ली में क्लिनिक की उपस्थिति Pravi Global IVF Polyclinic, 41 Lajpat Nagar पर है। आप जहां भी परामर्श लें, लक्ष्य स्पष्ट रहे: पिछले प्रयास से क्या सीखा, अब क्या बदलना है और क्या अनावश्यक है। अपनी रिपोर्ट की समीक्षा और अगली योजना के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें। यह लेख सामान्य जानकारी है; व्यक्तिगत इलाज जांच और परामर्श के बाद तय होता है।
Frequently asked questions
क्या पहली बार IVF फेल होने को बार-बार इम्प्लांटेशन फेल होना कहते हैं?
नहीं, एक नेगेटिव ट्रांसफर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। डॉक्टर उम्र, ट्रांसफर हुए भ्रूणों और पिछले प्रयासों की पूरी जानकारी देखकर तय करते हैं कि अतिरिक्त जांच कब उचित है।
नेगेटिव होम टेस्ट आने पर क्या IVF की दवाएं बंद कर सकती हूं?
अपने आप दवाएं बंद न करें, क्योंकि जल्दी किया गया होम टेस्ट भरोसेमंद निष्कर्ष नहीं दे सकता। निर्धारित दिन बीटा-hCG कराएं और क्लिनिक से दवाओं के बारे में निर्देश लें।
क्या लैब बदलने से अगला IVF सफल हो जाएगा?
लैब की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल केंद्र बदलना सफलता की गारंटी नहीं। पहले निषेचन, भ्रूण विकास और ट्रांसफर की रिपोर्ट की समीक्षा कराएं, ताकि बदलाव का स्पष्ट कारण हो।
फ्रोजन भ्रूण बचे हों तो क्या दोबारा अंडे निकलवाने पड़ेंगे?
जरूरी नहीं; उपलब्ध भ्रूणों और आपकी स्थिति के अनुसार फ्रोजन ट्रांसफर अगला विकल्प हो सकता है। उम्र, भविष्य में बच्चों की योजना और भ्रूणों की उपलब्धता देखकर नए साइकिल की जरूरत पर चर्चा होती है।
क्या IVF फेल होने के बाद प्राकृतिक गर्भधारण संभव है?
कुछ दंपतियों में संभव है, लेकिन यह मूल कारण पर निर्भर करता है। दोनों ट्यूब बंद होने या गंभीर पुरुष कारक जैसी स्थितियों में संभावनाएं अलग होती हैं; प्राकृतिक प्रयास के लिए कितना समय देना उचित है, डॉक्टर से पूछें।
क्या दूसरी राय लेने से पहले सारी जांच दोबारा करवानी चाहिए?
नहीं, पहले पुरानी रिपोर्ट और साइकिल का पूरा रिकॉर्ड दिखाएं। कुछ जांच अभी उपयोगी हो सकती हैं, जबकि समय या स्वास्थ्य में बदलाव के कारण कुछ को दोहराना पड़ सकता है।
क्या डोनर अंडे एक असफल IVF के बाद जरूरी हो जाते हैं?
एक असफल प्रयास अपने आप डोनर अंडों की जरूरत साबित नहीं करता। इस विकल्प पर अंडाशय की प्रतिक्रिया, उम्र, अंडों से जुड़े निष्कर्ष और आपके व्यक्तिगत निर्णय को ध्यान में रखकर चर्चा होती है।
अगली कोशिश से पहले काम से लंबी छुट्टी लेना जरूरी है?
हर व्यक्ति को लंबी छुट्टी या लगातार बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती। स्कैन, अंडे निकालने और रिकवरी के दिनों के लिए योजना बनाएं; भारी शारीरिक काम हो तो डॉक्टर से अलग निर्देश लें।