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आईवीएफ के दौरान कब्ज हो तो सुरक्षित राहत कैसे पाएं?
हिंदी गाइड · 7 मिनट

आईवीएफ के दौरान कब्ज हो तो सुरक्षित राहत कैसे पाएं?

आईवीएफ के दौरान कब्ज में भोजन, पानी और हल्की गतिविधि से राहत मिल सकती है। जानिए किन उपायों को अपनाएं, दवा लेने से पहले क्या पूछें और कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आईवीएफ में कब्ज हो तो पर्याप्त पानी, धीरे-धीरे बढ़ाया गया फाइबर और डॉक्टर की अनुमति से हल्की चहलकदमी अक्सर राहत देते हैं। जरूरत पड़ने पर आपकी फर्टिलिटी टीम उपयुक्त कब्ज की दवा सुझा सकती है; खुद से जुलाब लेने या प्रोजेस्टेरोन बंद करने से बचें। अगर कब्ज के साथ तेज पेट दर्द, उल्टी, तेजी से पेट फूलना या पेशाब कम होना हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

आईवीएफ के दौरान कब्ज क्यों हो सकती है?

इलाज के बीच पेट भारी लगना और शौच में परेशानी होना थकाने वाला अनुभव है। ऊपर से यह चिंता भी जुड़ जाती है कि कहीं जोर लगाने से इलाज पर असर तो नहीं पड़ेगा। आम तौर पर कब्ज संभाली जा सकती है, लेकिन उसकी वजह समझना मददगार रहता है।

प्रोजेस्टेरोन आंतों की गति धीमी कर सकता है। आयरन की कुछ गोलियां, कुछ दर्दनिवारक दवाएं, कम पानी पीना और सामान्य दिनचर्या में बदलाव भी कब्ज बढ़ा सकते हैं। एग रिट्रीवल के आसपास कुछ समय खाली पेट रहने, प्रक्रिया में दी गई दवाओं और गतिविधि घटने का भी योगदान हो सकता है।

हर मरीज को एक जैसी परेशानी नहीं होती। आईवीएफ उपचार के किस चरण में आप हैं, कौन-सी दवाएं चल रही हैं और पहले से कब्ज रहती है या नहीं, इन बातों के आधार पर सलाह बदल सकती है।

क्या यह कब्ज है या सिर्फ पेट फूलना?

हर दिन शौच न होना अपने आप में कब्ज नहीं है। अपने सामान्य पैटर्न से तुलना करें। मल सख्त या सूखा होना, बहुत जोर लगाना, शौच के बाद भी पेट साफ न लगना या सामान्य से कम बार मल आना कब्ज के संकेत हो सकते हैं।

क्या आपका मल सामान्य है, लेकिन पेट अचानक ज्यादा फूल रहा है? इसे केवल कब्ज मानकर नजरअंदाज न करें। खासकर ओवेरियन स्टिमुलेशन और एग रिट्रीवल के बाद बढ़ती सूजन के बारे में अपनी टीम को बताएं।

घर पर सुरक्षित राहत के लिए क्या करें?

1. दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं

सुबह बहुत सारा पानी पीकर बाकी दिन भूल जाने के बजाय पानी की बोतल पास रखें। सामान्य पानी, सूप और नियमित भोजन से मिलने वाला तरल मदद कर सकता है। हल्का पीला पेशाब अक्सर पर्याप्त पानी का संकेत होता है, हालांकि कुछ दवाएं उसका रंग बदल सकती हैं।

जबरदस्ती कई लीटर पानी पीना जरूरी नहीं है। अगर किडनी या हृदय की समस्या है, या डॉक्टर ने तरल की मात्रा तय की है, तो वही निर्देश मानें। पेशाब कम होने और पेट तेजी से बढ़ने पर केवल पानी बढ़ाकर इंतजार न करें।

2. फाइबर बढ़ाएं, लेकिन एकदम नहीं

फाइबर मल को नरम और आसानी से निकलने योग्य बनाने में मदद करता है। अचानक बहुत ज्यादा चोकर या कच्चा सलाद लेने से गैस और भारीपन बढ़ सकता है। अपनी थाली में धीरे-धीरे बदलाव करें और साथ में पर्याप्त पानी लें।

  • नाश्ते में दलिया, ओट्स या सब्जियों वाला पोहा चुन सकती हैं।
  • दोपहर और रात में दाल, पकी सब्जी और साबुत अनाज की रोटी शामिल करें।
  • फल का जूस लेने के बजाय अच्छी तरह धुला साबुत फल, जैसे नाशपाती या संतरा, खाएं।
  • राजमा या छोले से ज्यादा गैस होती है तो कम मात्रा से शुरू करें; सहन होने वाली दाल चुनें।

किसी एक फल या घरेलू नुस्खे को इलाज न मानें। कनपुर की गर्मी में पानी कम पड़ना आसान है, लेकिन केवल मौसम को दोष देने के बजाय भोजन और दवाओं पर भी नजर रखें।

3. हल्की चहलकदमी रखें, सख्त व्यायाम नहीं

यदि डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो घर में या समतल जगह पर आराम से थोड़ी देर चलना मदद कर सकता है। लगातार लेटे रहने से कब्ज बढ़ सकती है। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद भी आम तौर पर लगातार बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती; अपने उपचार संबंधी निर्देश मानें।

स्टिमुलेशन के दौरान अंडाशय बढ़ सकते हैं। इसलिए दौड़ना, कूदना, भारी वजन उठाना, पेट दबाने वाली एक्सरसाइज या शरीर को तेजी से मोड़ने वाले योगासन न करें। पेट दर्द हो तो गतिविधि रोककर टीम से सलाह लें।

4. शौच के लिए आरामदायक दिनचर्या बनाएं

नाश्ते के बाद कुछ समय शौच के लिए रखें और इच्छा होने पर उसे टालें नहीं। वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करते समय पैरों के नीचे छोटा, स्थिर स्टूल रखने से कुछ लोगों को आराम मिलता है। शरीर थोड़ा आगे झुकाएं और सांस सहज रखें।

बहुत देर बैठकर जोर लगाने की कोशिश न करें। मल नहीं आ रहा तो उठ जाएं और बाद में प्रयास करें। मोबाइल लेकर लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने से भी बचें, खासकर यदि बवासीर की तकलीफ हो।

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद जोर लगाने से भ्रूण निकल सकता है?

सामान्य शौच करने से भ्रूण बाहर नहीं निकलता। आंत और गर्भाशय अलग अंग हैं; टॉयलेट जाना या सामान्य चलना-फिरना भ्रूण को बाहर नहीं धकेलता। इसलिए शौच रोककर रखने की जरूरत नहीं है।

फिर भी लगातार तेज जोर लगाना ठीक नहीं, क्योंकि इससे बवासीर या गुदा में छोटी दरार का दर्द बढ़ सकता है। लक्ष्य शौच से बचना नहीं, बल्कि मल को नरम रखना है। कब्ज होना अपने आप में एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन होने या न होने का संकेत भी नहीं है।

कब्ज की दवा कब और कौन-सी ली जा सकती है?

खानपान में बदलाव से राहत न मिले, मल बहुत सख्त हो या दर्द के कारण शौच मुश्किल हो, तो फर्टिलिटी टीम से पूछें। हर दवा सभी मरीजों के लिए सही नहीं होती। ट्रांसफर हो चुका है या गर्भावस्था की संभावना है, यह जानकारी सलाह लेते समय जरूर दें।

डॉक्टर जरूरत के अनुसार इसबगोल जैसे फाइबर सप्लीमेंट या लैक्टुलोज और पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल जैसे ऑस्मोटिक लैक्सेटिव सुझा सकते हैं। इसबगोल के साथ पर्याप्त पानी जरूरी है; इसे दूसरी दवाओं से कितने अंतर पर लेना है, यह भी पूछें। यहां मात्रा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि लक्षण और स्वास्थ्य की स्थिति अलग हो सकती है।

  • अरंडी का तेल, तेज जुलाब या अनजान हर्बल चूर्ण खुद से न लें।
  • एनिमा या सपोजिटरी इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
  • “नेचुरल” या “पेट साफ करने वाला” लिखा होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
  • प्रोजेस्टेरोन या आयरन अपने आप बंद न करें; टीम जरूरत पर विकल्प सुझा सकती है।

प्रोजेस्टेरोन की खुराक भूलने को लेकर उलझन हो तो प्रोजेस्टेरोन की मिस्ड डोज संबंधी जानकारी देखें और अपने निर्धारित शेड्यूल के लिए क्लिनिक से पुष्टि करें। कब्ज की वजह से खुराक छोड़ना समाधान नहीं है।

इन लक्षणों में इंतजार न करें

एग रिट्रीवल के बाद हर तरह का पेट दर्द कब्ज नहीं होता। ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम यानी OHSS या दूसरी समस्या में भी पेट फूल सकता है। नीचे दिए संकेतों में तुरंत अपनी फर्टिलिटी टीम से संपर्क करें:

  • तेज, बढ़ता हुआ या एक तरफ अचानक शुरू हुआ पेट दर्द।
  • बार-बार उल्टी, पानी न रुकना या बुखार।
  • पेट का तेजी से फूलना, अचानक वजन बढ़ना या पेशाब कम होना।
  • मल और गैस दोनों बंद होना, खासकर दर्द या उल्टी के साथ।
  • मल में ज्यादा खून, काला तारकोल जैसा मल या बहुत कमजोरी।

सांस फूलने, सीने में दर्द, बेहोशी या असहनीय दर्द में नजदीकी इमरजेंसी जाएं; क्लिनिक के जवाब का इंतजार न करें। हल्की परेशानी भी लगातार बनी रहे या बढ़े तो नियमित मुलाकात तक टालने के बजाय सलाह लें।

डॉक्टर को क्या बताएं?

आखिरी बार सामान्य शौच कब हुआ, मल कितना सख्त है, गैस निकल रही है या नहीं और दर्द कहां है, यह नोट कर लें। साथ में दवाओं व सप्लीमेंट की सूची रखें। पहले से बवासीर, थायरॉइड या लंबे समय की कब्ज है तो वह भी बताएं। इससे टीम को तय करने में मदद मिलेगी कि घरेलू बदलाव पर्याप्त हैं या जांच चाहिए।

पेट साफ होने की बात पूछने में संकोच स्वाभाविक है, लेकिन यह आपकी देखभाल का सामान्य हिस्सा है। PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur की टीम से बात करने के लिए संपर्क विवरण देखें। छोटी लगने वाली परेशानी बताना भी जरूरी है, खासकर जब उससे भोजन, नींद या दवा लेने में दिक्कत हो रही हो।

आईवीएफ में कब्ज से परेशान हैं? PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur में अपनी दवाओं और लक्षणों के अनुसार सलाह के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें।

Frequently asked questions

क्या आईवीएफ में कब्ज होना सामान्य है?

आईवीएफ के दौरान प्रोजेस्टेरोन, कुछ दूसरी दवाओं, कम पानी और गतिविधि घटने से कब्ज हो सकती है। हालांकि तेज दर्द, उल्टी या तेजी से पेट फूलने को सामान्य कब्ज मानकर नहीं छोड़ना चाहिए।

क्या शौच में जोर लगाने से एम्ब्रियो बाहर आ सकता है?

नहीं, सामान्य शौच करने से एम्ब्रियो बाहर नहीं निकलता। आंत और गर्भाशय अलग अंग हैं। फिर भी ज्यादा जोर लगाने से बवासीर या गुदा में दरार की परेशानी बढ़ सकती है, इसलिए मल नरम रखने के उपाय करें।

क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद इसबगोल ले सकते हैं?

डॉक्टर जरूरत के अनुसार इसबगोल सुझा सकते हैं। इसे पर्याप्त पानी के साथ लेना जरूरी है और दूसरी दवाओं से अंतर रखने की जरूरत हो सकती है। पेट में तेज दर्द, उल्टी या गैस बंद हो तो खुद से इसे न लें।

कब्ज होने पर क्या प्रोजेस्टेरोन बंद कर देना चाहिए?

नहीं। प्रोजेस्टेरोन की खुराक खुद से कम या बंद न करें। अपनी फर्टिलिटी टीम को परेशानी बताएं, ताकि उपचार जारी रखते हुए कब्ज के लिए उपयुक्त सलाह मिल सके।

एग रिट्रीवल के बाद पेट फूलने पर कब तुरंत मदद लें?

पेट तेजी से फूलने, तेज दर्द, बार-बार उल्टी, पेशाब कम होने या अचानक वजन बढ़ने पर तुरंत फर्टिलिटी टीम से संपर्क करें। सांस फूलना, सीने में दर्द या बेहोशी हो तो नजदीकी इमरजेंसी जाएं।

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