0% interest EMI options · Clear treatment costs explained before you begin · Book consultation

क्या आईयूआई में बेहोशी की दवा दी जाती है?
हिंदी गाइड · 6 मिनट

क्या आईयूआई में बेहोशी की दवा दी जाती है?

आईयूआई में आमतौर पर बेहोशी की दवा नहीं दी जाती और आप पूरी प्रक्रिया के दौरान होश में रहती हैं। जानिए इसमें कैसा महसूस होता है, तैयारी कैसे करें और कब डॉक्टर को बताना चाहिए।

नहीं, आईयूआई (IUI) में आमतौर पर बेहोशी की दवा या एनेस्थीसिया नहीं दिया जाता। आप पूरी प्रक्रिया के दौरान होश में रहती हैं और डॉक्टर से बात कर सकती हैं। इसमें कुछ देर हल्का दबाव या माहवारी जैसी ऐंठन हो सकती है, लेकिन तेज दर्द होना सामान्य नहीं है।

पहली बार आईयूआई की सलाह मिले तो मन में कई सवाल आते हैं: क्या इंजेक्शन लगेगा, क्या ऑपरेशन होगा, क्या दर्द सहना पड़ेगा? अगर आप भी “iui mein behosh karte hain kya” खोज रही हैं, तो पहले यह समझ लीजिए कि आईयूआई कोई सर्जरी नहीं है। प्रक्रिया को जान लेने से अक्सर डर काफी कम हो जाता है।

आईयूआई क्या है और इसमें बेहोशी क्यों नहीं दी जाती?

आईयूआई का पूरा नाम इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन है। इसमें लैब में तैयार किए गए शुक्राणुओं को एक पतली, लचीली नली यानी कैथेटर से गर्भाशय में रखा जाता है। ऐसा अंडा निकलने, यानी ओव्यूलेशन के आसपास किया जाता है, ताकि शुक्राणुओं और अंडे के मिलने की संभावना बढ़ सके।

इस प्रक्रिया में पेट पर चीरा नहीं लगता और अंडे निकालने के लिए सुई भी नहीं डाली जाती। कैथेटर योनि और गर्भाशय के मुंह, यानी सर्विक्स, से होकर अंदर जाता है। शुक्राणु डालने वाला हिस्सा सामान्यतः कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है। इसलिए अधिकांश महिलाओं को बेहोशी या सुन्न करने वाली दवा की जरूरत नहीं पड़ती।

बेहोशी न देने का मतलब यह नहीं कि आपके आराम को नजरअंदाज किया जा रहा है। एनेस्थीसिया की अपनी तैयारी और संभावित जोखिम होते हैं; जब उसकी जरूरत न हो, तो उसे नियमित रूप से देना उचित नहीं होता। प्रक्रिया के बारे में और समझने के लिए कानपुर में आईयूआई उपचार की जानकारी पढ़ सकती हैं।

आईयूआई के दौरान क्या महसूस होता है?

हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। किसी को केवल हल्का दबाव महसूस होता है, तो किसी को थोड़ी देर ऐंठन होती है। यदि पहले किसी आंतरिक जांच में दर्द हुआ हो, तो घबराहट होना स्वाभाविक है। यह बात डॉक्टर से छिपाने की जरूरत नहीं है।

प्रक्रिया आमतौर पर ऐसे होती है

  • आपको जांच वाली टेबल पर आराम से लिटाया जाता है और प्रक्रिया समझाई जाती है।
  • सर्विक्स देखने के लिए योनि में स्पेकुलम नाम का उपकरण धीरे से लगाया जाता है। इससे खिंचाव या दबाव महसूस हो सकता है।
  • पतले कैथेटर से तैयार शुक्राणु गर्भाशय में डाले जाते हैं। इस दौरान थोड़ी ऐंठन हो सकती है।
  • कैथेटर और स्पेकुलम निकाल दिए जाते हैं। उसके बाद टीम आपकी स्थिति देखकर आगे की सलाह देती है।

अगर दर्द हो, तो उसी समय बताएं। चुपचाप सहते रहना जरूरी नहीं है। डॉक्टर रुककर आपकी स्थिति, उपकरण की जगह या कैथेटर डालने के तरीके को दोबारा देख सकते हैं। धीमी सांस लेना और कंधों व पैरों को ढीला छोड़ना कुछ महिलाओं को सहज महसूस करा सकता है।

क्या कभी बेहोशी या दर्द की दवा की जरूरत पड़ सकती है?

विशेष परिस्थितियों में आराम और दर्द नियंत्रण की अलग योजना बनानी पड़ सकती है, लेकिन यह नियमित आईयूआई का हिस्सा नहीं है। पहले आंतरिक जांच में बहुत दर्द होना, योनि की मांसपेशियों का अनचाहे कस जाना या सर्विक्स से कैथेटर निकालने-डालने में कठिनाई होना डॉक्टर को पहले से बताना उपयोगी है।

बहुत अधिक घबराहट, पुराने किसी तकलीफदेह अनुभव या पेल्विक दर्द की जानकारी भी साझा करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर पहले वजह समझेंगे और आपके साथ सुरक्षित विकल्पों पर चर्चा करेंगे। केवल डर लगने का अर्थ यह नहीं कि आपको बेहोश करना ही पड़ेगा।

अपने मन से नींद की गोली, घबराहट कम करने वाली दवा या दर्द की दवा लेकर न जाएं। जरूरत पड़ने पर कौन-सी दवा ठीक रहेगी, यह आपकी सेहत और उपचार योजना देखकर तय होना चाहिए।

आईयूआई और आईवीएफ की बेहोशी में क्या अंतर है?

अक्सर किसी परिचित से आईवीएफ में बेहोशी देने की बात सुनकर लगता है कि आईयूआई में भी ऐसा होगा। दोनों की प्रक्रियाएं अलग हैं। आईवीएफ में अंडे निकालने की प्रक्रिया के लिए आमतौर पर सेडेशन या एनेस्थीसिया दिया जाता है, जबकि आईयूआई में शरीर से अंडे निकाले ही नहीं जाते।

आईयूआई में निषेचन शरीर के अंदर होता है। आईवीएफ में अंडे और शुक्राणु लैब में मिलाए जाते हैं। केवल बेहोशी लगेगी या नहीं, इस आधार पर उपचार चुनना सही नहीं है; चुनाव उम्र, रिपोर्ट, नलियों की स्थिति और शुक्राणुओं की जांच जैसे पहलुओं पर होता है।

आईयूआई के दिन कैसे तैयारी करें?

क्या खाली पेट जाना होता है?

बिना बेहोशी होने वाली सामान्य आईयूआई के लिए प्रायः खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। हल्का भोजन करके जाना अक्सर ठीक रहता है, लेकिन अपनी क्लिनिक की हिदायत मानें। यदि किसी खास वजह से सेडेशन की योजना हो, तो खाने-पीने के निर्देश अलग होंगे।

क्या मूत्राशय भरा रखना चाहिए?

कुछ स्थितियों में टीम थोड़ा भरा हुआ मूत्राशय रखने को कह सकती है, जिससे प्रक्रिया में मदद मिले। हर महिला के लिए यह जरूरी नहीं है। पानी कितना पीना है और पेशाब रोकना है या नहीं, यह पहले पूछ लें; इतनी असुविधा न सहें कि बैठना मुश्किल हो जाए।

और किन बातों का ध्यान रखें?

  • आरामदायक कपड़े पहनें और जांच रिपोर्ट व दवाओं की सूची साथ रखें।
  • ट्रिगर इंजेक्शन या दूसरी दवा का बताया गया समय न बदलें।
  • वीर्य का नमूना देने और पहुंचाने के लिए लैब के निर्देशों का पालन करें।
  • दवा से एलर्जी, बुखार, असामान्य डिस्चार्ज या पेशाब में जलन हो तो पहले बताएं।

आईयूआई में सही समय का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए अल्ट्रासाउंड और कभी-कभी हार्मोन जांच की मदद ली जाती है। फॉलिक्युलर मॉनिटरिंग अंडाशय में बढ़ते फॉलिकल और उपचार की प्रगति देखने में मदद करती है।

आईयूआई के बाद आराम और घर लौटना

सामान्य, बिना बेहोशी वाली आईयूआई के बाद अक्सर उसी दिन घर जा सकती हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने से गर्भधारण की संभावना बढ़ती है, इसका भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। हल्के रोजमर्रा के काम और सामान्य चलना-फिरना आमतौर पर ठीक रहता है।

कानपुर के ट्रैफिक में लंबा सफर हो तो अपनी सुविधा के लिए किसी परिचित को साथ ला सकती हैं। केवल आईयूआई होने के कारण साथ में अटेंडेंट जरूरी नहीं होता, लेकिन दर्द, चक्कर या कोई विशेष दवा मिलने पर खुद वाहन न चलाएं।

उठने, पेशाब करने या थोड़ा तरल बाहर आने से यह न मानें कि सारे शुक्राणु बाहर निकल गए। तैयार शुक्राणु गर्भाशय में रखे जाते हैं। व्यायाम, भारी सामान उठाने और संबंध बनाने के बारे में अपनी उपचार टीम की सलाह लें, खासकर यदि अंडाशय बढ़े हुए हों।

कौन-से लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें?

हल्की ऐंठन या बहुत थोड़ी स्पॉटिंग कभी-कभी हो सकती है। लेकिन नीचे दिए लक्षणों को सामान्य मानकर इंतजार न करें:

  • तेज या लगातार बढ़ता पेट अथवा पेल्विक दर्द।
  • बुखार, दुर्गंध वाला डिस्चार्ज या ज्यादा रक्तस्राव।
  • पेट बहुत फूलना, बार-बार उल्टी होना या पेशाब कम आना।
  • सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी या बहुत कमजोरी।

अंडाशय को उत्तेजित करने वाली कुछ दवाओं के साथ ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम जैसी जटिलता का जोखिम हो सकता है। यह आईयूआई के कैथेटर से नहीं, दवाओं के प्रति अंडाशय की प्रतिक्रिया से जुड़ा होता है। गंभीर लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

डर लगे तो डॉक्टर से खुलकर बात करें

आप पूछ सकती हैं: “अगर मुझे दर्द हुआ तो क्या आप रुकेंगे?” या “क्या पहले पूरी प्रक्रिया समझा देंगे?” ऐसे सवाल बिल्कुल उचित हैं। PRAVI IVF & Fertility Centre, Kanpur में परामर्श के समय अपना डर, पिछला अनुभव और रिपोर्ट साथ रखें। फर्टिलिटी विशेषज्ञों से चर्चा करके तैयारी और बाद की देखभाल स्पष्ट कर सकती हैं।

आईयूआई या बेहोशी को लेकर कोई सवाल बाकी है? PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट लें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें। अपनी शंकाएं लिखकर लाएं, ताकि मुलाकात में हर जरूरी बात पूछ सकें।

Frequently asked questions

क्या आईयूआई में बेहोशी का इंजेक्शन लगता है?

आमतौर पर नहीं। सामान्य आईयूआई बिना बेहोशी के होती है और आप डॉक्टर से बात कर सकती हैं। किसी विशेष चिकित्सकीय जरूरत में दर्द नियंत्रण या सेडेशन की अलग योजना बनाई जा सकती है।

क्या आईयूआई में बहुत दर्द होता है?

अधिकांश महिलाओं को हल्का दबाव या थोड़ी देर माहवारी जैसी ऐंठन महसूस होती है। तेज दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं; उसे चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है।

क्या आईयूआई के लिए खाली पेट जाना चाहिए?

बिना बेहोशी वाली सामान्य आईयूआई में प्रायः खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। क्लिनिक से पहले निर्देश लें, क्योंकि सेडेशन की योजना होने पर खाने-पीने के नियम अलग होते हैं।

क्या आईयूआई के बाद पूरे दिन लेटना जरूरी है?

नहीं, लंबे बेड रेस्ट से गर्भधारण की संभावना बढ़ने का भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। सामान्य हल्की गतिविधियां अक्सर की जा सकती हैं, लेकिन अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह मानें।

आईयूआई के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट कब करना चाहिए?

आमतौर पर आईयूआई के लगभग दो सप्ताह बाद या डॉक्टर की बताई तारीख पर टेस्ट किया जाता है। बहुत जल्दी जांच करने पर नतीजा भ्रामक हो सकता है, खासकर यदि एचसीजी ट्रिगर इंजेक्शन दिया गया हो।

Have a question about your own case?

6000+ IVF babies worldwide. Talk to our fertility team in Kanpur — we will review your reports and explain the options honestly.

More articles