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ऑपरेशन से मिले स्पर्म से आईसीएसआई कैसे होता है?
हिंदी गाइड · 7 मिनट

ऑपरेशन से मिले स्पर्म से आईसीएसआई कैसे होता है?

वीर्य में स्पर्म न मिलने पर कुछ पुरुषों में छोटी सर्जिकल प्रक्रिया से स्पर्म प्राप्त किए जा सकते हैं। जानिए इन स्पर्म से ICSI कैसे होती है, पहले कौन-सी जाँच जरूरी हैं और उपचार की योजना कैसे बनती है।

ऑपरेशन से मिले स्पर्म से ICSI में एम्ब्रायोलॉजिस्ट लैब में एक जीवित स्पर्म चुनकर उसे सीधे परिपक्व अंडे के अंदर डालते हैं। स्पर्म अंडकोष या उससे जुड़ी नली, एपिडिडिमिस, से लिया जा सकता है; इसी उपचार को surgically retrieved sperm icsi कहा जाता है। स्पर्म मिलना, अंडे का निषेचन होना और गर्भ ठहरना अलग-अलग चरण हैं, इसलिए किसी भी चरण की गारंटी नहीं होती।

रिपोर्ट में ‘स्पर्म नहीं मिले’ पढ़ना परेशान कर सकता है। अक्सर पहला सवाल होता है, “क्या अपने स्पर्म से बच्चा होना संभव नहीं है?” केवल एक रिपोर्ट से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। पहले यह समझना जरूरी है कि स्पर्म बाहर आने के रास्ते में रुकावट है या अंडकोष में उनका बनना कम हो रहा है।

वीर्य में स्पर्म न होने पर भी ऑपरेशन से कैसे मिल सकते हैं?

वीर्य में स्पर्म न मिलने की स्थिति को एजूस्पर्मिया कहते हैं। इसकी पुष्टि आमतौर पर दोबारा सीमेन जाँच और लैब में नमूने की उचित जाँच से की जाती है। दो मुख्य स्थितियों में आगे की योजना अलग होती है।

स्पर्म बन रहे हों, लेकिन रास्ता बंद हो

इसे ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया कहते हैं। जन्म से नली का न होना, पुरानी सर्जरी या दूसरी रुकावट के कारण स्पर्म वीर्य तक नहीं पहुँच पाते। ऐसे मामलों में एपिडिडिमिस या अंडकोष से स्पर्म मिल सकते हैं। कुछ लोगों में रुकावट ठीक करने की सर्जरी भी विकल्प होती है; चुनाव दोनों पार्टनर की स्थिति देखकर होता है।

अंडकोष में स्पर्म का बनना बहुत कम हो

इसे नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया कहते हैं। अंडकोष के कुछ छोटे हिस्सों में ही स्पर्म बन रहे हो सकते हैं। उन्हें ढूँढ़ने के लिए विशेष सर्जिकल तकनीक की जरूरत पड़ सकती है। इसमें स्पर्म मिलना निश्चित नहीं होता, और केवल हार्मोन रिपोर्ट देखकर पक्का उत्तर देना संभव नहीं है।

स्पर्म निकालने के कौन-से तरीके होते हैं?

हर व्यक्ति को एक जैसी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर कारण, पहले हुए उपचार और जाँचों के आधार पर तरीका चुनते हैं।

  • PESA: पतली सुई से एपिडिडिमिस से तरल लेकर स्पर्म खोजे जाते हैं। इसका उपयोग मुख्यतः रुकावट वाले मामलों में होता है।
  • TESA: सुई से अंडकोष का नमूना लेकर स्पर्म तलाशे जाते हैं।
  • TESE: छोटे चीरे से अंडकोष का ऊतक लिया जाता है और लैब में जाँचा जाता है।
  • Micro-TESE: ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की सहायता से अंडकोष में स्पर्म मिलने की संभावना वाले हिस्से खोजे जाते हैं। नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया में विशेषज्ञ इसका सुझाव दे सकते हैं।

“सबसे आसान तरीका ही मेरे लिए सही होगा” जरूरी नहीं है। सही प्रक्रिया वह है जो आपकी समस्या के अनुसार उचित हो। TESA और PESA के बारे में जानकारी लेते समय यह भी पूछें कि चुने हुए तरीके से स्पर्म न मिले तो अगली योजना क्या होगी।

ICSI से पहले किन जाँचों की जरूरत होती है?

मूल्यांकन दोनों पार्टनर का होता है। पुरुष की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक परीक्षण, सीमेन रिपोर्ट और जरूरत के अनुसार FSH, टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन देखे जाते हैं। पुराना संक्रमण, अंडकोष की सर्जरी, कीमोथेरेपी या बचपन में अंडकोष नीचे न उतरने की जानकारी भी उपयोगी है।

कुछ पुरुषों में कैरियोटाइप, Y-क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन या CFTR जैसी जेनेटिक जाँच जरूरी हो सकती है। हर व्यक्ति को सभी जाँचें नहीं चाहिए। कुछ आनुवंशिक कारण स्पर्म मिलने की संभावना या बच्चे तक समस्या पहुँचने के जोखिम को प्रभावित करते हैं, इसलिए जेनेटिक काउंसलिंग की सलाह दी जा सकती है।

महिला पार्टनर की उम्र, अंडों की उपलब्धता और गर्भाशय की स्थिति भी उपचार का समय तय करती है। पुरुष बांझपन का मूल्यांकन केवल रिपोर्ट में स्पर्म खोजने तक सीमित नहीं है; कुछ कारणों में पहले दवा या अन्य उपचार उचित हो सकता है।

Surgically retrieved sperm ICSI की चरणबद्ध प्रक्रिया

पहला चरण: स्पर्म प्राप्त करने और अंडे निकालने का समय तय करना

स्पर्म पहले निकालकर फ्रीज किए जा सकते हैं या कुछ मामलों में अंडे निकालने वाले दिन प्राप्त किए जाते हैं। जब स्पर्म मिलने को लेकर अनिश्चितता हो, तो पहले स्पर्म रिट्रीवल पर विचार किया जा सकता है। इससे महिला पार्टनर के उपचार से पहले कुछ स्पष्टता मिलती है।

फिर भी हर स्थिति में यही क्रम उपयुक्त नहीं होता। बहुत कम स्पर्म मिलने पर फ्रीजिंग और बाद में उनके उपयोग की योजना लैब टीम से विस्तार से समझनी चाहिए।

दूसरा चरण: अंडों को विकसित करना और निकालना

महिला पार्टनर को अंडे विकसित करने की दवाएँ दी जाती हैं। अल्ट्रासाउंड और जरूरत के अनुसार रक्त जाँच से निगरानी होती है। उचित समय पर अंडे निकाले जाते हैं। सभी प्राप्त अंडे परिपक्व हों, यह जरूरी नहीं; ICSI के लिए परिपक्व अंडे चुने जाते हैं।

तीसरा चरण: लैब में जीवित स्पर्म पहचानना

सर्जरी से मिले तरल या ऊतक को लैब में तैयार करके स्पर्म खोजे जाते हैं। अंडकोष से मिले स्पर्म कम चल सकते हैं या बिल्कुल न हिलते दिखें। न हिलने का अर्थ हमेशा मृत होना नहीं है; जरूरत पर उपयुक्त लैब विधि से जीवित होने का आकलन किया जाता है। केवल सामान्य आकार दिखना स्वस्थ भ्रूण की गारंटी नहीं है।

चौथा चरण: अंडे के अंदर स्पर्म डालना

बहुत बारीक उपकरण से एक स्पर्म एक परिपक्व अंडे में डाला जाता है। यह काम शरीर के अंदर नहीं, लैब में माइक्रोस्कोप की सहायता से होता है। सर्जरी से मिले स्पर्म की संख्या और गतिशीलता सीमित हो सकती है, इसलिए सामान्य IVF की तुलना में ICSI की जरूरत पड़ती है। ICSI उपचार की प्रक्रिया समझने से दोनों के बीच का फर्क स्पष्ट हो सकता है।

पाँचवाँ चरण: निषेचन की जाँच और भ्रूण की निगरानी

आमतौर पर अगले दिन निषेचन देखा जाता है। उसके बाद भ्रूणों के विकास की निगरानी होती है। हर अंडा निषेचित नहीं होता और हर निषेचित अंडा ट्रांसफर योग्य भ्रूण नहीं बनता। उपयुक्त भ्रूण का ट्रांसफर उसी चक्र में या फ्रीज करके बाद के चक्र में किया जा सकता है।

ताजे स्पर्म बेहतर हैं या फ्रीज किए हुए?

दोनों का उपयोग संभव है। निर्णय स्पर्म की संख्या, जीवित रहने की क्षमता, फ्रीजिंग के बाद उपलब्धता और महिला पार्टनर के उपचार पर निर्भर करता है। फ्रीज किए स्पर्म उपयोग योग्य हों तो दोबारा सर्जरी की जरूरत टल सकती है, लेकिन हर नमूना पिघलाने के बाद पर्याप्त उपयोग योग्य स्पर्म देगा, यह निश्चित नहीं है।

योजना बनाते समय पूछें: कितने नमूने सुरक्षित हैं, क्या वे आगे के प्रयास के लिए पर्याप्त हो सकते हैं, और जरूरत पड़ने पर दोबारा रिट्रीवल संभव है? इन सवालों के जवाब व्यक्तिगत होते हैं।

अगर ऑपरेशन में स्पर्म न मिलें तो?

इस संभावना की चर्चा प्रक्रिया से पहले होनी चाहिए। कारण और पिछली तकनीक के आधार पर आगे विशेषज्ञ समीक्षा की जा सकती है। हर बार दोबारा ऑपरेशन उपयोगी नहीं होता।

यदि अंडे पहले ही निकाले जा चुके हों, तो उन्हें फ्रीज करने जैसे विकल्प पर परिस्थिति के अनुसार विचार हो सकता है। डोनर स्पर्म अलग विकल्प है, लेकिन उसके लिए अलग काउंसलिंग और लागू नियमों के अनुसार स्पष्ट सहमति जरूरी है। बिना पहले चर्चा और सहमति के इसे अपने-आप अगला कदम नहीं माना जाता।

दर्द, आराम और सुरक्षा को लेकर क्या जानें?

प्रक्रिया के प्रकार के अनुसार लोकल एनेस्थीसिया, सेडेशन या अन्य एनेस्थीसिया दिया जा सकता है। बाद में हल्का दर्द, सूजन या नील पड़ना संभव है। रक्तस्राव, संक्रमण और अंडकोष को नुकसान जैसे जोखिम भी होते हैं। खासकर अधिक ऊतक लेने वाली प्रक्रिया के बाद टेस्टोस्टेरोन कम होने का जोखिम समझना चाहिए।

  • आराम, सपोर्टिव अंडरवियर और दवाओं के निर्देश अपनी टीम से लें।
  • भारी सामान उठाने, व्यायाम और यौन संबंध दोबारा शुरू करने का समय पूछें।
  • तेज या बढ़ता दर्द, बुखार, अधिक सूजन या घाव से स्राव हो तो तुरंत संपर्क करें।
  • टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन या जिम वाले स्टेरॉयड के उपयोग की जानकारी दें; ये स्पर्म बनना दबा सकते हैं।

परिणाम किन बातों पर निर्भर करता है?

सिर्फ स्पर्म मिलने से पूरा परिणाम तय नहीं होता। महिला की उम्र, अंडों की गुणवत्ता, एजूस्पर्मिया का कारण, स्पर्म की उपलब्धता और भ्रूण का विकास भी मायने रखते हैं। सर्जरी से मिले स्पर्म का मतलब यह नहीं कि बच्चे में समस्या जरूर होगी। जहाँ आनुवंशिक जोखिम हो, वहाँ लक्षित सलाह जरूरी है।

कानपुर या आसपास से आने वाले दंपती अगली विजिट, काम से छुट्टी और साथ आने वाले व्यक्ति की व्यवस्था पहले पूछ सकते हैं। सारी रिपोर्टें एक फाइल में रखें और दोनों पार्टनर अपने सवाल लिखकर लाएँ। निर्णय समझकर लेना है, जल्दबाजी में नहीं।

अपनी रिपोर्ट और संभावित उपचार योजना पर बात करने के लिए PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में अपॉइंटमेंट लें। समय और परामर्श संबंधी जानकारी के लिए WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क कर सकते हैं।

Frequently asked questions

क्या वीर्य में स्पर्म न मिलने पर सीधे ऑपरेशन करना पड़ता है?

नहीं। पहले एजूस्पर्मिया की पुष्टि और उसके कारण का मूल्यांकन होता है। कुछ हार्मोन संबंधी कारणों में दवा और कुछ रुकावट वाले मामलों में सुधारात्मक सर्जरी विकल्प हो सकती है।

क्या ऑपरेशन से मिला एक स्पर्म ICSI के लिए पर्याप्त है?

एक परिपक्व अंडे में एक जीवित स्पर्म डाला जाता है। कई अंडों के लिए उतने उपयोग योग्य स्पर्म चाहिए। केवल एक स्पर्म मिलने से निषेचन या गर्भधारण निश्चित नहीं होता।

क्या न हिलने वाले स्पर्म से भी ICSI हो सकती है?

कुछ मामलों में हाँ, यदि वह स्पर्म जीवित हो। अंडकोष से मिले स्पर्म कम गतिशील हो सकते हैं। एम्ब्रायोलॉजिस्ट जरूरत के अनुसार उपयुक्त विधि से उनकी जीवित रहने की क्षमता का आकलन करते हैं।

क्या हर ICSI प्रयास से पहले स्पर्म निकालने की सर्जरी होगी?

जरूरी नहीं। पहले से फ्रीज किए गए पर्याप्त उपयोग योग्य स्पर्म उपलब्ध हों तो दोबारा सर्जरी टल सकती है। फैसला सुरक्षित नमूने और उसे पिघलाने के बाद उपलब्ध स्पर्म पर निर्भर करता है।

क्या सर्जरी से मिले स्पर्म इस्तेमाल करने पर भ्रूण की जेनेटिक जाँच जरूरी है?

केवल सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल होने से हर भ्रूण की जेनेटिक जाँच जरूरी नहीं हो जाती। किसी ज्ञात आनुवंशिक समस्या या विशेष संकेत होने पर जेनेटिक काउंसलिंग और उपयुक्त जाँच पर चर्चा की जाती है।

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