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हिस्टेरोस्कोपी: बांझपन के निदान और उपचार में सहायक
हिंदी गाइड · 6 मिनट

हिस्टेरोस्कोपी: बांझपन के निदान और उपचार में सहायक

हिस्टेरोस्कोपी से गर्भाशय के भीतर की कुछ समस्याओं को पहचानने और उनका उपचार करने में मदद मिलती है। जानें यह जांच किसके लिए उपयोगी हो सकती है और कब इसकी जरूरत नहीं होती।

हिस्टेरोस्कोपी बांझपन की जांच में गर्भाशय के अंदर की बनावट को सीधे देखने की प्रक्रिया है, जिससे पॉलीप, अंदर उभरे फाइब्रॉइड या चिपकाव जैसी समस्याएं पहचानी जा सकती हैं। जरूरत होने पर कुछ समस्याओं का उपचार उसी समय किया जा सकता है, लेकिन गर्भधारण में कठिनाई वाली हर महिला को इसकी जरूरत नहीं होती।

गर्भधारण में देरी होने पर नई जांच का नाम सुनकर घबराहट होना स्वाभाविक है। जांच क्यों सुझाई गई है, उससे कौन-सी जानकारी मिलेगी और क्या उसके परिणाम से इलाज बदलेगा, इन सवालों को समझना निर्णय लेने में मदद करता है।

हिस्टेरोस्कोपी क्या है?

इस प्रक्रिया में कैमरे वाली एक पतली दूरबीन, जिसे हिस्टेरोस्कोप कहते हैं, योनि और गर्भाशय के मुंह से गर्भाशय के भीतर पहुंचाई जाती है। अंदर की जगह स्पष्ट देखने के लिए आमतौर पर तरल पदार्थ इस्तेमाल किया जाता है। पेट पर चीरा नहीं लगाया जाता।

इससे डॉक्टर गर्भाशय की अंदरूनी परत और उसकी गुहा को देखते हैं। यह अंडाशय, अंडों की गुणवत्ता या गर्भाशय के बाहर के अंगों की पूरी जांच नहीं है। ट्यूब के मुंह दिख सकते हैं, लेकिन इससे अकेले यह तय नहीं होता कि ट्यूब पूरी तरह खुली है।

डायग्नोस्टिक और ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी

  • डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी: गर्भाशय के भीतर देखकर समस्या पहचानने और जरूरत पर ऊतक का नमूना लेने के लिए।
  • ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी: उपयुक्त स्थिति में पॉलीप, कुछ फाइब्रॉइड या चिपकाव का उपचार करने के लिए।

दोनों एक ही सत्र में हो सकती हैं, लेकिन यह समस्या, उपलब्ध व्यवस्था, दर्द नियंत्रण और आपकी पहले से ली गई सहमति पर निर्भर करता है। हर जांच के साथ उपचार करना जरूरी नहीं होता।

हिस्टेरोस्कोपी बांझपन के मूल्यांकन में कब उपयोगी है?

गर्भधारण के लिए अंडोत्सर्जन, शुक्राणु, फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय सहित कई कारक महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सिर्फ गर्भाशय की जांच से पूरी वजह स्पष्ट नहीं होती। दोनों साथियों का मूल्यांकन साथ करना अक्सर उपयोगी रहता है।

डॉक्टर इन परिस्थितियों में हिस्टेरोस्कोपी पर विचार कर सकते हैं:

  • अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच में गर्भाशय की गुहा में असामान्यता दिखना।
  • पॉलीप, अंदर की ओर उभरे फाइब्रॉइड या चिपकाव का संदेह होना।
  • माहवारी के बीच रक्तस्राव या असामान्य माहवारी के साथ गर्भधारण में कठिनाई होना।
  • गर्भाशय की पिछली प्रक्रिया के बाद माहवारी बहुत कम हो जाना।
  • बार-बार गर्भपात में गर्भाशय की बनावट की जांच की जरूरत होना।

इनमें से कोई लक्षण होना अपने आप हिस्टेरोस्कोपी कराने का कारण नहीं है। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण, पिछली रिपोर्ट और गर्भधारण के प्रयास की अवधि को साथ देखकर सलाह देते हैं। महिला बांझपन के मूल्यांकन में अन्य संभावित कारण भी देखे जाते हैं।

किन समस्याओं के उपचार में मदद मिल सकती है?

गर्भाशय के पॉलीप

पॉलीप गर्भाशय की अंदरूनी परत से निकली अतिरिक्त वृद्धि होती है। कुछ परिस्थितियों में इसे हटाना उपयोगी हो सकता है। निर्णय इसके आकार, स्थान, रक्तस्राव और आगे की फर्टिलिटी योजना पर निर्भर करता है; हर छोटे पॉलीप को हटाना जरूरी नहीं है।

गुहा को प्रभावित करने वाले फाइब्रॉइड

कुछ फाइब्रॉइड गर्भाशय के अंदर की ओर उभरकर उसकी गुहा का आकार बदलते हैं। चुने हुए मामलों में इन्हें हिस्टेरोस्कोपी से हटाया जा सकता है। गर्भाशय की दीवार में गहरे या बाहर की ओर मौजूद सभी फाइब्रॉइड इस तरीके से नहीं हटते।

गर्भाशय के भीतर चिपकाव

कभी गर्भाशय के अंदर निशान जैसे ऊतक बनकर दीवारों को आपस में चिपका देते हैं। इसे इंट्रायूटेरिन एडहीजन्स कहा जाता है। हिस्टेरोस्कोपी से इन्हें पहचानकर सावधानी से अलग किया जा सकता है, हालांकि दोबारा चिपकाव बनने की संभावना के कारण फॉलो-अप जरूरी हो सकता है।

गर्भाशय में सेप्टम

सेप्टम गर्भाशय के भीतर जन्म से मौजूद एक विभाजन है। इसकी सही पहचान के लिए अक्सर 3D अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी जरूरी होती है। केवल बांझपन होने पर इसे काटने का लाभ स्पष्ट नहीं है; गर्भपात के इतिहास सहित पूरी स्थिति देखकर साझा निर्णय लिया जाता है।

क्या IVF से पहले यह जांच जरूरी है?

नहीं। यदि अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय की गुहा सामान्य है और कोई संबंधित लक्षण या संदेह नहीं है, तो हर IVF चक्र से पहले नियमित हिस्टेरोस्कोपी की सिफारिश नहीं की जाती। बिना स्पष्ट कारण अतिरिक्त प्रक्रिया करवाने से लाभ मिलना तय नहीं है।

एक या अधिक भ्रूण ट्रांसफर के बाद गर्भधारण न होने पर भी यह अपने आप अगला कदम नहीं बनती। डॉक्टर पिछली रिपोर्ट, भ्रूण और गर्भाशय से जुड़े कारकों की समीक्षा करते हैं। हिस्टेरोस्कोपी गर्भधारण या IVF की सफलता की गारंटी नहीं देती।

अल्ट्रासाउंड, HSG और हिस्टेरोस्कोपी में अंतर

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड अक्सर शुरुआती जांच है। इससे गर्भाशय, उसकी परत और अंडाशय के बारे में जानकारी मिलती है। जरूरत पर सलाइन सोनोग्राफी में तरल की मदद से गर्भाशय की गुहा को अधिक स्पष्ट देखा जाता है।

HSG मुख्य रूप से फैलोपियन ट्यूब के खुले होने और गर्भाशय की गुहा की रूपरेखा का आकलन करती है। हिस्टेरोस्कोपी सीधे अंदर देखने और कुछ समस्याओं के उपचार का अवसर देती है। इनके उद्देश्य अलग हैं; अधिक जानकारी के लिए HSG जांच की जानकारी पढ़ें।

प्रक्रिया से पहले क्या तैयारी होती है?

माहवारी आने वाली महिलाओं में इसे अक्सर माहवारी समाप्त होने के बाद और अंडोत्सर्जन से पहले रखा जाता है, जब अंदर की परत अपेक्षाकृत पतली होती है। सही समय आपकी स्थिति के अनुसार तय होगा और गर्भावस्था की संभावना को पहले बाहर करना जरूरी है।

  • पुरानी रिपोर्ट, पिछली सर्जरी और गर्भपात की जानकारी साथ लाएं।
  • दवाओं, एलर्जी और खून पतला करने वाली दवा के बारे में बताएं; खुद से दवा बंद न करें।
  • बुखार, दुर्गंध वाला स्राव या संभावित गर्भावस्था की जानकारी दें।
  • खाली पेट आने की जरूरत और घर वापसी की व्यवस्था पहले पूछें।

संभावित गर्भावस्था से बचने के लिए प्रक्रिया से पहले संबंध या गर्भनिरोध को लेकर दिए निर्देश मानें। एंटीबायोटिक या अन्य दवा अपने आप शुरू न करें। सक्रिय जननांग संक्रमण होने पर प्रक्रिया आमतौर पर टाली जाती है।

दर्द और एनेस्थीसिया को लेकर क्या जानें?

कुछ डायग्नोस्टिक प्रक्रियाएं ओपीडी में की जा सकती हैं, जबकि उपचार वाली प्रक्रिया में सेडेशन या एनेस्थीसिया की जरूरत पड़ सकती है। अनुभव व्यक्ति-व्यक्ति में अलग होता है; किसी को हल्की ऐंठन और किसी को अधिक दर्द हो सकता है।

दर्द नियंत्रण के विकल्प पहले पूछें। पिछली जांच में दर्द हुआ हो या आपको विशेष चिंता हो तो बताएं। प्रक्रिया के दौरान ज्यादा दर्द होने पर टीम को तुरंत बताना चाहिए; विराम देने या प्रक्रिया रोकने की जरूरत हो सकती है।

बाद की देखभाल और चेतावनी के संकेत

हल्की ऐंठन और थोड़ी स्पॉटिंग हो सकती है। कई महिलाएं उसी दिन घर लौटती हैं, लेकिन सामान्य काम पर लौटने का समय प्रक्रिया पर निर्भर करता है। सेडेशन या एनेस्थीसिया के बाद वाहन चलाने और अकेले रहने संबंधी निर्देशों का पालन करें।

रक्तस्राव में सैनिटरी पैड इस्तेमाल करें। संबंध बनाने, टैम्पोन इस्तेमाल करने और व्यायाम शुरू करने के बारे में डिस्चार्ज निर्देश मानें। गर्भधारण की कोशिश या भ्रूण ट्रांसफर का समय उपचार और परत के ठीक होने के अनुसार तय किया जाता है।

संभावित जटिलताओं में संक्रमण, अधिक रक्तस्राव, गर्भाशय में छेद और इस्तेमाल किए गए तरल से संबंधित समस्याएं शामिल हैं। तेज या बढ़ता पेट दर्द, बुखार, बहुत ज्यादा रक्तस्राव, दुर्गंध वाला स्राव, बेहोशी या सांस में तकलीफ हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

अपनी अगली मुलाकात में क्या पूछें?

पूछें कि किस समस्या का संदेह है, क्या कम हस्तक्षेप वाली जांच पर्याप्त होगी और परिणाम से इलाज कैसे बदलेगा। हिस्टेरोस्कोपी सेवा के बारे में जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट के साथ चर्चा करें।

PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर, उत्तर प्रदेश में परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें। अपनी चिंता और पुराने दस्तावेज साथ साझा करें, ताकि अगले कदम पर व्यक्तिगत सलाह मिल सके।

Frequently asked questions

क्या बांझपन में हर महिला को हिस्टेरोस्कोपी करानी चाहिए?

नहीं। इसकी जरूरत लक्षणों, अल्ट्रासाउंड और पिछले इलाज की जानकारी पर निर्भर करती है। गर्भाशय की गुहा सामान्य होने और कोई विशेष संदेह न होने पर नियमित हिस्टेरोस्कोपी जरूरी नहीं होती।

क्या हिस्टेरोस्कोपी से बंद फैलोपियन ट्यूब का पता चलता है?

इससे गर्भाशय के भीतर ट्यूब के मुंह देखे जा सकते हैं, लेकिन पूरी ट्यूब खुली है या नहीं, यह अकेले इससे तय नहीं होता। ट्यूब के मूल्यांकन के लिए HSG या अन्य उपयुक्त जांच की जरूरत हो सकती है।

क्या हिस्टेरोस्कोपी दर्दनाक होती है?

हल्की ऐंठन से लेकर अधिक दर्द तक हो सकता है। प्रक्रिया के प्रकार और आपकी जरूरत के अनुसार दर्द की दवा, स्थानीय एनेस्थीसिया, सेडेशन या अन्य एनेस्थीसिया पर चर्चा की जाती है।

हिस्टेरोस्कोपी के कितने समय बाद गर्भधारण की कोशिश कर सकते हैं?

इसका एक तय समय सभी के लिए नहीं है। केवल जांच हुई है या कोई उपचार भी किया गया है, तथा गर्भाशय की परत कितनी ठीक हुई है—इनके आधार पर डॉक्टर सलाह देते हैं।

क्या हिस्टेरोस्कोपी के बाद गर्भधारण निश्चित हो जाता है?

नहीं। गर्भाशय की कुछ समस्याओं का उपचार मदद कर सकता है, लेकिन गर्भधारण उम्र, अंडोत्सर्जन, शुक्राणु, ट्यूब और अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। आगे का इलाज पूरी जांच के आधार पर तय होता है।

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