बुखार के बाद स्पर्म टेस्ट कब कराना चाहिए?
तेज बुखार के बाद स्पर्म की संख्या और गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है। जानें कब जांच उपयोगी है, कब दोबारा टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है और रिपोर्ट समझते समय किन बातों का ध्यान रखें।
बुखार के बाद स्पर्म टेस्ट कराने के लिए हर व्यक्ति को एक ही समय तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। अगर तेज या कई दिन बुखार रहा हो और जांच की जल्दी न हो, तो ठीक होने के लगभग तीन महीने बाद जांच कराने से अस्थायी असर कम होने के बाद की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन जांच पहले से तय हो, गर्भधारण में देरी हो रही हो या इलाज चल रहा हो, तो खुद से तारीख आगे न बढ़ाएं; डॉक्टर को बुखार की जानकारी देकर समय तय करें।
बुखार से स्पर्म पर असर क्यों पड़ सकता है?
शुक्राणु बनने की प्रक्रिया शरीर के सामान्य तापमान से थोड़े कम तापमान पर बेहतर चलती है। तेज बुखार के दौरान शरीर का तापमान बढ़ने से यह प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि हर बुखार से स्पर्म खराब होंगे या प्रजनन क्षमता स्थायी रूप से कम हो जाएगी।
असर इस बात पर निर्भर करता है कि बुखार कितना तेज था, कितने दिन रहा, बीमारी क्या थी और पहले से स्पर्म की स्थिति कैसी थी। कई लोगों में खास बदलाव नहीं दिखता, जबकि कुछ की रिपोर्ट में अस्थायी अंतर आ सकता है।
- स्पर्म की संख्या या concentration कम दिख सकती है।
- उनकी आगे बढ़ने की क्षमता, यानी motility, प्रभावित हो सकती है।
- सामान्य आकार वाले स्पर्म, यानी morphology, में बदलाव आ सकता है।
ये बदलाव बुखार उतरते ही दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं। कई बार कुछ हफ्तों बाद की रिपोर्ट पर असर नजर आता है। इसलिए सिर्फ जांच वाले दिन स्वस्थ होना ही पूरी कहानी नहीं बताता।
लगभग तीन महीने की बात क्यों कही जाती है?
नए शुक्राणु बनने और परिपक्व होने में लगभग ढाई से तीन महीने लगते हैं। इसी वजह से पिछले दो-तीन महीनों की बीमारी भी आज की वीर्य जांच, यानी semen analysis, को समझने में मायने रखती है।
तेज बुखार के बाद करीब तीन महीने का अंतर एक उपयोगी संदर्भ है, कोई पक्का नियम नहीं। कुछ लोगों की रिपोर्ट जल्दी सुधर सकती है, कुछ में अधिक समय लग सकता है। तीन महीने बाद हर रिपोर्ट सामान्य हो जाएगी, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
एक और बात समझें: पहले से चल रही स्पर्म संबंधी समस्या को केवल बुखार का असर मानकर छोड़ना भी ठीक नहीं। डॉक्टर पुरानी रिपोर्ट, बीमारी का विवरण और मौजूदा जांच साथ देखकर सलाह देते हैं।
आपकी स्थिति में टेस्ट कब उपयोगी होगा?
हल्का बुखार था और अब पूरी तरह ठीक हैं
अगर बुखार कम समय के लिए था, तो केवल इसी कारण जांच महीनों टालना जरूरी नहीं है। तय जांच से पहले डॉक्टर या लैब को बता दें कि बुखार कब हुआ था। जरूरत के अनुसार जांच अभी की जा सकती है और रिपोर्ट में कोई परेशानी दिखने पर दोबारा जांच का समय तय होगा।
तेज बुखार कई दिन रहा था
डेंगू, फ्लू या किसी दूसरी बीमारी में तेज बुखार रहा हो, तो बीमारी से ठीक होने की तारीख लिखकर रखें। यदि जांच नियमित मूल्यांकन के लिए है और कोई समय-संबंधी दबाव नहीं है, तो डॉक्टर लगभग तीन महीने बाद टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। अभी जांच करना भी संभव है, लेकिन उसकी व्याख्या में हाल का बुखार ध्यान में रखा जाएगा।
IUI या IVF की तैयारी चल रही है
अगर पत्नी की दवाएं शुरू हो चुकी हैं या इलाज की तारीख पास है, तो तीन महीने रुकने का फैसला खुद न करें। इलाज करने वाली टीम को तुरंत बताएं। मौजूदा semen analysis, पहले की रिपोर्ट और दोनों साथियों की स्थिति देखकर अगला कदम तय किया जाता है।
पत्नी की उम्र और पहले से मौजूद प्रजनन संबंधी समस्याएं भी समय तय करने में जरूरी हैं। ऐसे में फर्टिलिटी विशेषज्ञों से सलाह लेकर अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है।
टेस्ट बुखार के तुरंत बाद हो चुका है तो क्या करें?
रिपोर्ट देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, खासकर जब पहले सब सामान्य था और अब count या motility कम लिखी हो। लेकिन एक असामान्य रिपोर्ट से स्थायी बांझपन का निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। स्पर्म के परिणाम एक सैंपल से दूसरे सैंपल में भी बदल सकते हैं।
क्या आपने डॉक्टर को हाल की बीमारी बताई थी? अगर नहीं, तो रिपोर्ट दिखाते समय यह बात जरूर जोड़ें। जांच बेकार नहीं हुई है; बस उसे सही संदर्भ में समझना होगा।
- बुखार शुरू होने और ठीक होने की लगभग तारीख बताएं।
- कितने दिन तेज बुखार रहा और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा या नहीं, यह साझा करें।
- ली गई दवाओं के नाम या पर्चा साथ रखें।
- पुरानी semen analysis रिपोर्ट हो तो वह भी ले जाएं।
हाल के तेज बुखार का असर देखने के लिए डॉक्टर ठीक होने के करीब तीन महीने बाद दोबारा जांच करा सकते हैं। लेकिन स्पर्म बहुत कम हों या बिल्कुल न दिखें, तो शुरुआती मूल्यांकन और पुष्टि के लिए जांच पहले भी जरूरी हो सकती है। सिर्फ बुखार मानकर प्रतीक्षा न करें।
सैंपल देने से पहले तैयारी कैसे करें?
सही तैयारी से रिपोर्ट की उपयोगिता बढ़ती है। कानपुर की गर्मी, ऑफिस की छुट्टी और लैब पहुंचने का समय संभालते हुए अक्सर छोटी बातें छूट जाती हैं। अपॉइंटमेंट लेते समय सैंपल देने के निर्देश पहले पूछ लें।
स्खलन से उचित अंतर रखें
सामान्यतः semen analysis से पहले दो से सात दिन तक स्खलन से परहेज रखने को कहा जाता है। इसमें सेक्स और हस्तमैथुन दोनों शामिल हैं। अपनी लैब के निर्देश मानें और कितने दिन का अंतर रहा, सही बताएं। दोबारा जांच में संभव हो तो लगभग उतना ही अंतर रखें।
पूरा सैंपल इकट्ठा करें
लैब के दिए या स्वीकृत साफ, उपयुक्त कंटेनर में पूरा सैंपल लें। शुरुआती हिस्सा छूट जाए तो स्पर्म की संख्या का आकलन प्रभावित हो सकता है। ऐसा होने पर संकोच न करें, लैब को बताएं। सामान्य कंडोम, तेल या लुब्रिकेंट का उपयोग न करें, जब तक लैब ने विशेष अनुमति न दी हो।
घर से सैंपल लाने के नियम पूछें
घर पर सैंपल लेने की सुविधा हो तो उसे कितनी देर में और कैसे पहुंचाना है, पहले समझें। आमतौर पर सैंपल लगभग एक घंटे के भीतर पहुंचाना होता है, लेकिन लैब का निर्धारित समय मानें। कंटेनर को तेज धूप, बहुत गर्मी या ठंड से बचाएं।
रिकवरी के दौरान क्या मदद कर सकता है?
बुखार उतरने के बाद शरीर को सामान्य दिनचर्या में लौटने का समय दें। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और पानी लें। दाल, सब्जी, फल और अपनी जरूरत के अनुसार प्रोटीन वाला सामान्य घरेलू भोजन अच्छा आधार है; किसी एक चीज से स्पर्म तुरंत बढ़ने का दावा भरोसेमंद नहीं है।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें, शराब से बचें।
- बार-बार बहुत गर्म पानी के टब या sauna में बैठने से बचें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना antioxidants, हार्मोन या एंटीबायोटिक शुरू न करें।
- जिम के लिए testosterone या anabolic steroids न लें; ये शुक्राणु बनना दबा सकते हैं।
दवा लेते समय बुखार होना और दवा के कारण रिपोर्ट बदलना अलग बातें हैं। लिखी हुई दवाएं खुद बंद न करें। जरूरत हो तो डॉक्टर से उनकी समीक्षा कराएं।
कब इंतजार नहीं करना चाहिए?
अंडकोष में अचानक तेज दर्द, सूजन, लालिमा या बुखार के साथ दर्द हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। अचानक अंडकोष का दर्द आपात स्थिति भी हो सकता है। पेशाब में जलन या जननांग से असामान्य स्राव हो तो भी जांच टालना ठीक नहीं है।
अगर पहले से रिपोर्ट असामान्य है या लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो रहा, तो बुखार ठीक होने तक पूरी सलाह रोकने की जरूरत नहीं। पुरुष प्रजनन संबंधी मूल्यांकन में मेडिकल इतिहास, जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच और आगे के टेस्ट तय किए जा सकते हैं। हर व्यक्ति को हार्मोन जांच, अल्ट्रासाउंड या sperm DNA fragmentation टेस्ट की जरूरत नहीं होती।
रिपोर्ट को केवल एक संख्या की तरह न देखें
Semen analysis प्रजनन क्षमता की जानकारी देता है, लेकिन अकेले यह गर्भधारण होने या न होने का निश्चित फैसला नहीं सुनाता। सामान्य रिपोर्ट गर्भधारण की गारंटी नहीं है और थोड़ी असामान्य रिपोर्ट का मतलब प्राकृतिक गर्भधारण असंभव होना नहीं है।
वीर्य की मात्रा भी स्पर्म की संख्या से अलग है। अगर मात्रा कम दिखने से चिंता है, तो कम वीर्य मात्रा और गर्भधारण के बारे में जानकारी उपयोगी हो सकती है। सही योजना दोनों साथियों की स्थिति देखकर बनती है, केवल एक रिपोर्ट देखकर नहीं।
बुखार के बाद स्पर्म टेस्ट की तारीख या रिपोर्ट को लेकर उलझन है? PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में सलाह के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें या WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें। पुरानी रिपोर्ट और बीमारी का विवरण साथ रखें, ताकि अगला कदम समझकर तय किया जा सके।
Frequently asked questions
क्या बुखार के सात दिन बाद स्पर्म टेस्ट करा सकते हैं?
हां, जरूरत होने पर जांच कराई जा सकती है। लेकिन तेज बुखार का असर बाद के हफ्तों में भी दिख सकता है। डॉक्टर को बीमारी की तारीख बताएं; परिणाम और जांच के उद्देश्य के अनुसार दोबारा टेस्ट की जरूरत तय होगी।
क्या हर बुखार के बाद तीन महीने इंतजार करना जरूरी है?
नहीं। हल्का, कम समय का बुखार होने पर जांच टालना जरूरी नहीं हो सकता। तेज या लंबे बुखार के बाद, अगर जल्दी नहीं है, तो ठीक होने के लगभग तीन महीने बाद जांच उपयोगी हो सकती है।
क्या बुखार से स्पर्म हमेशा के लिए कम हो जाते हैं?
बुखार का असर अक्सर अस्थायी होता है, लेकिन सुधार का समय अलग-अलग हो सकता है। लगातार असामान्य रिपोर्ट को केवल बुखार का असर न मानें; डॉक्टर से अन्य संभावित कारणों का मूल्यांकन कराएं।
बुखार के बाद रिपोर्ट में स्पर्म बिल्कुल न दिखें तो क्या करें?
फर्टिलिटी विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से जल्द सलाह लें। रिपोर्ट की पुष्टि और कारण का मूल्यांकन जरूरी है। बिना सलाह केवल तीन महीने इंतजार करना उचित नहीं है।
क्या बुखार के बाद स्पर्म सुधारने की दवा खुद ले सकते हैं?
नहीं। बिना जांच सप्लीमेंट, एंटीबायोटिक या हार्मोन लेना जरूरी नहीं और कभी नुकसानदेह हो सकता है। खासकर testosterone शुक्राणु बनना कम कर सकता है। दवा केवल चिकित्सकीय सलाह से लें।