स्तनपान के दौरान गर्भधारण की कोशिश: क्या जानें?
स्तनपान के दौरान भी गर्भधारण हो सकता है, भले ही पीरियड्स वापस न आए हों। अगली प्रेग्नेंसी की तैयारी में ओव्यूलेशन के साथ माँ की सेहत, पिछले प्रसव से अंतर और बच्चे की पोषण जरूरतें भी समझें।
हाँ, स्तनपान के दौरान गर्भधारण हो सकता है, और पहली माहवारी आने से पहले भी अंडा निकल सकता है। स्तनपान के दौरान प्रेग्नेंसी की योजना बनाते समय सिर्फ पीरियड्स लौटने का इंतजार न करें; पिछले प्रसव से अंतर, आपकी सेहत और बच्चे की दूध पर निर्भरता देखकर डॉक्टर के साथ सही समय तय करें।
छोटे बच्चे की देखभाल के बीच अगले बच्चे के बारे में सोचना कई भावनाएँ साथ लाता है। कभी उम्र की चिंता होती है, कभी परिवार का दबाव, तो कभी यह सवाल कि दूध पिलाना बंद किए बिना दोबारा माँ बनना संभव है या नहीं। हर महिला के लिए एक ही जवाब सही नहीं होता।
स्तनपान से ओव्यूलेशन पर क्या असर पड़ता है?
दूध बनने में प्रोलैक्टिन हार्मोन की भूमिका होती है। बार-बार स्तनपान, खासकर रात की फीडिंग, उन हार्मोनल संकेतों को दबा सकता है जो ओव्यूलेशन यानी अंडा निकलने में मदद करते हैं। इसलिए प्रसव के बाद माहवारी कई महीनों तक बंद रह सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि अंडाशय हमेशा निष्क्रिय हैं। कुछ महिलाओं में स्तनपान जारी रहते हुए भी ओव्यूलेशन लौट आता है। फीडिंग का अंतर बढ़ने या बच्चा पूरक आहार लेने लगे तो बदलाव हो सकता है, लेकिन इसका कोई निश्चित महीना नहीं है। अपनी तुलना बहन या सहेली से करना अक्सर बेवजह चिंता बढ़ाता है।
पीरियड्स नहीं आए, तो क्या प्रेग्नेंसी नहीं होगी?
ऐसा मानना सही नहीं है। पहली माहवारी से पहले ओव्यूलेशन हो सकता है। यदि बिना गर्भनिरोधक संबंध बने हैं और प्रेग्नेंसी का संदेह है, तो होम प्रेग्नेंसी टेस्ट करें। चक्र का पता न हो तो आखिरी असुरक्षित संबंध के लगभग तीन सप्ताह बाद टेस्ट उपयोगी रहता है। नेगेटिव परिणाम के बावजूद संदेह बना रहे तो डॉक्टर से बात करें।
स्तनपान को गर्भनिरोधक समझने में कहाँ गलती होती है?
स्तनपान आधारित गर्भनिरोधक विधि, जिसे LAM कहते हैं, केवल सीमित परिस्थितियों में भरोसेमंद मानी जाती है। इसके लिए ये तीनों शर्तें साथ पूरी होनी चाहिए:
- बच्चे की उम्र छह महीने से कम हो।
- माहवारी वापस न आई हो।
- दिन और रात लगभग पूरी तरह स्तनपान हो रहा हो, बिना लंबे अंतराल के।
इनमें से कोई शर्त पूरी न हो तो स्तनपान को अकेला गर्भनिरोधक न मानें। दूसरी ओर, इन शर्तों के रहते ओव्यूलेशन दबा हो सकता है, इसलिए गर्भधारण की कोशिश का परिणाम देर से मिलना जरूरी नहीं कि किसी बीमारी का संकेत हो।
अगली प्रेग्नेंसी के लिए कितना अंतर रखें?
WHO जीवित शिशु के जन्म के बाद अगली गर्भावस्था की कोशिश से पहले कम से कम 24 महीने का अंतर रखने की सलाह देता है। यह प्रसव से अगली बार गर्भ ठहरने तक का अंतर है, दो बच्चों के जन्म के बीच का नहीं। बहुत कम अंतर से कुछ मातृ और शिशु संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
फिर भी उम्र, पहले से कम प्रजनन क्षमता, पिछले IVF उपचार या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में समय का निर्णय व्यक्तिगत होता है। यदि उम्र 35 वर्ष या अधिक है, तो खुद से लंबे समय तक इंतजार करने या जल्दबाजी करने के बजाय अभी परामर्श लें। पहले सीजेरियन, समय से पहले प्रसव, ज्यादा रक्तस्राव या गंभीर एनीमिया हुआ हो तो उसकी जानकारी जरूर दें।
क्या गर्भधारण के लिए दूध छुड़ाना जरूरी है?
हर महिला को स्तनपान बंद करने की जरूरत नहीं होती। नियमित ओव्यूलेशन लौट चुका हो तो दूध पिलाते हुए प्राकृतिक गर्भधारण संभव है। केवल प्रेग्नेंसी जल्दी चाहिए, इसलिए अचानक फीड बंद करना उचित नहीं; इससे स्तनों में दर्द, दूध जमना और बच्चे की पोषण संबंधी परेशानी हो सकती है।
WHO पहले छह महीने केवल स्तनपान और उसके बाद उचित पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे आगे तक स्तनपान जारी रखने की सलाह देता है। फीडिंग में बदलाव बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार होना चाहिए। खासकर छोटे शिशु में बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना दूध कम न करें।
यदि ओव्यूलेशन नहीं लौट रहा है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ और जरूरत पड़ने पर स्तनपान सलाहकार के साथ धीरे-धीरे बदलाव पर चर्चा की जा सकती है। रात की फीड घटाने से गर्भधारण निश्चित हो जाएगा, ऐसा कोई वादा सही नहीं है।
स्तनपान के दौरान प्रेग्नेंसी की योजना: व्यावहारिक तैयारी
पहले शरीर की रिकवरी देखें
क्या आपको लगातार चक्कर आते हैं, बहुत कमजोरी रहती है या प्रसव के बाद दर्द अभी भी बना है? इन समस्याओं को सिर्फ छोटे बच्चे की माँ होने की थकान मानकर न छोड़ें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार हीमोग्लोबिन, थायरॉइड या दूसरी जाँच सुझा सकते हैं। सभी महिलाओं को एक बड़ा हार्मोन पैकेज नहीं चाहिए।
- आमतौर पर कोशिश शुरू करने से कम से कम एक महीने पहले रोज 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड लेने की सलाह होती है। कुछ स्थितियों में अलग खुराक चाहिए, जो डॉक्टर तय करें।
- भोजन में दाल, चना, दूध या दही, हरी सब्जियाँ और अपनी पसंद के अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल करें।
- आयरन, कैल्शियम और अन्य सप्लीमेंट जरूरत के अनुसार लें; बहुत ज्यादा खुराक खुद से न शुरू करें।
- चल रही दवाओं, टीकाकरण, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समीक्षा कराएँ। तंबाकू और शराब से बचें।
पूरी रात की नींद मिलना अभी मुश्किल हो सकता है। घर में किसी की मदद से आराम का छोटा समय निकालना भी उपयोगी है। खुद पर वजन जल्दी घटाने या हर महीने परिणाम पाने का दबाव न डालें।
ओव्यूलेशन कैसे पहचानें?
पीरियड्स लौट आए हों तो उनकी तारीख नोट करें। शुरुआती चक्र अनियमित हो सकते हैं; कैलेंडर ऐप का अनुमान हमेशा सही नहीं होगा। ओव्यूलेशन किट भी हार्मोनल उतार-चढ़ाव के दौरान उलझन पैदा कर सकती है।
यदि सहज लगे तो हर दो से तीन दिन में संबंध रखना एक व्यावहारिक तरीका है। स्तनपान के दौरान योनि में सूखापन या दर्द हो सकता है। दर्द सहकर संबंध न बनाएँ; डॉक्टर से उपयुक्त लुब्रिकेंट और उपचार पर बात करें। जरूरत हो तो फॉलिक्युलर मॉनिटरिंग से अंडे के विकास का आकलन किया जा सकता है, लेकिन यह हर महिला के लिए जरूरी नहीं है।
फर्टिलिटी विशेषज्ञ से कब मिलें?
स्तनपान के दौरान माहवारी बंद रहना अपने आप में बांझपन का प्रमाण नहीं है। फिर भी उम्र और पिछली मेडिकल हिस्ट्री देखकर सलाह का समय तय करना चाहिए। सामान्यतः 35 वर्ष से कम उम्र में नियमित असुरक्षित संबंधों के बावजूद 12 महीने और 35 वर्ष या अधिक में छह महीने तक गर्भधारण न हो तो मूल्यांकन कराया जाता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र में शुरुआती परामर्श उचित है।
ये समय-सीमाएँ सबको इंतजार करने का निर्देश नहीं हैं। पीरियड्स गायब या बहुत अनियमित हों, पहले से PCOS, एंडोमेट्रियोसिस, ट्यूब की समस्या या साथी में शुक्राणु संबंधी समस्या हो तो पहले मिलें। स्तनपान की स्थिति बताते हुए फर्टिलिटी विशेषज्ञों से सलाह लेना निर्णय आसान बना सकता है।
स्तनपान में प्रोलैक्टिन स्वाभाविक रूप से बढ़ा हो सकता है। इसलिए रिपोर्ट का अर्थ सामान्य गैर-स्तनपान स्थिति से अलग हो सकता है। हार्मोन जाँच सही कारण और समय पर कराएँ। केवल एक रिपोर्ट देखकर ओव्यूलेशन की दवा या दूध कम करने की दवा शुरू न करें।
गर्भ ठहर जाए तो क्या स्तनपान जारी रख सकते हैं?
सामान्य, कम जोखिम वाली गर्भावस्था में अक्सर स्तनपान जारी रखा जा सकता है। गर्भावस्था में दूध की मात्रा या स्वाद बदल सकता है और निप्पल में संवेदनशीलता बढ़ सकती है। छोटे बच्चे का वजन और पोषण देखते रहना जरूरी है, खासकर यदि वह दूध पर काफी निर्भर है।
रक्तस्राव, लगातार पेट दर्द, गर्भाशय के संकुचन या समय से पहले प्रसव का जोखिम हो तो तुरंत प्रसूति विशेषज्ञ की सलाह लें। फर्टिलिटी उपचार की जरूरत पड़े तो भी स्तनपान जरूर बताएँ; दवाओं और उपचार के अनुसार योजना बदल सकती है।
आपकी उम्र, पिछले प्रसव और बच्चे की जरूरतों के अनुसार अगला कदम तय करने के लिए PRAVI IVF & Fertility Centre, कानपुर में अपॉइंटमेंट लें। समय और परामर्श संबंधी जानकारी के लिए WhatsApp +91 80091 50040 पर संपर्क करें।
Frequently asked questions
क्या स्तनपान करते समय पीरियड्स आए बिना गर्भ ठहर सकता है?
हाँ। पहली माहवारी से पहले ओव्यूलेशन हो सकता है, इसलिए पीरियड्स न आना गर्भधारण न होने की गारंटी नहीं है। असुरक्षित संबंध के बाद संदेह हो तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करें।
क्या दोबारा गर्भधारण के लिए रात की फीड बंद करनी चाहिए?
अपने आप रात की फीड बंद करना जरूरी नहीं है। फीडिंग का असर ओव्यूलेशन पर पड़ सकता है, लेकिन बदलाव बच्चे की उम्र, पोषण और आपकी स्थिति देखकर डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार के साथ तय करें।
पिछली डिलीवरी के कितने समय बाद अगली प्रेग्नेंसी की कोशिश करें?
WHO जीवित शिशु के जन्म के बाद अगली गर्भावस्था की कोशिश से पहले कम से कम 24 महीने का अंतर सुझाता है। अधिक उम्र, पहले की फर्टिलिटी समस्या या प्रसव की जटिलताओं में व्यक्तिगत परामर्श लें।
क्या स्तनपान के दौरान ओव्यूलेशन की दवा ले सकती हूँ?
बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं। दवा के अनुसार दूध बनने और शिशु पर असर अलग हो सकता है। डॉक्टर को स्तनपान की आवृत्ति और बच्चे की उम्र बताकर ही उपचार की योजना बनाएँ।
गर्भधारण हो जाए तो क्या तुरंत दूध छुड़ाना होगा?
सामान्य, कम जोखिम वाली गर्भावस्था में अक्सर इसकी जरूरत नहीं होती। अपनी पोषण जरूरतों और बच्चे के वजन पर ध्यान दें। रक्तस्राव, पेट दर्द या समय से पहले प्रसव के जोखिम में प्रसूति विशेषज्ञ से सलाह लें।